रात 12 बजे हुआ 'नगर रक्षक' बाबा काल भैरव का जन्म, 101 ब्रांड की शराब, 111 प्रकार की नमकीन का लगा भोग!
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रात 12 बजे हुआ 'नगर रक्षक' बाबा काल भैरव का जन्म, 101 ब्रांड की शराब, 111 प्रकार की नमकीन का लगा भोग!

ये तंत्र पीठ है, तंत्र पीठ होने के कारण यहां तीन प्रकार की पूजा का महत्व है, जिनमें सात्विक, राजसिक और तामसिक पूजा शामिल है.

रात 12 बजे हुआ 'नगर रक्षक' बाबा काल भैरव का जन्म, 101 ब्रांड की शराब, 111 प्रकार की नमकीन का लगा भोग!

राहुल राठौर/उज्जैनः  बाबा महाकाल की नगरी जितनी प्राचीन है, उतना ही गहरा इसका इतिहास भी है. यहां कई ऐसे चमत्कार देखने को मिल जाते हैं, जिनका रहस्य आज तक दुनियाभर के वैज्ञानिक भी नहीं खोज पाए हैं. ऐसा ही एक रहस्यमयी मंदिर है बाबा कालभैरव का मंदिर. प्राचीन काल से बाबा काल भैरव का जन्म उत्सव मनाए जाने की परंपरा है. हर साल भैरव अष्टमी को बाबा काल भैरव का जन्मोत्सव मनाया जाता है. शनिवार को भैरव अष्टमी थी तो शनिवार को देर रात 12 बजे मंदिर में बाबा काल भैरव का जन्मोत्सव बड़ी धूमधाम से मनाया गया. 

बाबा को लगा 101 ब्रांड की शराब का भोग
बता दें कि उज्जैन स्थित बाबा काल भैरव के मंदिर में प्रसाद के तौर पर शराब चढ़ाई जाती है. यही वजह है कि जन्मोत्सव के मौके पर अलग-अलग राज्यों के श्रद्धालु मंदिर बाबा के दर्शन करने पहुंचे थे. जन्मोत्सव के दौरान मंदिर के पुजारियों ने बाबा का आरती पूजन किया और फिर बाबा को 111 प्रकार की नमकीन और 101 ब्रांड की शराब का भोग लगाया गया. इनमें कई देशी-विदेशी ब्रांड की शराब के साथ ही देशी शराब भी शामिल है. गौरतलब है कि मंदिर में बाबा की प्रतिमा को शराब पिलाई जाती है और बाबा शराब पीते हैं. खास बात ये है कि बाबा के शराब पीने के बाद भी ना मंदिर में शराब की महक आती है और ना ही ये पता चलता है कि शराब जाती कहां हैं? आज शाम 4 बजे बाबा काल भैरव नगर भ्रमण के लिए निकलेंगे. 

मंदिर है तंत्र पीठ
मंदिर के पुजारी राजेश चतुर्वेदी ने बताया कि कालभैरव उज्जैन में महाकाल के सेनापति के रूप में विराजमान हैं. ये तंत्र पीठ है, तंत्र पीठ होने के कारण यहां तीन प्रकार की पूजा का महत्व है, जिनमें सात्विक, राजसिक और तामसिक पूजा शामिल है. कोरोना के बाद इस बार बाबा के जन्मोत्सव पर भक्तों की भारी भीड़ जुटी और भक्तों में गजब उत्साह देखा गया. पुजारी ने बताया कि यह एक जागृत स्थान है और जब बाबा शराब का सेवन करते हैं तो जाग्रत अवस्था में करते हैं. शराब का सेवन तांत्रिक मंत्रों के उच्चारण के बाद होता है.

शासकीय पूजा के दौरान मौजूद रहे आईएएस, आईपीएस और शिक्षा मंत्री
बता दें कि मंदिर में परंपरा अनुसार, जन्मोत्सव के बाद शासकीय पूजा भी होती है, जिसमें शीर्ष प्रशासनिक अधिकारी आईएएस, आईपीएस और शिक्षा मंत्री मोहन यादव, प्रदेश के खेल प्रकोष्ठ अध्यक्ष विशाल राजोरिया भी शामिल हुए. मंत्री मोहन यादव ने बताया कि यह स्थान राजनीतिक दृष्टि से काफी उत्तम माना गया है. पानीपत के युद्ध के बाद महाराज सिंधिया हारने के बाद यहां आए थे और यहां दर्शन कर उन्हें राजपाठ वापस मिल गया था. आज भी सिंधिया परिवार की ओर से यहां छत्र चढ़ाया जाता है. 

ये है मान्यता
उज्जैन में माता सती के दो शक्ति पीठ हैं, जिनकी रक्षा में बाबा कालभैरव तैनात रहते हैं. पुजारी बाबा काल भैरव को महाकाल का सेनापति बताते हैं, जो पूरे नगर की रक्षा करते हैं. जब महादेव ने 51 शक्तिपीठों की स्थापना की थी तो मान्यता है कि हर एक शक्तिपीठ की रक्षा के लिए वहां बाबा काल भैरव भी विराजमान रहते हैं. उज्जैन का बाबा काल भैरव का मंदिर एकमात्र ऐसा मंदिर है, जहां शराब का भोग लगाया जाता है. यही वजह है कि मंदिर के बाहर शराब की करीब 50 दुकाने हैं, जहां हर ब्रांड की शराब मिलती है.

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