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महाराष्ट्र चुनाव 2019: NDA में नहीं गली छोटे दलों की दाल, 14 सीटों से करना होगा संतोष

एनडीए (NDA) के छोटे सहयोगी दलों को दी जाने वाली सीटों की संख्या 14 से आगे बढ़ नहीं पाई है. केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले (Ramdas Athawale) की रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (RPI) को 6, रयतक्रांती संगठन को 3, शिवस्वराज्य संगठन को 3, राष्टीय समाज पार्टी को 2 सीटें दो गई है.

महाराष्ट्र चुनाव 2019: NDA में नहीं गली छोटे दलों की दाल, 14 सीटों से करना होगा संतोष
महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में एनडीए में छह दल मिलकर भाग्य आजमा रहे हैं, लेकिन ज्यादातर सीटों पर बीजेपी+शिवसेना लड़ रही है.

मुंबई: महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों (Maharashtra Assembly Elections 2019) में बीजेपी (BJP) बड़े भाई की भूमिका में दिख रही है. सीट शेयरिंग में शिवसेना को 124 सीटों तक सीमित रखके बीजेपी (BJP) ने यह दिखाया है, तो छोटे सहयोगी दलों को 18 सीटें देने की घोषणा पहले बीजेपी (BJP) ने की थी. बीजेपी (BJP) इन छोटे सहयोगी दलों को सर्फ 14 सीटें देने जा रही है. हालांकि इसकी आधिकारीक घोषणा बीजेपी (BJP) ने नहीं की है. एनडीए (NDA) के छोटे सहयोगी दलों को दी जाने वाली सीटों की संख्या 14 से आगे बढ़ नहीं पाई है. केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले (Ramdas Athawale) की रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (RPI) को 6, रयतक्रांती संगठन को 3, शिवस्वराज्य संगठन को 3, राष्ट्रीय समाज पार्टी को 2 सीटें दो गई है.

2014 में बीजेपी (BJP) पर इन छोटे सहयोगी दलों का दबाव था. 2019 के विधानसभा चुनाव तक हालात बदल गए हैं. पिछले पांच सालों में स्थानीय निकाय चुनावों से लेकर लोकसभा तक बीजेपी (BJP) ने बड़ी जीत हासिल की है. महाराष्ट्र में बीजेपी (BJP) की ताकत कई गुना बढ़ी है. ऐसे में केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले की आरपीआई, महाराष्ट्र के मंत्री सदाभाऊ खोत की रयतक्रांती संगठन, विनायक मेटे की शिवस्वराज्य संगठन और महाराष्ट्र के मंत्री महादेव जानकर की राष्ट्रीय समाज पार्टी को सिर्फ 14 सीटों पर संतुष्ट होना होगा.

बीजेपी (BJP) यहीं नहीं रुकी, बल्कि इन छोटे दलों में अपने ही कार्यकर्ताओं को टिकट देगी. ताकि जीत भी तय हो. इन 14 सीटों में से कुछ सीटों पर बीजेपी (BJP) के चुनाव चिन्ह पर भी लड़ सकते हैं. इस रणनीति के तहत विधानसभा में बीजेपी (BJP) अपने नंबर शिवसेना से कई गुना बढ़ाना चाहती है.

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लोकसभा चुनाव के वक्त महाराष्ट्र में बीजेपी (BJP) ने छोटे प्रादेशिक पार्टियों को एक भी सीट नहीं दी थी. तब आश्वासन दिया गया था कि विधानसभा चुनावों में छोटे सहयोगी दलों को न्याय दिया जायेगा. अब शिवसेना-बीजेपी (BJP) के गठबंधन की सीट शेयरिंग की चर्चा से पहले वैसे ही हुआ. पहले छोटे प्रादेशिक दलों को 18 सीटे देने की घोषणा बीजेपी (BJP) ने किए, बाद में महाराष्ट्र विधानसभा की 288 सीटों के बंटवारे को लेकर बीजेपी (BJP)-शिवसेना के बीच पिछले महीने से चर्चा शुरू थी. पितृ पक्ष में दोनों पार्टियों की ओर से कुछ संकेत नहीं मिले थे, लेकिन घटस्थापना के साथ ही बिना सीट शेयरिंग की चर्चा किए शिवसेना पक्षप्रमुख ने मातोश्री निवासस्थान से एबी फॉर्म बांटना शुरू कर दिया. उम्मीदवारों के नाम की घोषणा हुई. बीजेपी (BJP) ने अपनी सूची दिल्ली से जारी की. आखिरकार तय हुआ कि बीजेपी (BJP) 164 और शिवसेना 124 सीटों पर चुनाव लड़ेगी. इसका ऐलान करने से दोनों पार्टियां बचती रहीं.

छोटा भाई की भूमिका में शायद शिवसेना को रहना राज न आया हो, इसलिए कम सीटों की बात पर चुप्पी साधी और बीजेपी (BJP) से मिली सीटे स्वीकार कर ली. हालांकि बीजेपी (BJP) हाईकमान शिवसेना को 119 से ज्यादा सीटें देने के हक में नहीं थे. दोनों पार्टियों के इस सीट बंटवारे में छोटे दलों से बात होती नहीं दिखी. बीजेपी (BJP) के तरफ से सिर्फ संदेशा गया. बदलते राजनीतिक हालात में छोटे दल भी शायद बीजेपी (BJP) के सीट शेयरिंग का फैसला को मंजूरी दी है. 164 सीटे बीजेपी (BJP) के खाते में है. उसमें से 18 सीटें उसे सहयोगी छोटे दलों को देनी थी, लेकिन सिर्फ 14 सीटों पर छोटे दलों को सतुंष्ट होना पड़ा.

हालांकि आरपीआई-अठावले जैसे गुट ज्यादा सीटों की मांग कर रहे हैं. इन छोटे सहयोगी दलों के पास बदलते राजनीतिक हालात में बीजेपी (BJP) जैसा कोई विकल्प भी नहीं दिखता ये भी सच्चाई है.