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बिहार: 'मछली' पर तेज हुई सियासत, रोक नहीं लगाए जाने पर विपक्ष ने जमकर साधा निशाना

विपक्षी दल जहां स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय पर निशाना साध रहे हैं और उनसे रोक नहीं लगाए जाने की वजह पूछ रहे हैं.

बिहार: 'मछली' पर तेज हुई सियासत, रोक नहीं लगाए जाने पर विपक्ष ने जमकर साधा निशाना
न तीन दिन बीत जाने के बाद भी स्वास्थ्य विभाग की ओर से कोई फैसला नहीं लिया गया है. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

पटना: बिहार में बाहर से आनेवाली जहरीली मछली पर रोक नहीं लगाए जाने को लेकर सियासत तेज हो गई है. विपक्षी दल जहां स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय पर निशाना साध रहे हैं और उनसे रोक नहीं लगाए जाने की वजह पूछ रहे हैं la वहीं, जेडीयू का कहना है कि पूरी प्रक्रिया से ही कोई फैसला लिया जाता है, सरकार जल्द ही उचित कार्रवाई करेगी. 

आंध्र समेत अन्य प्रदेशों से बिहार आनेवाली मछलियों पर बैन लगाने की सिफारिश मत्स्य संसाधन विभाग की ओर से स्वास्थ्य विभाग को की जा चुकी है, लेकिन तीन दिन बीत जाने के बाद भी स्वास्थ्य विभाग की ओर से कोई फैसला नहीं लिया गया है, जबकि विभाग के प्रधान सचिव ने 24 घंटे के अंदर फैसला लेने का संकेत दिया था. अब इसको लेकर विपक्ष की ओर से सवाल उठाए जा रहे हैं. 

विपक्ष के सवालों के बीच जेडीयू सरकार के बचाव में उतर आई है. प्रवक्ता राजीव रंजन का कहना है कि रोक की सिफारिश भले ही कर दी गई है, लेकिन उसे लागू करने से पहले विभिन्न पहलुओं पर विचार करना होता है. सरकार की ओर से वही किया जा रहा है. 

बाहर की मछली पर प्रतिबंध नहीं लगने को लेकर आम लोग और विशेषज्ञ भी सवाल उठा रहे हैं. साइंस कॉलेज में फर्मलीन की जांच करनेवाली विभा कुमारी का कहना है कि ऐसा ही मामला उड़ीसा में आया था, तो वहां की सरकार ने तुरंत फैसला लिया था, लेकिन बिहार सरकार क्यों देरी कर रही है, ये समझ से ऊपर है. 

बिहार में बड़े पैमाने पर आंध्र प्रदेश समेत अन्य राज्यों से मछली मंगवाई जाती है. छह माह पहले जब बाहर की मछली में फर्मलीन की पुष्टि हुई थी, उसी समय से इसके बैन की मांग हो रही है. लेकिन सरकार की ओर से जांच की बात कही गयी थी. अब जांच की रिपोर्ट भी आ गई है और फर्मलीन की पुष्टि भी हो गई है. ऐसे में मछली आयात पर रोक नहीं लगना कई सवाल खड़े कर रहा है. देखना यह होगा कि सरकार इसपर कब फैसला लेती है.