ऐसे जज्बे से ही जीतेंगे हम: जान जोखिम में डालकर इस बीमारी की दवा पहुंचा रहे स्वास्थ्य कर्मी

गरियाबन्द जिले के 119 गांव में मलेरिया मुक्त अभियान चलाया जा रहा है. जहां के रहने वाले 1 लाख 19 हजार लोगों की जांच कर दवा दी जानी है. 

ऐसे जज्बे से ही जीतेंगे हम: जान जोखिम में डालकर इस बीमारी की दवा पहुंचा रहे स्वास्थ्य कर्मी

गरियाबंद: गरियाबन्द जिले के 119 गांव में मलेरिया मुक्त अभियान चलाया जा रहा है. जहां के रहने वाले 1 लाख 19 हजार लोगों की जांच कर दवा दी जानी है. इनमें से 18 गांव ऐसे हैं, जहां पहुंचने के लिए पहाड़ की खड़ी चढ़ाई व नदी नाले पार करना होता है, मुश्किलों की परवाह किये बगैर स्वास्थ्य अमला इन गांव तक कैसे पहुंच रही है उनकी तस्वीरे सामने आई है. 

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जान जोखिम में डाल रहे कर्मचारी
बता दें कि 28 जून से जिले में स्वास्थ्य विभाग मलेरिया मुक्त अभियान चला रही है. गांवों को चिन्हित कर हर गांव तक हर हाल में पहुंचना है. मैनपुर के 84 गांव में से 18 गांव पहुंच विहीन के श्रेणी में हैं, फिर भी स्वास्थ्य अमला यहां तक पहुंच कर ग्रामीणों के ब्लड़ सेम्पल लेकर उन्हें मलेरिया का दवा खिला कर सफलतापूर्वक लौट रही है. जान जोखिम में डालने के अलावा टीम को कई चुनैतियों का सामना करना पड़ रहा है.

31 जुलाई तक अभियान चलेगा
मलेरिया के वार्षिक सूचकांक में जिले के 670 गांव में से 119 में 2 प्रतिशत ग्रामीणों में मलेरिया के परजीवी पानी की पुष्टि हुई थी. इस रिपोर्ट के बाद 28 जून से मलेरिया मुक्त अभियान छेड़ा गया है. जो 31 जुलाई तक चलेगा. कोरोना काल में बन्द पड़े अभियान जब बारिश में शुरू हुई तो जिले के अफसरों ने हमेशा की तरह पहुंच विहीन गांव तक अभियान को पहुंचाने रोड मैप तैयार कर लिया था. मलेरिया मुक्त छत्तीसगढ़ अभियान के तहत स्वास्थ्य विभाग की टीम अब तक तीन लाख 16 हजार घरों में पहुंचकर 14 लाख 30 हजार लोगों की मलेरिया जांच कर चुकी है.

47 हजार तक पहुंचे
सीएमएचओ एन आर नवरत्न का कहना हैं कि भारी बरसात शुरू होने से पहले ही इन इलाकों में टीम पहुंच कर जांच व दवा दें चुकी हैं. वहीं 1 लाख 19 हजार लोगों की जांच होनी है, जिसमें अब तक 47 हजार लोगों तक टीम पहुंच चुकी है.