अनुकंपा नियुक्ति के नियमों में होगा बदलाव, छोटे भाई-बहनों को नहीं छोड़ पाएगा नौकरी लेने वाला

लंबे समय से यह मांग उठ रही थी कि अनुकंपा नियुक्ति की शर्तों के कारण मामले पेंडिंग होते जा रहे हैं. नियुक्ति के लिए पद नहीं मिल रहे. अब नए प्रावधानों से अनुकंपा के तहत नौकरी मिलने का रास्ता साफ होगा. 

अनुकंपा नियुक्ति के नियमों में होगा बदलाव, छोटे भाई-बहनों को नहीं छोड़ पाएगा नौकरी लेने वाला
सांकेतिक तस्वीर.

भोपाल: मध्य प्रदेश सरकार अनुकंपा नियुक्ति के प्रावधानों में कुछ बदलाव कर इसे और व्यावहारिक बनाने जा रही है. इससे न अनुकंपा नियुक्ति में देर भी नहीं होगी और परिवार के आश्रितों की आर्थिक सुरक्षा भी बढ़ेगी. नए प्रावधानों में यह व्यवस्था होगी कि अनुकंपा प्रक्रिया (सरकारी नौकरी में रहते माता या पिता की मौत के बाद नियुक्ति पाने वाले उनके पुत्र-पुत्री) के तहत नौकरी पाने वाला लाभार्थी को माता-पिता के साथ अपने आश्रित छोटे भाई-बहनों की देखरेख भी करनी होगी. 

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लंबे समय से यह मांग उठ रही थी कि अनुकंपा नियुक्ति की शर्तों के कारण मामले पेंडिंग होते जा रहे हैं. नियुक्ति के लिए पद नहीं मिल रहे. अब नए प्रावधानों से अनुकंपा के तहत नौकरी मिलने का रास्ता साफ होगा. वर्तमान में मध्य प्रदेश में अनुकंपा नियुक्ति के करीब 8000 से 10000 मामले वर्षों से पेंडिग हैं. अनुकंपा नियुक्ति के नए प्रावधानों का खाका लगभग तैयार है, जिसे शासन को भेजा चुका है. शासन से हरी झंडी मिलने के बाद कैबिनेट में लाया जाएगा.

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अनुकंपा नियुक्ति के लिए नए नियमों के ड्राफ्ट में यह प्रावधान किया गया है कि यदि आरक्षित श्रेणी में पद रिक्त हैं, कोई कैंडिडेट नहीं है तो उसे सामान्य वर्ग से भरा जा सकेगा. आरक्षित पद पर सामान्य श्रेणी का कैंडिडेट आ भी जाता है तो उसे जनरल कैटगरी में आगे बढ़ना होगा. अभी अधिकारी-कर्मचारी पति के निधन पर पत्नी को 45 वर्ष तक अनुकंपा नियुक्ति की पात्रता थी. यदि पत्नी सर्विस में है और उसका निधन हो जाता है तो पति के लिए आयु की यह छूट नहीं थी. इसे अब नए प्रावधानों में शामिल किया जा रहा है.

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अनुकंपा नियुक्ति के मामले में वर्तमान में यह प्रावधान है कि निधन से लेकर 7 साल तक ही आश्रित नौकरी के लिए पात्र रहता था. इस दौरान अनुकंपा नियुक्ति लेने वाले को बालिग होना चाहिए. इसी तरह एक साल के भीतर उसे आवेदन भी करना होता है. अब यह बंधन नहीं होगा. जब तक पद रहेगा, अनुकंपा लेने वाला व्यक्ति पात्र बना रहेगा. इसे ऐसे भी समझा जा सकता है कि पद की पात्रता रखने तक वह पात्र रहेगा. आवेदन भी वह कभी भी कर सकेगा.

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