खूंटी: पंच ने परिवार के लिए जारी किया सामाजिक बहिष्कार का फरमान, यह वजह आई सामने...

समुदाय के पंच ने सिर्फ इसलिए सामाजिक बहिष्कार कर दिया. क्योंकि संबंधित परिवार ने जमीन मापी के दौरान बिन बुलाए पंच को खर्चा-पानी नहीं दिया. 

खूंटी: पंच ने परिवार के लिए जारी किया सामाजिक बहिष्कार का फरमान, यह वजह आई सामने...
पंच ने परिवार के लिए जारी किया सामाजिक बहिष्कार का फरमान.

मनोज सिंह/खूंटी: एक ग्रामीण महिला समेत उसके पूरे परिवार का अपने ही समुदाय के पंच ने सिर्फ इसलिए सामाजिक बहिष्कार कर दिया. क्योंकि संबंधित परिवार ने जमीन मापी के दौरान बिन बुलाए पंच को खर्चा-पानी नहीं दिया. अब संबंधित परिवार वालों को गांव में समुदाय के किसी भी व्यक्ति से बातचीत करने, सामाजिक गतिविधि में शामिल होने पर जुर्माना देना होगा.

मामला खूंटी जिला के तपकरा थाना अन्तर्गरत तोरपा प्रखंड के डिगरी गांव का है. पीड़ित परिवार की मानें तो कुछ दिन पहले अमीन लाकर अपनी जमीन की मापी करवाई जा रही थी, तब बगैर बुलाए पंच वहां आ धमके. शाम हुई तो पंच के सदस्यों ने खर्चा-पानी देने की मांग रखी.

इसके बाद संबंधित परिवार ने रुपए देने में आना-कानी की तब अगले दिन समुदाय के लोगों ने बैठक करके संबन्धित परिवार का बहिष्कार करने का फरमान सुनाया. इसके तहत यदि संबंधित परिवार से कोई बात करता है तो 1000 हजार और यदि इस परिवार के साथ उनके शादी, जन्म, मरण, सामाजिक गतिविधि में शामिल होता है तो उसे 10,000  हजार पंच को जुर्माना देना पड़ेगा. इसके बाद समुदाय के लोगों द्वारा भेद-भाव का खेल शुरू हो गया.

हालांकि, पंच के प्रमुख ने इस फरमान को जायज बताते हुए कहा कि जब समाज के लोगों की कोई बात नहीं मानेगा तो उसे चेतावनी देने के लिए इस तरह की बात कही गई है, जो सही है. जमीन मापी में पंच ने जब रुपये मांगे तो इसमें गलत क्या है?

वहीं, पीड़ित परिवार की मानें तो 'बेवजह परेशान किया जा रहा है. अपनी जमीन की मापी कराने के लिए अमीन लाया गया था, तब वहां समुदाय के लोग बतौर पंच शामिल हो गए. शाम को जमीन नापी में शामिल होने के नाम पर रुपए की मांग की थी. पैसा भी नहीं था और दबाव भी बनाने लगे. अगले दिन पंच ने बैठक की और कहा कि हमारे परिवार के जन्म, मरण, शादी-विवाह या किसी प्रकार के सामाजिक गतिविधि में समुदाय का कोई व्यक्ति शामिल नहीं होगा. अब हम लोगों से कोई बात नहीं करता.'

स्थानीयों के मुताबिक, पक्ष-विपक्ष की तरफ से आमीन लाकर जमीन की नापी की गई थी. इस दौरान गांव के लोग भी इसमें शामिल हुए. साथ ही, सीमा को चिन्हित किया गया और रस्सी खींची गई थी, गांव समुदाय के लोग जुटे हुए थे. इसलिए कुछ रुपए की मांग की गई थी. लेकिन संबंधित परिवार पर रुपए देने का जबरन दवाब नहीं दिया गया है. बैठक में संबंधित परिवार को कहा गया कि वह गांव की बात नहीं मानते हैं तो उसके घरों में कोई आना जाना नहीं करेगा. 

इधर, पीड़ित परिवार का कहना है कि बिस्कुट खरीदने जाते हैं तो मना किया जाता है. दुकानदार ने कहा कि बिस्किट नहीं देंगे. हम लोगों को कोई भी सामान देने पर घासीराम राम गंझू ने कहा है कि 1000 हजार रुपए फाइन देना पड़ेगा. शुरू में ही रास्ता को भी ब्लॉक कर दिया गया था. बाद में हम लोग अपनी जमीन की नापी कराने लगे थे. इसी एवज में पैसे की मांग की जा रही है. पंच वालों को जमीन माफी के दौरान नहीं बुलाया गया था. खुद मापी करवा रहे थे. अब गांव वाले कोई बात भी नहीं करते हैं. बोला जाता है कि यदि हम से गांव के समुदाय के कोई भी व्यक्ति बातचीत करते है तो जुर्माना देना पड़ेगा.