बिहार : गोपालगंज में फिर मंडराने लगा बाढ़ का खतरा, गंडक का कटाव तेज

करोड़ों रुपये खर्च होने का बावजूद इस बांध में कई दिनों से कटाव शुरू हो गया है. 

बिहार : गोपालगंज में फिर मंडराने लगा बाढ़ का खतरा, गंडक का कटाव तेज
गोपालगंज में फिर मंडराने लगा बाढ़ का खतरा.

गोपालगंज : बिहार के गोपालगंज में एक बार फिर बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है. हलांकि इस बार गंडक में पानी का बहाव ज्यादा नहीं है, लेकिन गंडक के लगातार घटते-बढ़ते जलस्तर की वजह से नवनिर्मित सारण बांध में कटाव तेज हो गया है. कटाव तेज होने की वजह से बांध की मिट्टी लगातार कट रही है. इस कारण से कुचायकोट के विशम्भरपुर गांव में बने स्कूल भवन को बचाने के लिए ग्रामीण जद्दोजहद कर रहे हैं.
 
कुचायकोट के विशम्भरपुर हाइस्कूल के समीप बीते वर्ष यूपी की सीमा अहिरौली दान से लेकर जादोपुर महासेतु तक कई किलोमीटर लंबा सारण बांध का निर्माण करवाया गया था. बांध के निर्माण में कई करोड़ रुपये की लागत आई थी.
 
करोड़ों रुपये खर्च होने का बावजूद इस बांध में कई दिनों से कटाव शुरू हो गया है. यह कटाव 4.9 किलोमीटर से लेकर 5.3 किलोमीटर तक हो रहा है. करीब 400 मीटर तक हो रहे कटाव को रोकने के लिए स्थानीय ग्रामीण दिनरात श्रमदान कर रहे हैं.

विशम्भरपुर गांव के राजेश देहाती का कहना है कि करोड़ों रुपये की लागत से इस बांध का निर्माण कराया गया था, लेकिन निर्माण के बाद ही यहां लगातार कटाव हो रहा है. बीती रात इस बांध में अचानक कटाव तेज हो गया, जिसे रोकने के लिए जलसंसाधन विभाग के संवेदक के पास ना तो पर्याप्त साधन थे और ना ही मजदुर. इस कारण से सैकड़ों ग्रामीणों ने श्रमदान कर इस बांध को बचाया.

गंडक दियारा संघर्ष समिति के संयोजक अनिल कुमार मांझी का आरोप है कि यहां दिन में संवेदक सिर्फ खानापूर्ति कर बिल बनाते हैं. विभाग और संवेदक की शिथिलता की वजह से ग्रामीण रातभर जगकर इस बांध को बचाने की कवायद कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि अगर यह बांध टूट जाता है तो कुचायकोट के 70 गांव के लाखों लोग प्रभावित होंगे.

इस मामले में जलसंसाधन और बाढ़ नियंत्रण विभाग के मुख्य अभियंता इंजिनियर मुरलीधर सिंह ने कहा कि गाइड बांध के सामानांतर नया सारण बांध बनाया गया है. जो पूरी तरह सुरक्षित है. उन्होंने कहा कि ग्रामीण हमेशा मदद करते हैं. उनकी टीम पूरी तरह मुस्तैद है. ग्रामीणों का आरोप सही नहीं है कि संवेदक रात को भाग गए थे. उन्होंने कहा फ्लड फाइटिंग का कार्य लगातार जारी है. बांध को बचा लिया जाएगा.