4 महीने से लगातार कर रही थी काम, नहीं मिली सैलरी और छुट्टी, तबीयत बिगड़ने से मौत

परिजनों ने हॉस्पिटल के मेडिकल अधिकारी (RMO) पर आरोप लगाया है कि तबीयत बिगड़ने पर उन्हें प्रताड़ित किया गया और छुट्टी भी नहीं दी

4 महीने से लगातार कर रही थी काम, नहीं मिली सैलरी और छुट्टी, तबीयत बिगड़ने से मौत
प्रशासन का विरोध करते परिजन और ग्रामीण

विरेन्द्र/बड़वानीः मध्य प्रदेश में बीते कुछ दिनों से लगातार हॉस्पिटल प्रशासन की लापरवाही के मामले सामने आ रहे हैं. ऐसा ही एक मामला बड़वानी जिले के कोविड-19 सेंटर से आया है. यहां  के कोविड-19 सेंटर में तैनात एक सफाईकर्मी की मौत हो गई. बताया जाता है कि वह पिछले 4 महीने से लगातार वार्ड में सफाई कर्मी की काम कर रही थी. अचानक तबीयत विगड़ने पर उसने छुट्टी मांगी, लेकिन अस्पताल प्रशासन की तरफ से उसे छुट्टी नहीं दी गई और उसकी मौत हो गई. कोविड-19 अस्पताल में तैनात सफाईकर्मी मंजू बाई की मौत से प्रशासन पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं.  

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परिजनों ने लगाए प्रताड़ना के आरोप
मंजू बाई के परिजन उन्हें इलाज के लिए गुजरात के बड़ोदा के एक हॉस्पिटल में ले गए थे, जहां उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई. जिस पर परिजनों ने हॉस्पिटल के मेडिकल अधिकारी (RMO) पर आरोप लगाया है कि तबीयत बिगड़ने पर उन्हें प्रताड़ित किया गया और छुट्टी भी नहीं दी गई. साथी कर्मियों ने भी आरोप लगाया है कि पिछले चार महीनों से किसी भी स्वास्थ्य कर्मी को वेतन नहीं दिया गया है. 

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प्रशासन ने बताया ठेकेदार के कारण नहीं मिला वेतन
मंजू बाई की मौत पर परिजनों ने आक्रोश में हॉस्पिटल पहुंच कर प्रशासन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया. इस मामले में मुख्य मेडिकल अधिकारी और सिविल सर्जन ने कहा कि स्वास्थ्य कर्मियों का वेतन ठेकेदार का मसला है, इसमें हॉस्पिटल प्रशासन का कोई दोष नहीं है. सफाई कर्मी की मौत के सवाल प्रशासन मीडिया को टालता नजर आया. यहां तक कि हॉस्पिटल के मेडिकल अधिकारी (RMO) ने इस मामले पर कुछ भी बात नहीं की. 

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