मुजफ्फरपुर में Corona का कहर, श्मशान घाटों पर अंतिम संस्कार के लिए लगानी पड़ रही है लंबी लाइन

Muzaffarpur Samachar: बिहार के कई दूसरे जिलों की तरह अब मुजफ्फरपुर में भी कोरोना वायरस संक्रमण तेजी से अपना पैर पसार रहा है. आलम यह है कि श्मशान घाटों पर भी लाइन लगाने की नौबत आ गई है.  

मुजफ्फरपुर में Corona का कहर, श्मशान घाटों पर अंतिम संस्कार के लिए लगानी पड़ रही है लंबी लाइन
मुजफ्फरपुर के श्मशान घाट पर शव जलाने के लिए लगानी पड़ रही है लाइन (जी न्यूज फोटो)

Muzaffarpur: बिहार के मुजफ्फरपुर में भी कोरोना संक्रमण के मामले प्रदेश के दूसरे राज्यों की तरह तेजी से बढ़ रहे हैं. ऐसे में अस्पताल से लेकर श्मशान घाट तक पर लोगों को लंबी लाइन में इंतजार करना पड़ रहा है. बिहार के अकेले मुजफ्फरपुर जिले में बीते 48 घंटे में 30 लोगों की कोरोना वायरस संक्रमण से जान गई है. यही वजह है कोरोना वायरस से संक्रमित व्यक्ति की मौत होने के बाद अब जिले के शहरी क्षेत्र में सिकंदपुरपुर श्मशान घाट पर अंतिम संस्कार का आंकड़ा बढ़ गया है.

इस कोरोना महामारी आपदा की वजह से सिकंदरपुर श्मशान घाट छोटा पड़ गया है. जानकारी के अनुसार, इस श्मशान घाट पर पर्याप्त जगह नहीं रहने की वजह से आसपास के क्षेत्र के ऐसे में ऐसे मृतक जो संक्रमित नहीं हैं उनके शवों को जलाने के लिए काफी इंतजार करना पड़ रहा है. यही हाल मुजफ्फरपुर के सिकंदरपुर स्थित मुक्तिधाम श्मशान घाट का भी है, यहां लोगों को अपने परिजनों को जलाने के लिए लाइन लगानी पड़ रही है. 

वहीं, सिकंदपुर स्थित मुक्तिधाम के प्रभारी अशोक कुमार ने बताया कि पहले दिन भर में औसतन 5 से 7 शव आते थे, अब पिछले 3-4 दिनों से लगभग 20 से 25 शव आ रहे हैं. इसमें से 10 से 12 कोविड मृतकों का शव रहता है. अशोक कुमार ने इसके साथ ही यह भी बताया कि कोरोना मरीज के शवों को जलाने के लिए अलग से व्यवस्था की गई है.

मुक्तिधाम के प्रभारी ने माना कि पिछले कुछ दिनों से अधिक शवों के आने की वजह से लोगों को इंतजार भी करना पड़ता है क्योंकि यहां पर जलाने के लिए जगह( स्टाल) कम पड़ रहा है. श्मशान घाट के प्रभारी का कहना है कि पहले 5 से 7 शव आते थे, उसी के हिसाब से घाट बनाया गया था. कोरोना की वजह से अब 20 से 25 शव आ रहे हैं तो थोड़ी दिक्कत हो रही है. इसी से यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि अगर समय रहते हम सभी सचेत नहीं हुए तो आने वाला समय कितना भयावह हो सकता है.

(इनपुट- मनोज कुमार)