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कुपोषण की जद में अश्विनी चौबे का बक्सर, एक दिन में 36 अतिकुपोषित बच्चों की पहचान

इन दिनों बक्सर जिला कुपोषण की जद में आ चुका है. जिले में कुपोषण के शिकार बच्चों के मिलने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है.

कुपोषण की जद में अश्विनी चौबे का बक्सर, एक दिन में 36 अतिकुपोषित बच्चों की पहचान
बक्सर में बच्चे कुपोषण के शिकार.

बक्सर : बिहार के बक्सर में लगातार बढ़ रहे अतिकुपोषित बच्चो की संख्या चिंताजनक विषय बन चुकी है. सिर्फ एक दिन में 36 अतिकुपोषित बच्चे मिलने से हड़कंप मचा हुआ है. पीड़ित बच्चों के लिए अस्पताल में बेड तक कम पड़ गए. ज्ञात हो कि बक्सर केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री अश्विनी चौबे का संसदीय क्षेत्र है, बावजूद बच्चों की स्थिति यहां दयनीय है.

इन दिनों बक्सर जिला कुपोषण की जद में आ चुका है. जिले में कुपोषण के शिकार बच्चों के मिलने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है. सिर्फ एक दिन में 36 अतिकुपोषित बच्चों के मिलने के बाद जिले में खलबली मच गयी है. इतना ही नहीं, सदर अस्पताल में बेड के आभाव में बच्चों का इलाज करने के बजाय उन्हें वापस लौटाया जा रहा है. यह घटना स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खोलने के लिए काफी है. 

लगातार बढ़ रहे अतिकुपोषित बच्चों की संख्या सरकार के चिंता का विषय है. नवानगर प्रखंड से कुपोषण के शिकार पांच बच्चों की खबर जी मिडिया पर दिखाने के बाद स्वास्थ्य विभाग की नींद खुली. इसके बावजूद कुपोषण के शिकार बच्चों की संख्या में इजाफा हुआ. 15 दिनों में यह आंकड़ा 35 के पार पहुंच गया.

खबर दिखाए जाने के बाद यह आशंका जतायी गई थी कि जिले के अन्य प्रखंडों में भी बच्चों का स्वास्थ्य जांच किया जाए तो यह आंकड़ा चौकाने वाला हो सकता है. कुछ ऐसा ही हुआ भी. सिर्फ एक दिन में 36 अतिकुपोषित बच्चों के मिलने के बाद स्वास्थ्य महकमे में ही नहीं बल्कि पुरे जिले में हड़कंप मच गया है.

शुरुआती जांच में कुपोषण का कारण आंगनबाड़ी केंद्रों में सही तरीके से और सही समय पर पोषाहार नहीं मिलने को बताया जा रहा है. बक्सर सदर अस्पताल में पोषाहार पुनर्वास केंद्र में केवल 20 बच्चों को ही रखने की क्षमता है, जिसके कारण कुपोषण के शिकार अन्य बच्चों को इलाज भी नसीब नहीं हो पा रहा है. चिकित्सक अपनी मज़बूरी का रोना रो रहे हैं.

डॉक्टर के मुताबिक, अगर कुल आंकड़ों पर नजर डालें तो केवल जुलाई महीना में अब तक अतिकुपोषित बच्चों की संख्या बढ़कर 100 के पार पहुंच गई है. इनमें से सिर्फ 20 बच्चों का इलाज बक्सर सदर अस्पताल के पोषण पुनर्वास केंद्र में चल रहा है. जाहिर है स्वास्थ्य महकमे की चिंता भी काफी बढ़ गई है. पीड़ित बच्चों के परिजनों ने बताया कि आंगनबाड़ी केन्द्रों में सही पोषाहार नहीं मिलने के कारण उन्हें काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है.

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