क्या अर्जुन तेंदुलकर साबित होंगे क्रिकेट के 'सचिन'?

यूं तो क्रिकेट ने पूरी दुनिया में बेपनाह स्टार पैदा किए हैं. इन स्टार क्रिकेटर्स ने नाम और शोहरत दोनों कमाए और सफलतापूर्व अपना जीवन जिया. इन क्रिकेटर्स ने यह भी चाहा कि उनके बेटे क्रिकेट में उन्हीं की तरह नाम कमाए,  लेकिन नियति ने ऐसा नहीं होने दिया.

मृदुला भारद्वाज | Updated: Sep 17, 2017, 08:19 PM IST
क्या अर्जुन तेंदुलकर साबित होंगे क्रिकेट के 'सचिन'?
सचिन तेंदुलकर के बेटे अर्जुन का मुंबई अंडर-19 टीम में सलेक्शन

नई दिल्ली : दिग्गज क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर के बेटे अर्जुन तेंदुलकर का सलेक्शन अंडर 19 टीम में हो गया है. अर्जुन बड़ोदा में होने वाले जेवाई लेले ऑल इंडिया अंडर 19 इनविटेशनल वनडे टूर्नामेंट में मुंबई का प्रतिनिधित्व करेंगे. यह पहला मौका है जब अर्जुन को मुंबई की अंडर 19 में शामिल किया गया है. बता दें कि  अर्जुन तेंदुलकर ने 22 जनवरी 2010 को अंडर 13 टूर्नामेंट में पहली बार अपना हाथ आजमाया था. इसके बाद वो वेस्ट जोन के अंडर 14 टूर्नामेंट के लिए चुने गए थे. अंडर 14 के ही टूर्नामेंट में अर्जुन ने खार जिमखाना के लिए खेलते हुए अपनी पहली सेंचुरी जड़ी थी. इसके अलावा 2011 में अर्जुन ने सिर्फ 22 रन देकर 8 विकेट लेकर सुर्खियां बटोरी थीं.

यूं तो क्रिकेट ने पूरी दुनिया में बेपनाह स्टार पैदा किए हैं. इन स्टार क्रिकेटर्स ने नाम और शोहरत दोनों कमाए और सफलतापूर्व अपना जीवन जिया. इन क्रिकेटर्स ने यह भी चाहा कि उनके बेटे क्रिकेट में उन्हीं की तरह नाम कमाए,  लेकिन नियति ने ऐसा नहीं होने दिया. यहां हम कुछ ऐसे टॉप क्रिकेटर्स का जिक्र कर रहे हैं जिनके बेटे पिता के नक्शेकदम पर नहीं चल सके. 

विवियन रिचर्ड और माली रिचर्ड
वेस्ट इंडीज के विवियन रिचर्ड को महान किक्रटेर माना जाता है. एक समय था जब विवियन रिचर्ड की आक्रामकता से दुनिया के तमाम तेज गेंदबाज दहशत खाते थे, इसलिए जब रिचर्ड के बेटे माली रिचर्ड ने क्रिकेट की दुनिया में कदम रखा तो यह उम्मीद की जा रही थी कि क्रिकेट जगत कौ एक दूसरा रिचर्ड मिलने वाला है. 1983 में जिस साल वेस्ट इंडीज विश्व कप के फाइनल में भारत से हारी थी, उसी साल समरसेट, टोंटन में माली का जन्म हुआ. माली ने यूनिवर्सिटी स्तर पर क्रिकेट खेला. इंग्लैंड के काउंटी क्रिकेट में माली ने मिडिलसेक्स का भी प्रतिनिधित्व किया, लेकिन अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में माली कभी वेस्ट इंडीज टीम में शामिल नहीं हुए. बाएं हाथ के इस बल्लेबाज ने अनेक स्तरों पर 11 मैच खेले, इनमें वह एक बार भी अर्धशतक नहीं बना पाए. हालांकि एंटीगुआ और बारबुडा की तरफ से खेलते हुए एक अनाधिकृत मैच में 2003 में माली ने 319 रन की पारी खेली. लेकिन एक किक्रेटर के रूप में उनका उदय कभी नहीं हुआ.

सुनील गावस्कर और रोहन गावस्कर
किक्रेट इतिहास के पहले बल्लेबाज थे सुनील गावस्कर जिन्होंने टेस्ट मैचों में 10 हजार रन पूरे किए थे. क्रिकेट लीजेंड सुनील गावस्कर के पुत्र रोहन जब क्रिकेट खेलने लायक हुए तो पूरी दुनिया की निगाहें उन पर थी. 2004 में टीम रोहन का चयन भी हो गया. अपने डेब्यू मैच में रोहन ने गावस्कर के कुछ रिफ्लेक्सेस दिखाए. अपनी ही गेंद पर रोहन ने एक शानदार कैच पकड़ा. एडीलेड में रोहन ने जिंबाब्वे के खिलाफ अर्धशतक भी ठोका, लेकिन उनके खेल में स्थायित्व कभी दिखाई नहीं दिया. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोहन ने 11 वन डे मैच खेले. 2004 में ही चैंपियंस ट्रॉफी में रोहन ने अंतिम मैच खेला. बाद में वह इंडियन क्रिकेट लीग और इंडियन प्रीमियर लीग में भी खेले. इसके बाद वह कमेंटेटर बन गए. 

सर लेन हटन और रिचर्ड हटन
लेन हटन इंग्लैंड के महान खिलाड़ियों में से रहे हैं. ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 1938 में हटन के बनाए 364 ने टेस्ट क्रिकेट में एक लंबे समय तक रिकॉर्ड रहे. बाद में वेस्ट इंडीज के गैरी सोबर्स ने 20 साल बाद इस रिकॉर्ड को तौड़ा. रिचर्ड हटन के पुत्र रिचर्ड ने 1971 में पाकिस्तान के खिलाफ लॉर्ड्स में अपना डेब्यू मैच खेला. अपने पिता के विपरीत रिचर्ड का मजबूत पक्ष उनकी गेंदबाजी थी. डेब्यू मैच में उन्होंने दो विकेट भी लिए, लेकिन उनका अंतरराष्ट्रीय करियर बहुत छोटा रहा. उन्होने अपने देश के लिए केवल चार मैच खेले. अंतिम टेस्ट मैच भारत के खिलाफ खेला. 

कोलिन काउड्रे और क्रिस काउड्रे
महान क्रिकेटर कोलिन काउड्रे के पुत्र क्रिस 1984 में इंग्लैंड टीम के लिए चुने गए. मुंबई में भारत के खिलाफ उन्होंने टेस्ट डेब्यू किया. अपने पहले ही ओवर में क्रिस को विकेट मिला. उन्होंने कपिल देव का आउट किया था. 1988 में दोबारा टीम में उनका चयन हुआ, लेकिन वह टीम में बने नहीं रह पाये. उन्होंने कुल 6 टेस्ट और 3 वनडे खेले और उनका करियर समाप्त हो गया. 

सचिन तेंदुलकर और अर्जुन तेंदुलकर
आधुनिक क्रिकेट में भगवान का दर्जा हासिल करने वाले सचिन तेंदलुकर ने जितनी ख्याति और दौलत पाई है उतनी कम ही लोगों को मिलती है. क्रिकेट से संन्यास लेते समय अधिकांश रिकॉर्ड सचिन के नाम थे. इसलिए जब सचिन के बेटे अर्जुन ने क्रिकेट सीखना और खेलना शुरू किया तो सबकी निगाहें इस बात पर ही थीं कि क्या क्रिकेट की दुनिया में नया तेंदुलकर आ पाएगा. अर्जुन की उम्र अभी 17 साल है. वह तेज गेंदबाज के साथ-साथ आक्रामक बल्लेबाज भी हैं. हाल ही में अर्जुन का चयन मुंबई की अंडर 19 टीम के लिए हुआ है. 16 से 23 सितंबर तक खेले जाने वाले इस टूर्नामेंट में अर्जुन पर सबकी निगाहें रहेंगी. हालांकि, यह टूर्नामेंट बीसीसीई का ईवेंट नहीं है. फिर भी इसमें सबकी निगाहें अर्जुन पर ही रहेंगी. अब ये वक्त ही तय करेगा कि अर्जुन अपने पिता के नक्शेकदम पर चल पाता है या वह भी इतिहास को दोहराते हुए असफल साबित होता है.