बिहार: मुंगेर में चमक खो रहा डॉल्फिन पार्क, बैटरी चोरी होने के कारण नहीं जलता सोलर लाइट

सोझी गंगा घाट पर दो वर्ष पूर्व पर्यावरण एवं वन विभाग द्वारा करीब 50 लाख की लगत से बना डॉल्फिन पार्क वर्तमान में रख रखाव के अभाव में अपनी चमक खोता जा रहा है. 

बिहार: मुंगेर में चमक खो रहा डॉल्फिन पार्क, बैटरी चोरी होने के कारण नहीं जलता सोलर लाइट
डॉल्फिन पार्क वर्तमान में रख रखाव के अभाव में अपनी चमक खोता जा रहा है.

मुंगेर: बिहार के मुंगेर के सोझी गंगा घाट पर दो वर्ष पूर्व पर्यावरण एवं वन विभाग द्वारा करीब 50 लाख की लगत से बना डॉल्फिन पार्क वर्तमान में रख रखाव के अभाव में अपनी चमक खोता जा रहा है. वहीं, यहां की व्यवस्था को ठीक करने के बदले वन विभाग बस पार्क देखने वाले लोगों से पैसे वसूलने में लगा है. जिसके कारण अब यह पार्क लोगों से दूर होता जा रहा है.
 
दरअसल पर्यावरण एवं वन विभाग द्वारा करीब 50 लाख की लगत से बना डॉल्फिन पार्क का निर्माण किया गया था. जिसे वर्ष 2017 में आम लोगों के लिए खोला गया. वन विभाग द्वारा इस पार्क का निर्माण गंगा में रहने वाली डॉल्फिन मछलियों की संख्या बढ़ाने के उद्देश्य से किया गया था. डॉल्फिन की संख्या संख्या पूरे भारत में मात्र दो हजार से भी कम रह गई है.

उसे कैसे सुरक्षित रखा जाए इसके लिए लोगों को जागरूक करना है. जिसके लिए इस पार्क का निर्माण इस प्रकार किया गया कि हर तरफ लोगों को कलाकृति के माध्यम से पर्यावरण बचाव का संदेश दिया जा सके. साथ ही आने वाले पर्यटक यहां नौका विहार का भी आनंद उठा सके.

वहीं, डॉल्फिन पार्क वर्तमान में विभागीय उदासीनता के कारण शाम होते ही अंधेरे में डूब जाता है. जिसके कारण यहां केवल दोपहर तक ही लोग आते हैं. वो भी काफी कम संख्या में है. 

जबकि शाम होने पर लोग इस पार्क में आने से परहेज करते हैं. क्योंकि इस पार्क में देखने के लिये ही केवल तीन सोलर लाइट और पार्क के चारों ओर लैंप पोस्ट लगे हैं. लेकिन हकिकत में सभी सोलर लाइट की बैटरी एक वर्ष पूर्व चोरी हो जाने के कारण ये सोलर लाइट नहीं जलते. 

वहीं, पार्क के चारों ओर लगे लैंप पोस्ट से बल्ब चोरी होने के कारण ये लाइटें भी दिखावा बन कर रह गई है. जबकि विभाग द्वारा इस पार्क की सुरक्षा में कुल पांच सुरक्षा गार्ड लगाये गए हैं. लेकिन ये गार्ड दिनभर अपनी ड‍्यूटी करने के बजाय या तो पार्क में आने वाले लोगों का टिकट काटते रहते हैं या पार्क के अंदर बने कक्ष में बैठे रहते हैं.