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राजस्थान में स्वाइन फ्लू का कहर जारी, अब तक 31 मौत

उदयपुर के झाड़ोल के कोचला गांव में स्वाइन फ्लू का नया मामला सामने आया है. झाड़ोल में इस साल का पहला केस है

राजस्थान में स्वाइन फ्लू का कहर जारी, अब तक 31 मौत
जनता का आरोप है कि ग्रामीण क्षेत्रों के अस्पतालों में स्वाइन फ्लू को लेकर कोई व्यवस्था नहीं है

राजस्थान: प्रदेश में स्वाइन फ्लू का प्रकोप लगातार जारी है. खबर के मुताबिक अब तक 31 मौत हो चुकी है. वहीं नए मामलें की बात करें तो स्वाइन फ्लू के पॉजिटिव मामलो की संख्या  800 तक पहुंच चुकी है. आपको बता दें, साल 2018 में स्वाइन फ्लू से 221 लोगों की मौत हुई थी. वहीं कुछ दिनों पहले स्वाइन फ्लू के लगातार बढ़ रहे मामलों पर हेल्थ मिनिस्टर डॉ. रघु शर्मा ने अधिकारीयों को हिदायत दी थी कि, स्वाइन फ्लू से जुड़ी लापरवाही पर तुरंत एक्शन लिया जाएगा. 

देश में स्वाइन फ्लू के मामले में राजस्थान दूसरे स्थान पर है. वहीं जयपुर में भी अब तक कई मामले सामने आ चुके हैं. हेल्थ मिनिस्टर डॉ. रघु शर्मा ने बताया कि नई सरकार और स्वास्थ्य महकमा हर संभव कोशिश में जुटी है कि स्वाइन फ्लू पर अंकुश लगाया जाये. डॉ रघु शर्मा ने प्रदेश की जनता से अपील करते हुए कहा है कि स्वाइन फ्लू के शुरुआती लक्षण सामने आते ही तुरंत नजदीकी चिकित्सा केंद्र में पहुंचे क्योंकि स्वाइन फ्लू का अगर समय रहते उपचार लिया जाए तो ये जानलेवा नहीं है.

वहीं चिकित्सा मंत्री ने बताया कि जल्द चिकित्सा शिक्षा विभाग के साथ मिलकर अभियान चलाया जायेगा और स्वाइन फ्लू से होने वाली मौत पर अगर लापरवाही सामने आती है तो तुरंत एक्शन भी लिया जाएगा. इस दौरान राजस्थान में स्वाइन फ्लू के असर के बीच हेल्थ मिनिस्टर ने टूरिज्म को ध्यान में रखते हुए कहा कि हम हर संभव कोशिश में जुटे हुए हैं कि स्वाइन फ्लू पर जल्द से जल्द नियंत्रण किया जाए. हालांकि, इसके बाद भी आप लोग अफवाहों से बचने का प्रयास करें.

वहीं उदयपुर के झाड़ोल के कोचला गांव में स्वाइन फ्लू का नया मामला सामने आया है. झाड़ोल में इस साल का पहला केस है. वहीं सूचना मिलते ही रोगी के घर चिकित्सा टीम पहुंची. साथ ही चिकित्सा टीम परिवार के सभी लोगों की जांच भी कर रही है. वहीं कई इलाकों में जनता का यह आरोप है स्वाइन फ्लू को लेकर महकमा गंभीर नहीं है. जनता का आरोप है कि ग्रामीण क्षेत्रों के अस्पतालों में स्वाइन फ्लू को लेकर कोई व्यवस्था नहीं है. 

जनता का आरोप है कि सरकारी अस्पतालों में जांच की व्यवस्था न होने के कारण मरीजों को निजी लैब में जांच के लिए जाना पड़ रहा है. जिसके कारण मरीजों से मनमाने पैसे वसूले जा रहे हैं लेकिन प्रसाशन इस सब मुद्दों पर कोई कदम नहीं उठा रही है. हालांकि कई बड़े सरकारी अस्पतालों में जांच की सुविधा है लेकिन बावजूद इसके सरकारी अस्पतालों में भीड़ के कारण मरीजों की जांच का रिपोर्ट सही समय पर न आने के कारण उन्हें निजी लैब का सहारा लेना पड़ता है.     

यहां तक कि CHC सिकराय में भी स्वाइन फ्लू के मरीजों को दी जाने वाली टेमीफ्लू टेबलेट नहीं है. उपखंड मुख्यालय होने के बावजूद वहां सुविधाएं उपलब्ध नहीं है. यहां तक कि जब BCMHO से इसका जवाब मांगां गया तो वहां से भी कोई संतोषप्रद जवाब नहीं मिल पाया जिसके कारण मरीजों को उपचार के लिए जयपुर जाना पड़ रहा है.