भोपाल में हर दिन मासूमों पर हो रहे अपराध, बच्चों पर पड़ा लॉकाडाउन का सीधा असर, चौंकाने वाले हैं चाइल्ड लाइन के आंकड़े

भोपाल में हर दिन मासूमों पर हो रहे अपराध, बच्चों पर पड़ा लॉकाडाउन का सीधा असर, चौंकाने वाले हैं चाइल्ड लाइन के आंकड़े

चाइल्ड लाइक के आंकडों के मुताबिक बच्चों से होने वाले अपराधों का ग्राफ दोगुना बढ़ गया. राजधानी में हर दिन आ मासूमों के साथ मारपीट, दुष्कर्म, छेड़छाड़ के मामले बढ़ रहे हैं.

भोपाल में हर दिन मासूमों पर हो रहे अपराध, बच्चों पर पड़ा लॉकाडाउन का सीधा असर, चौंकाने वाले हैं चाइल्ड लाइन के आंकड़े

भोपाल: कोरोना महामारी का सबसे ज्यादा असर बच्चों पर देखने को मिला है. जिसकी बानगी शहर की दो घटनाओं से पता चल रही हैं. भोपाल के ऐशबाग थाना क्षेत्र में 10 साल की एक बच्ची के सिर से पापा का साया उठने के बाद सगी मां और सौतेले पिता का कहर टूट पड़ा. आठ महीने पहले पिता चल बसे, मां ने बात-बात पर उसे बुरी तरह पीटना शुरू कर दिया. यहां तक कि बच्ची को घर छोड़कर भागना पड़ा. चाइल्ड लाइन लाई गई बच्ची के जिस्म पर बेल्ट और डंडे से पीटे जाने के जख्म मिले. एक आंख पर गहरा घाव भी है. बच्ची ऐशबाग इलाके में मंदिर में मिली थी.

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वहीं दूसरी घटना भी राजधानी के पिपलानी थाना क्षेत्र में 13 साल की छात्रा से छेड़छाड़ का मामला सामने आया था. जब छात्रा के कहने पर मां-बाप मनचलों को समझाने गए तो आरोपियों ने उनके साथ भी मारपीट कर दी. तीनों आरोपी कॉलेज के छात्र निकले थे. इन दो घटनाओं के अलावा भोपाल में हर दिन बच्चों से जुड़े अपराध हो रहे हैं. इसकी गवाही हम नहीं बल्कि चाइल्ड लाइन के आंकड़े बताते रहे हैं..

चाइल्ड लाइन के आंकड़े चिंताजनक
चाइल्ड लाइक के आंकडों के मुताबिक बच्चों से होने वाले अपराधों का ग्राफ दोगुना बढ़ गया. चाइल्ड लाइन के पास वर्ष 2018-19 में 154 केस आए थे, जबकि कोरोना काल वाले वर्ष 2020-21 में यह आंकड़ा बढ़कर 300 तक पहुंच गया है. यह तो चाइल्ड लाइन तक पहुंचे मामले हैं, कई मामलों में तो रिपोर्ट तक दर्ज ही नहीं हो पाती है. राजधानी में हर दिन आ मासूमों के साथ मारपीट, दुष्कर्म, छेड़छाड़ के मामले बढ़ रहे हैं.

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लॉकडाउन का असर बच्चों पर ज्यादा
चाइल्ड लाइन की डायरेक्टर अर्चना सहाय ने कहा की हर दिन मसूमों के साथ मारपीट, छेड़छाड़, दुष्कर्म के मामले सामने आ रहे है. जो काफी चिंताजनक है. लगातार बढ़ रहे मासूमों के साथ अपराध पर पुलिस कार्यवाही ओर सख्त होने की जरूरत है. अर्चना बताती हैं कि लॉकडाउन का सबसे खराब असर किसी पर पड़ा है, तो वे बच्चे हैं. मासूमों को घर में कैद होकर रहना पड़ रहा है. स्कूल, खेल और मार्केट आदि बंद होने से वह मानसिक तनाव होने लगा है. घर में भी आर्थिक और कई कारणों से घरेलू हिंसा बढ़ी है. इसका भी सबसे ज्याद खामियाजा बच्चों को ही भुगतना पड़ रहा है. इस कारण बच्चों पर अपराध रोकना बहुत जरूरी है. इसके लिए सभी को मिलकर प्रयास करने की जरूरत है.

इंटरनेट और मोबाइल फोन से ज्यादा अपराध बढ़े
चाइल्ड लाइन की रिपोर्ट के अनुसार लॉकडाउन में बच्चों पर सबसे ज्यादा हिंसा हुई है. इस दौरान माता-पिता के झगड़े की गुस्सा का शिकार बच्चे हुए हैं. इसके अलावा मोबाइल फोन और इंटरनेट ने बच्चों पर अपराध को ग्राफ बढ़ा दिया. इससे बच्चे ऑन लाइन और अश्लील साइट्स के साथ ही अन्य तरह के अपराध में फंस गए. इस कारण मध्यप्रदेश में अब बच्चों के प्रति अपरध को रोकने के लिए अभियान भी शुरू किया गया है.

बच्चों पर हिंसा की यहां शिकायत करें
सीएम हेल्प लाइन नंबर : 181
पुलिस : 100
चाइल्ड लाइन नंबर : 1098

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