कोरोना से निपटने के लिए मध्यप्रदेश हाइकोर्ट का बड़ा आदेश, कहा- हम मूकदर्शक बनकर नहीं रह सकते

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में कोरोना संकटकाल से संबंधित 6 याचिकाएं दाखिल की गई थी. जिनपर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने निर्देश जारी किए हैं.

कोरोना से निपटने के लिए मध्यप्रदेश हाइकोर्ट का बड़ा आदेश, कहा- हम मूकदर्शक बनकर नहीं रह सकते
फाइल फोटो.

जबलपुर/कर्ण मिश्राः देश में कोरोना की दूसरी लहर ने कोहराम मचा दिया है. प्रतिदिन के हिसाब से आंकड़ों की बात की जाए तो ढाई लाख से ज़्यादा संक्रमित लोग पाए जा रहे है. देश के अलग-अलग कोनों से संक्रमित लोगों के मौत की ख़बर ने आम जनता से लेकर सरकार तक को सकते में डाल दिया है. इस बीच हाईकोर्ट का प्रदेश सरकार को नया निर्देश जारी हुआ है. हाई कोर्ट की ओर से 49 पन्नो का विस्तृत आदेश जारी किया गया है. दरअसल मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में कोरोना संकटकाल से संबंधित 6 याचिकाएं दाखिल की गई थी. जिनपर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने निर्देश जारी किए हैं.
 
HC ने निर्देश में क्या कहा?
*सरकार ऑक्सीजन और रेमडेसिविर इंजेक्शन्स की सप्लाई करे सुनिश्चित करे.
*सरकार फिर से 262 कोविड केअर सेन्टर, 62 डेडिकेटेड कोविड हेल्थ सेंटर, 16 डेडिकेटेड कोविड हॉस्पिटल को पुनः शुरू किया जाए.
*सरकार समस्त सरकारी अस्पतालों में स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करे.
*विशेष तौर पर भोपाल , जबलपुर ,इंदौर और ग्वालियर के सरकारी अस्पतालों में सुविधाए हो मज़बूत. बता दें कि एमपी में ये ही शहर सबसे ज्यादा कोरोना से प्रभावित हैं. 
*हर जिले के कलेक्टर और संबंधित अधिकारी लगातार करें हालातों की समीक्षा.
*निजी अस्पतालों और पैथ लैब की दर सरकार निर्धारित करे और निर्धारित दरों पर ही वसूली हो, ये सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है.
*IMA से बातचीत कर निजी अस्पतालो द्वारा बड़े एडवांस डिपाजिट पर रोक लगाए सरकार.
*बेड्स की उपलब्धता संबंधी जानकारी आम जनता के लिए उपलब्ध हो.
*रेमडेसिविर इंजेक्शन के दाम दवा दुकानों में हो प्रदर्शित, ताकि उनकी ज्यादा कीमत ना वसूली जा सके.
*इमारतों को अधिग्रहित कर बनाए जाएं अधिक कोविड केअर सेन्टर।
*सरकार ध्यान रखें कि निजी अस्पतालों BPL, दीनदयाल उपचार योजना और CGHS कॉर्डधारियों को इलाज मुहैया कराने से न करे इनकार.
*जानकारी के तहत प्रदेश में स्पेशलिस्ट डॉक्टरों के 3620 पोस्ट में से सिर्फ 765 कर रहे काम ,2855 पद खाली.
*हेल्थ ऑफिसर के 5097 पदों पर सिर्फ 3589 पद भरे ,1508 पद खाली.
*सरकार 15 दिनों के अंदर चिकित्सको के खाली पदों की दे स्पष्ट जानकारी.
*केंद्र सरकार सुनिश्चित करें कि राज्यो को ऑक्सीजन लिक्विड उपलब्ध कराए जाएं.
*रेमडेसिविर का ज़्यादा से ज़्यादा उत्पादन हो.
*स्टील इंडस्ट्री से भी ली जाए ऑक्सीजन लिक्विड.
*ज़रूरत पड़े तो करें आयात.
कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 10 मई को सुनिश्चित की है.