देश का पहला खंडित शिवलिंग! जहां होती है महाकाल की पूजा, औरंगजेब ने किया था हमला
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देश का पहला खंडित शिवलिंग! जहां होती है महाकाल की पूजा, औरंगजेब ने किया था हमला

मुगल साम्राज्य के क्रूर शासक औरंगजेब को इस स्थान की प्रसिद्धि के बारे में जब पता चला तो वह अपनी सेना लेकर शिवधाम आया और अपनी धारदार तलवार से उसने जैसे ही शिवलिंग पर तलवार से हमला कर दिया.

देश का पहला खंडित शिवलिंग! जहां होती है महाकाल की पूजा, औरंगजेब ने किया था हमला

सतना: घर में रखी देव प्रतिमा खंडित हो जाती है तो अनहोनी की आशंका मात्र से मन सिहर उठता है. जरा भी देरी किए लोग खंडित मूर्ति को या तो बहते जल में विसर्जित कर देते हैं या फिर किसी पेड़ के नीचे रख देते हैं. लेकिन सतना जिले में एक ऐसा मंदिर है जहां कई सौ साल से खंडित मूर्ती की पूजा होती आ रही है. बिरसिंहपुर में स्थापित अदभुत शिवलिंग के दर्शन के लिए भक्त बड़ी दूर-दूर से आते हैं. 

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श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र
सतना मुख्यालय से करीब 35 किलोमीटर दूर स्थित है बिरसिंहपुर कस्बा. इसी कस्बे में तालाब किनारे गैवीनाथ नाम का शिवमंदिर स्थापित है, जिसमें विराजित बाबा भोले नाथ को गैवीनाथ नाम से जाना जाता है. यहां प्रत्येक सोमवार अभिषेक के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है. महाशिवरात्रि और बसंत पंचमी का मेला यहां देखते ही बनता है.

मंदिर का तालाब कभी सूखता नहीं
देश के कोने-कोने से महाशिवरात्रि और सावन मास में महादेव के दर्शन करने श्रद्धालु गैवीनाथ धाम पहुंचते हैं. मंदिर से सटे तालाब के बारे में कहा जाता है कि यह हमेशा पानी से भरा रहता है. इसकी धार उज्जैन के क्षिप्रा नदी से जुड़ी है. भगवान शिव की कृपा से यह कभी नहीं सूखता.

राजा की मांग पर प्रकट हुए
किवदंती के अनुसार कभी यह देवपुर नगरी हुआ करती थी, जिसके राजा थे वीरसिंह. वीर सिंह महाकाल के अनन्य भक्त थे. वो रोजाना उज्जैन जाकर महाकाल के दर्शन करते थे. जब उनकी उम्र ज्यादा हो गई तो वो उज्जैन जाने में असमर्थ हो गए. उन्होंने महाकाल से विरसिंहपुर में स्थापित होने के लिए कहा तो बाबा राजा से प्रसन्न होकर गैविनाथ के घर शिवलिंग के रूप में प्रकट हो गए और यहां विराजित हो गए.

औरंगजेब ने किया था हमला
इस ​शिव मंदिर से जुड़ी एक कहानी प्रचलित है कि मुगल साम्राज्य के क्रूर शासक औरंगजेब को जब इस स्थान की प्रसिद्धि के बारे में ज्ञात हुआ तो वह अपनी सेना लेकर बिरसिंहपुर पहुंच गया. उसने अपनी धारदार तलवार से गैवीनाथ शिवलिंग के दो टुकड़े करने का प्रयास किया. लेकिन शिवलिंग 3 हिस्सों में बंट गया. औरंगजेब ने जिस गैवीनाथ शिवलिंग पर तलवार से वार किया गया, उस पर आज भी चोट के निशान दिखाई देते हैं.

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औरंगजेब उस दौरान वो पूरे भारत वर्ष में मंदिरों को तोड़ रहा था. गैवीनाथ शिवलिंग के ऊपर 5 टंकिया लगी हुई थीं. औरंगजेब ने अपनी तलवार से जब शिवलिंग को खंडित किया तो, कहा जाता है कि पहली टंकी से दूध, दूसरी टंकी से शहद, तीसरी टंकी से खून, चौथी टंकी से गंगाजल और पांचवी टांकी से मधुमक्खियां निकलीं. मधुमक्खियों ने औरंगजेब पर हमला कर दिया. वह मंदिर से उल्टे पांव भाग खड़ा हुआ. इस घटना के बाद इस लोगों के बीच इस शिवलिंग को लेकर आस्था और बढ़ गई.

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