कबूतरों के जरिए हो रही थी जासूसी, पैर में बंधा दिखा चाइनीज टैग, अलर्ट हुई सिक्योरिटी फोर्स

कबूतर का इस्तेमाल जासूसी के लिए किया जा रहा था. फिलहाल पुलिस ने कबूतर को कब्जे में लेकर इसकी जांच शुरू कर दी है. 

कबूतरों के जरिए हो रही थी जासूसी, पैर में बंधा दिखा चाइनीज टैग, अलर्ट हुई सिक्योरिटी फोर्स

कोंडागांवः छत्तीसगढ़ के कोंडागांव जिले में एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है. दरअसल सुरक्षाबलों ने संदिग्ध कबूतर पकड़ा है, जिसके पैर में विदेशी भाषा के टैग बंधे हुए थे. माना जा रहा है कि कबूतर का इस्तेमाल जासूसी के लिए किया जा रहा था. फिलहाल पुलिस ने कबूतर को कब्जे में लेकर इसकी जांच शुरू कर दी है. 

नक्सलियों पर शक
पुलिस अधिकारियों का मानना है कि नक्सलियों द्वारा कबूतर से जासूसी कराई जा रही थी. दरअसल बीजापुर हमले के बाद फोर्स की मुस्तैदी बढ़ गई है. ऐसे में नक्सली अपना संदेश साथियों को भेजने के लिए कबूतर का इस्तेमाल कर रहे हैं. कबूतर काफी समझदार और घरेलू होते हैं. यही वजह है कि कबूतरों को प्रशिक्षण देना आसान होता है.  

बता दें कि कबूतरों की एक प्रजाति जिसे 'रेसिंग होमर' कहते हैं, बेहद खास होती है. इस प्रजाति के कबूतरों को इस तरह से प्रशिक्षित किया जा सकता है कि वे तेजी से उड़ें और गंतव्य तक पहुंचकर वापस लौट सकें.

पुलिस ने जो कबूतर पकड़ा है, उसके पैरों में दो टैग बंधे हैं. इन टैग्स को स्क्रैच करके कुछ कोड मिले हैं, जिन्हें सुरक्षाबल डि-कोड करने में जुटे हैं. 

पहले भी जासूसी में होता रहा है कबूतरों का इस्तेमाल
बता दें कि यह पहली बार नहीं है कि कबूतरों द्वारा जासूसी कराए जाने का मामला सामने आया है. इससे पहले भी कई बार ऐसी घटनाएं हुई हैं. बीते साल मई माह में जम्मू कश्मीर में भी एक ऐसा कबूतर पकड़ा गया था. जम्मू के कठुआ इलाके में स्थानीय लोगों ने उस कबूतर को पकड़ा था, जिसके पैर में एक अंगूठी थी. इस अंगूठी में पर्ची निकली थी, जिसमें कोड भाषा में कुछ लिखा हुआ था. 

दूसरे विश्व युद्ध में भी हुआ था इस्तेमाल
दूसरे विश्व युद्ध के दौरान यूएस और ब्रिटेन की सेनाओं ने भी जासूसी के लिए लाखों कबूतरों को प्रशिक्षित किया था. इतना ही नहीं इनमें से 32 कबूतरों को उनकी बहादुरी के लिए मेडल से भी नवाजा गया था.