Delhi: SC कमेटी की रिपोर्ट से अस्पताल नाराज, बोले- जब Oxygen मिली ही नहीं तो ज्यादा खपत कैसे

ऑक्सीजन (Oxygen) पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा बनाई गई कमेटी की कथित अंतरिम रिपोर्ट में उन 4 अस्पतालों के नाम दिए गए हैं. उन अस्पतालों ने ज्यादा ऑक्सीजन खर्च करने के आरोपों पर अपनी प्रतिक्रिया दी है.

Delhi: SC कमेटी की रिपोर्ट से अस्पताल नाराज, बोले- जब Oxygen मिली ही नहीं तो ज्यादा खपत कैसे
ऑक्सीजन के टैंकरों को ले जाती हुई स्पेशल ट्रेन (फाइल फोटो)

नई दिल्ली: ऑक्सीजन (Oxygen) पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा बनाई गई कमेटी की कथित अंतरिम रिपोर्ट में उन 4 अस्पतालों के नाम दिए गए हैं. जिन्होंने दूसरी लहर में कम बेड होने के बाद भी ज्यादा ऑक्सीजन खर्च की. ये चार अस्पताल हैं - सिंघल अस्पताल, लाइफरेज़ अस्पताल, ईएसआईसी मॉडल अस्पताल और अरुणा आसिफ अली अस्पताल.

'ज़ी न्यूज़ ने जाना अस्पतालों का पक्ष'

ज़ी न्यूज ने कमेटी की रिपोर्ट के बारे में उन अस्पतालों से बात करके उनका पक्ष जानने की कोशिश की. दिल्ली (Delhi) के सिंघल अस्पताल के प्रबंधक रवि वार्ष्णेय ने अंतरिम रिपार्ट पर कहा कि उनके अस्पताल में लिक्विड मेडिकल ऑक्सीजन (Oxygen) को रखने की व्यवस्था है ही नहीं. साथ ही दिल्ली सरकार ने कोरोना की दूसरी लहर में उनके अस्पताल को रोज़ाना 1 से 2 ऑक्सीजन सिलिंडर ही दिए. ऐसे में ऑक्सीजन की ज्यादा खपत के आरोप निराधार हैं.

वहीं दिल्ली के ओखला स्थित लाइफरेज़ अस्पताल के मालिक गौरव सतेजा ने कहा कि उनका अस्पताल नया है और यहां पर कोरोना मरीजों को भर्ती करने की अनुमति दिल्ली सरकार ने इसी साल 27 अप्रैल को दी थी. इस  अस्पताल को लाइसेंस 10 मई को मिला. ऐसे में पता नहीं किस आधार पर उनके अस्पताल पर ये आरोप लग रहें हैं. 

'ऑक्सीजन मिली ही नहीं तो खपत कैसे'

गौरव के अनुसार उनके अस्पताल को दिल्ली सरकार ने 6 से 7 दिन रोजाना 2 ऑक्सीजन (Oxygen) सिलिंडर दिए. बाकी के ऑक्सीजन सिलिंडर का इंतज़ाम खुद अस्पताल प्रशासन दूसरे राज्यों से करता था. ऐसे में जब ज्यादा ऑक्सीजन मिली ही नहीं तो खपत कैसे होगी.

इस कथित अंतरिम रिपोर्ट में दिल्ली के सरकारी अरुणा आसिफ अली अस्पताल का भी जिक्र है. अस्पताल का आधिकारिक रूप से कहना है अभी उनके पास ऑडिट रिपोर्ट की डिटेल्ड जानकारी नहीं है. जब यह जानकारी आएगी, तब आगे बात की जाएगी अउ दोषियों पर कार्यवाही की जाएगी. 

'मरीजों को बचाने के लिए दी ऑक्सीजन'

अरुणा आसिफ अली अस्पताल के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न लेने की शर्त पर ऑक्सीजन की ज्यादा खपत का कारण बताया. अधिकारी के मुताबिक कोरोना की दूसरी लहर के समय अस्पताल के कई ऐसे मरीज आते थे जिनकी ऑक्सीजन 40-50 के आसपास होती थी. ऐसे में हमारा पहला कर्तव्य उन्हें मरने से बचाना था. इसीलिए उन्हें 1- डेढ़ घण्टे ऑक्सीजन (Oxygen) दिया जाता था. तब तक उनके परिजनों से किसी अन्य कोविड अस्पताल में बेड ढूंढने के लिए बोला जाता था क्योंकि अरुणा आसिफ अली अस्पताल नॉन कोविड अस्पताल हैं.

ऑडिट रिपोर्ट में चौथे अस्पताल ईएसआईसी मॉडल अस्पताल का भी नाम है. उसकी मेडिकल सुपरिंटेंडेंट डॉ रचिता बिस्वास ने आधिकारिक मीटिंग में व्यस्त होने की बात कहकर जवाब देने से इनकार कर दिया. 

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कमेटी ने कोर्ट को दी रिपोर्ट

सूत्रों के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) द्वारा गठित ऑक्सीजन ऑडिट कमेटी ने कोर्ट को अपनी रिपोर्ट दी है. इस रिपोर्ट में कथित तौर पर कहा गया है कि दिल्ली में बिस्तर क्षमता के हिसाब से 289 मीट्रिक टन ऑक्सीजन की आवश्यकता थी. जबकि दिल्ली सरकार ने दावा किया था कि उन्हें ऑक्सीजन 1140 एमटी चाहिए, जो क्षमता से चार गुना ज्यादा थी. इसका नुकसान दूसरे राज्यों को उठाना पड़ा.

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