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दरभंगा: बाढ़ से कई गांवों में लोगों की जीना मुश्किल, सरकार की सुविधाओं से भी दूर

पूर्वी प्रखंड में बाढ़ से लगभग दो दर्जन से ज्यादा गांव प्रभावित हुए है और अभी तक सिर्फ एक ही स्थान मध्य विद्यालय बर्निया पर पीड़ितों के लिए भोजन की व्यवस्था की गई है.  

दरभंगा: बाढ़ से कई गांवों में लोगों की जीना मुश्किल, सरकार की सुविधाओं से भी दूर
स्थानीय प्रशासन सिर्फ बैठक ही कर रही है और एक सप्ताह से लोग बाढ़ का कहर झेल रहे हैं.

दरभंगा: नेपाल के जल अधिग्रहण क्षेत्रों में तेज वर्षा नही होने के कारण कमला-कोशी नदी के जलस्तर में आई उफान के चलते दरभंगा में कुशेश्वरस्थान पूर्वी प्रखंड क्षेत्र के लोगो की मुस्किलें बढ़ गई है. आलम यह है की स्थानीय प्रशासन सिर्फ बैठक ही कर रही है और एक सप्ताह से लोग बाढ़ का कहर झेल रहे हैं.

कमला बलान के पश्चिमी तटबंध व पूर्वी तटबंध के गर्भ में बसे इटहर पंचायत के चौकिया, बिसुनिया, लक्ष्मीनिया पोखर मुसहरी सहित दो दर्जनों गांवों के लोगों अब तक किसी भी तरह की सहायता नही मिली है. लोग निजी स्तर से नाव किराया पर लेकर अपना रोज का काम करते हैं. मालूम हो कि पूर्वी प्रखंड में बाढ़ से लगभग दो दर्जन से ज्यादा गांव प्रभावित हुए है और अभी तक सिर्फ एक ही स्थान मध्य विद्यालय बर्निया पर पीड़ितों के लिए भोजन की व्यवस्था की गई है. 

हालांकि भोजन तक पहुंचना बाढ़ पीड़ितों के लिये नामुनकिन है न ही कोई मेडिकल टीम दिखती है. जी मीडिया ने बाढ़ पीड़ितों के लिए खाने की व्यवस्था ,सरकार और जिला प्रसासन के बाढ़ पीड़ितों की सहायता और पूर्व तैयारियों का रियलिटी टेस्ट करने लगभग दो दर्जन गांवों में गईय

दरअसल कुशेश्वरस्थान के पूर्वी प्रखण्ड क्षेत्र के ईटहर पंचायत अंतर्गत लक्ष्मीनिया, चौकियां सहित दर्जनों गांव के हजारों लोगों का यह हाल है कि लोग अपने गांव में ही कैद हो कर रह गए हैं. लक्ष्मीनिया गांव में कुछ परिवार प्राथमिक विद्यालय में शरण लिए हुए हैं. वहां लोगों को कहना है कि सरकार सिर्फ दिखावा के लिए घोषणा करती है. धरातल पर कोई सुविधा नहीं है. 

आक्रोशित पीड़ित परिवारों ने कहा कि हमलोगों की आवाजाही के लिए प्रशासन की ओर से कोई समुचित व्यवस्था नही की गई है. वहीं, जलावन पानी में बह जाने से लोग बड़ी कठिनाई से भोजन बना पाते है. मवेशी का चारा नहीं होने को कारण मवेशियों के सामने भुखमरी की समस्या उत्पन्न हो गई है.