बहुमत तो अपने ही दम पर भाजपा ने जुटा लिया, सिंधिया का कद क्या होगा, कितना रहेगा उनका दबदबा?

ज्योतिरादित्य सिंधिया के समर्थकों के विधायक पद से इस्तीफा देने के बाद ही बीजेपी मध्य प्रदेश की सत्ता में पहुंची थी. उपचुनाव में सिंधिया के 19 में से 6 समर्थक चुनाव हार गए.

 बहुमत तो अपने ही दम पर भाजपा ने जुटा लिया, सिंधिया का कद क्या होगा, कितना रहेगा उनका दबदबा?
ज्योतिरादित्य सिंधिया

अर्पित पांडेय/भोपालः मध्य प्रदेश की 28 विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनाव में बीजेपी ने 19 सीटें जीतकर अपनी दम पर प्रदेश में पूर्ण बहुमत हासिल कर लिया. यानि कमलनाथ सरकार गिराकर शिवराज सरकार बनवाने वाले ज्योतिरादित्य सिंधिया का शिवराज सरकार में अब कितना दबदबा रहेगा यह सियासी गलियारों में चर्चा का विषय बना है. 

ज्योतिरादित्य सिंधिया का कद घटा या बढ़ा ?
कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में आने वाले ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ उनके 19 समर्थक विधायक भी बीजेपी में शामिल हुए थे. उपचुनाव में 19 में करीब 6 सिंधिया समर्थक प्रत्याशी चुनाव हार गए. लेकिन 13 प्रत्याशियों के जीतने से सिंधिया का दम बीजेपी में एक तरह से बढ़ ही गया है. 

सिंधिया समर्थक इन प्रत्याशियों को मिली हार 
डबरा से इमरती देवी
दिमनी से गिर्राज डण्डौतियां
ग्वालियर पूर्व से मुन्नालाल गोयल 
गोहद से रणवीर जाटव
करैरा से जसवंत जाटव 
मुरैना से रघुराज सिंह कंसाना  

अपने दम पर सत्ता में बीजेपी, समझिए विधानसभा का गणित 
मध्य प्रदेश की 230 सदस्यीय विधानसभा में कांग्रेस विधायक राहुल सिंह लोधी के इस्तीफे के बाद मौजूदा सदस्यों की संख्या 229 है. जिसमें पूर्ण बहुमत के लिए 115 सीटों की जरुरत थी. बीजेपी के पास उपुचनाव से पहले तक 107 विधायक थे. जबकि उपचुनाव में अगर सिंधिया समर्थकों को छोड़ दिया जाए तो पार्टी के 6 प्रत्याशी अपने दम पर चुनाव जीत गए. यानि बीजेपी के विधायकों की संख्या अब सदन में 107+6=113 हो गयी. पूर्ण बहुमत के लिए पार्टी को महज 2 विधायकों की जरुरत है. जबकि निर्दलीय और बसपा-सपा के विधायकों ने सरकार के साथ रहने की बात कही हैं. यानि उपचुनाव में बीजेपी कही न कही अपने दम पर पूर्ण बहुमत में आ गयी. 

सत्ता में बने रहने के लिए सिंधिया का साथ जरुरी 
हालांकि शिवराज सरकार को सत्ता में बने रहने के लिए ज्योतिरादित्य सिंधिया का साथ जरुरी रह सकता है. भले ही बीजेपी अपने दम पर पूर्ण बहुमत में पहुंच गयी. लेकिन सिंधिया गुट के बिना सरकार कन्फर्ट नहीं रह सकती. ऐसे में सिंधिया को बीजेपी अब बड़ा पद देकर सतुंलन बनाने की कोशिश जरुर कर सकती है. यानि मोदी सरकार के विस्तार में सिंधिया के मंत्री बनने की संभावना से अब इंकार नहीं किया जा सकता. 

अन्य राज्यों में भी बीजेपी कर सकती है सिंधिया का इस्तेमाल 
उपचुनाव में मिली जीत बीजेपी के लिए देश में बड़ी राजनीतिक कामयाबी मानी जा रही है. जिसमें ज्योतिरादित्य सिंधिया का अहम योगदान रहा है. लिहाजा अब सिंधिया को पार्टी बड़ी जिम्मेदारी देकर उनका अन्य राज्यों में इस्तेमाल कर सकती है. सिंधिया कई राज्यों में अपना प्रभाव रखते हैं. खास बात यह है कि  मध्य प्रदेश में सरकार गिराकर उपचुनाव कराने वाला बीजेपी का फार्मूला सफल नजर आया. जिसका प्रचार बीजेपी सिंधिया के जरिए देश के अन्य राज्यों में भी करवा सकती है. 

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