झांसी में मोदी मंत्र

Last Updated: Friday, October 25, 2013 - 21:13

वासिंद्र मिश्र
संपादक, ज़ी रीजनल चैनल्स

बीजेपी की तरफ से प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाए जाने के बाद से नरेंद्र मोदी एक के बाद एक रैलियां करते जा रहे हैं। इन रैलियों में दिए उनके भाषणों के जरिए उनकी रणनीति सामने आने लगी है। एक खास बात और है नरेंद्र मोदी भाषण चाहे कहीं दें, उनकी बातें पैन इंडिया ही होती हैं। झांसी में नरेंद्र मोदी का भाषण अपने आप में उस फिल्म की तरह था जिसमें हर विधा की चीजें मौजूद थी, चाहे वो एक्शन हो, कॉमेडी हो या फिर इमोशन से भर देने वाले सीन।
नरेन्द्र मोदी ने खुद को गरीबी से जोड़ा, उन दिनों की याद दिलाई जब वो ट्रेन में चाय बेचा करते थे। मोदी ने कहा कि ये बीजेपी की महानता है कि एक चाय बेचने वाला व्यक्ति आज प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार है। मोदी ने ना सिर्फ इस बयान के जरिए सियासत में परिवारवाद पर निशाना साधा बल्कि उस हर गरीब के दिल में जगह बनाने की कोशिश की जो मेहनत-मजदूरी कर बड़े होने का ख्वाब देखता है। इसमें कोई संदेह नहीं कि भारत में ऐसे लोगों की तादाद ज्यादा है।
इस रैली में शायद पहली बार मोदी ने लाखों लोगों के सामने खुद को पिछड़ा वर्ग का बताया। झांसी में मोदी ने ये बात यूं हीं नहीं कही, दरअसल बुंदेलखंड का वो इलाका ऐसा है जहां पिछड़े वर्ग के लोगों की तादाद ज्यादा है। मोदी बोले कि वो पिछड़ा वर्ग से आते हैं ताकि पिछड़े वर्ग के तमाम लोग उन्हें अपना रहनुमा समझ सकें। ये बुंदेलखंड के लिहाज से खासा महत्वपूर्ण है, क्योंकि यहां की सियासी बिसात पर पिछड़े वोंटो का अहम योगदान है। इस रैली में मंच पर नेताओं की मौजूदगी भी सियासत के इसी गणित के हिसाब से थी। मंच पर राजनाथ के बगल में कल्याण सिंह को जगह दी गई जो लोध जाति से हैं और बुंदेलखंड में लोध जाति के वोटर्स ज्यादा हैं। मंच पर इसके अलावा उमा भारती और विनय कटियार नज़र आए।
नरेंद्र मोदी अपने भाषण में राहुल गांधी के उस बयान का जिक्र करना नहीं भूले जिसमें उन्होंने अपनी दादी की हत्या के बारे में कहा था। राहुल गांधी के इस बयान के बहाने नरेंद्र मोदी ने 84 में हुए सिख विरोधी दंगों की चर्चा की। कांग्रेस की भूमिका पर सवाल खड़े किए और एंग्री यंगमैन की तरह सवाल किया कि क्या इसी गुस्से की प्रतिक्रिया के तौर पर सिख विरोधी दंगे हुए और आज तक गुनहगारों को सजा नहीं मिली। मोदी ने अपने इस बयान से ना सिर्फ कांग्रेस पर सवाल खड़े किए बल्कि सिख धर्म के लोगों को ये जताने की कोशिश भी की कि बीजेपी उनकी हमदर्द है। दरअसल इसके जरिए नरेन्द्र मोदी ने दिल्ली विधानसभा चुनाव में सिख वोटों को बीजेपी के पक्ष में मोड़ने की कोशिश की है।
नरेंद्र मोदी ने बुंदेलखंड के विकास के लिए अक्सर पैकेज के ऐलान को मुद्दा बनाकर लखनऊ और दिल्ली की सरकार पर भी सवाल खड़े किए। मोदी ने बताया कि पैकेज का जो हिस्सा मध्यप्रदेश में गया उससे विकास हुआ, उत्पादन तीन गुना बढ़ा और सारी व्यवस्था बेहतर हुई, लेकिन यूपी में पड़ने वाले बुंदेलखंड के हिस्से से दिल्ली और लखनऊ में बैठे लोगों की जेबें गर्म हुईं। इस मुद्दे के बहाने मोदी ने मध्य प्रदेश की शिवराज सरकार की जमकर तारीफ की साथ ही बुंदेलखंड में पड़ने वाले 13 जिलों के मतदाताओं के दिलों में भी जगह बनाने की कोशिश की।
मोदी ने अपने भाषण में शायद पहली बार, भले ही परोक्ष रूप से, मुस्लिम युवकों को भी ये बताना चाहा कि वो उनके हमदर्द हैं। मुद्दा बना राहुल का बयान, जिसमें राहुल ने मुजफ्फरनगर और आईएसआई कनेक्शन की बात की थी। मोदी ने कई सवाल उठाए, मसलन एक सांसद को इंटेलिजेंस इतनी महत्वपूर्ण बातें क्यों बताता है? अगर मुजफ्फरनगर वाली बात सही है तो कार्रवाई क्यों नहीं हो रही है? और अगर ऐसा नहीं है तो उन नौजवानों को बदनाम क्यों किया जा रहा है?

दरअसल मोदी ने ये बात यूं हीं नहीं कही, मोदी ने इसके जरिए एक साथ दो निशाने साधे, राहुल और इंटेलीजेंस एजेंसी पर सवाल खड़े किए ही, बिना सीधे तौर पर कहे मुज़फ्फरनगर के पीड़ित नौजवानों को भी ये जता दिया कि बीजेपी उनके साथ है। इसके साथ ही मोदी ने खुद पर गोधरा मामले में अल्पसंख्यक विरोधी होने के दाग को धोने की कोशिश भी की। मोदी ने झांसी के इस मंच पर अंग्रेजों के अत्याचार की तुलना कांग्रेस के अत्याचार से की।
मोदी ने कहा कि 1857 में जो नारा झांसी की वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई ने दिया था वही नारा आज भी लोगों को देना चाहिए। लक्ष्मीबाई ने कहा था नहीं देंगे, नहीं देंगे, अपनी झांसी नहीं देंगे, आज लोगों को कहना चाहिए नहीं देंगे, नहीं देंगे, देश बेइमानों को नहीं देंगे। मोदी ने कहा- हम आंसू बहाने नहीं पोंछने आए हैं, जनता ने देश को 60 साल कांग्रेस के हाथ में सौंपा है अब 60 महीने के लिए हमें दे, हम आपकी तकदीर भी बदलेंगे और देश की तस्वीर भी बदलेंगे।



First Published: Friday, October 25, 2013 - 21:13


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