India Economy Growth: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ( PM Narendra Modi) ने मोदी 3.0 का विजन रख दिया है. पीएम मोदी दावा कर रहे हैं कि अगर तीसरी बार केंद्र में एनडीए की सरकार बनेगी तो भारत की अर्थव्यवस्था (Indian Economy)  विश्व की तीसरी सबसे बड़ी इकोनॉमी बन जाएगी. जिस रफ्तार से भारत की इकोनॉमी (Indian Economic Growth) बढ़ रही है, ऐसा लग भी रहा है कि अगले पांच सालों में भारत इस लक्ष्य को हासिल कर लेगा. जहां एक ओर भारत की अर्थव्यवस्था बुलेट ट्रेन पर सवार है तो वहीं उसके पड़ोसी देश आर्थिक मंदी के दौर से गुजर रहा है. चाहे बात पाकिस्तान की हो या श्रीलंका की. चीन की हो या भी दुनिया के सबसे ताकतवर देश अमेरिका की.  ये देश आर्थिक चुनौतियां का सामना कर रहे हैं.  


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पाकिस्तान की इकोनॉमी कंगाल, महंगाई चरम पर 


भारत का पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान कभी भारत का हिस्सा हुआ करता था, दोनों देश को एक साथ आजादी मिली, लेकिन आज भारत दुनिया के टॉप 5 इकोनॉमी में शामिल है तो वहीं पाकिस्तान महंगाई (Pakistan Economic Crisis) से बेहाल है. पाकिस्तान का खजाना खाली है. महंगाई इस स्तर पर पहुंच चुकी है कि वहां के लोग दाने-दाने को मोहताज हो रहे है. चीन और अंतराष्ट्रीय मुद्रा कोष के कर्ज पर पाकिस्तान की इकोनॉमी चल रही है. खस्ताहाल पाकिस्तान में खाद्य महंगाई दर 33.1 फीसदी के पार जा चुकी है. आईएमएफ के बेलआउट पैकेज से पाकिस्तान को दिवालिया होने से तो बचा लिया,लेकिन वहां की जनता महंगाई के बेहाल है.  


चीन घटती महंगाई से खस्ताहाल 


कोरोना के बाद से ही चीन की अर्थव्यवस्था (China Economic Crisis) बुरे दौर से गुजर रही है. रियल एस्टेट कंपनियां दिवालिया हो रही है. रियल एस्टेट का संकट चीन के बैंकिंग सेक्टर तक पहुंच गया है, बेरोगजारी चरम पर है तो वहीं चीन की लगातार गिरती महंगाई चिंता बढ़ रही है.जनवरी में चीन का कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स 0.8 फीसदी की गिरावट के साथ 15 सालों के न्यूनतम स्तर पर पहुंच गया. लगातार गिरती कीमत चीन की इकोनॉमी पर बुरा असर डाल रही है. वहीं चीन सरकार की नीतियों के चलते विदेशी कंपनियां चीन का साथ छोड़ रही हैं.  


अमेरिका कर्ज की किस्त चुकाते-चुकाते बेहाल 


दुनिया की सबसे बड़ी इकॉनमी अमेरिका कर्ज (America Debt) के जाल में फंसा हुआ है. अमेरिका पर कर्ज 24 साल में छह गुना बढ़ गया है. साल 2000 में जहां अमेरिका पर 5.7 ट्रिलियन डॉलर का कर्ज था वो अब बढ़कर 34.2 ट्रिलियन डॉलर पहुंच गया है. वहीं यूएस कांग्रेस के बजट दस्तावेजों की माने तो अगले दशक में अमेरिका का कर्ज बढ़कर 54 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है. अमेरिका का कर्ज वर्तमान में देश की जीडीपी का करीब 125% है, जिस रफ्तार से अमेरिका पर कर्ज बढ़ रहा है, अगर स्थिति यही रही तो उसे रोज करीब 1.8 अरब डॉलर ब्याज का चुकाना पड़ सकता है. बढ़ते कर्ज के चलते  फिच ने अमेरिका के सॉवरेन डेट की रेटिंग AA+ से घटाकर AAA कर दी.  


रॉकेट की रफ्तार से भाग रही भारत की अर्थव्यवस्था 


भारत की अर्थव्यवस्था तेज रफ्तार से भाग रही है. वर्ल्ड बैंक की रिपोर्ट के मुताबिक भारत ने निवेश और घरेलू मांग के दम पर अपनी इकोनॉमी तो बल दिया है. वर्लड बैंक ने चालू वित्त वर्ष 2023-24 में भारत की अर्थव्यवस्था के 6.3 प्रतिशत की दर से बढ़ने का अनुमान जताया है. जहां महाशक्तियां आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रही है. भारत की इकोनॉमी तेज रफ्तार से भाग रही है. वैश्विक जीडीपी में भारत का योगदान 3 फीसदी का है, जो 1993 में यह केवल एक फीसदी ही था. आज भारत विश्व की पांचवीं सबसे बड़ी इकोनॉमी है, जो दुनियाभर की कंपनियों को अपनी ओर आकर्षित कर रहा है. ब्रिटिश सांसद करन बिलिमोरिया के मुताबिक साल 2060 तक भारत दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा.