राजस्थान में स्वाइन फ्लू का कहर है जारी, अब तक हो चुकी 84 मौत

जोधपुर जिले में 25 लोगों ने स्वाइन फ्लू की चपेट में आकर अपनी जान गंवा दी है. 

राजस्थान में स्वाइन फ्लू का कहर है जारी, अब तक हो चुकी 84 मौत
स्वाइन फ्लू के अलावा प्रदेश में डेंगू और मलेरिया के मामले भी सामने आने लगे हैं. (फाइल फोटो)

नई दिल्ली: राजस्थान में स्वाइन फ्लू के कहर से रविवार तक 84 लोगों की मौत हो चुकी है. इस बीमारी की जांच के दौरान 2 हजार 289 लोग पॉजिटिव पाए गए हैं. बताया जा रहा है कि अब तक सबसे ज्यादा मौत जोधपुर जिले में हुई है. जहां 25 लोगों ने स्वाइन फ्लू की चपेट में आकर अपनी जान गंवा दी है. 

आपको बता दें कि, कुछ दिन पहले प्रदेश में स्वाइन फ्लू की बढ़ती समस्या को को देखते हुए मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और हेल्थ मिनिस्टर डॉ. रघु शर्मा की मौजूदगी में एक राज्य स्तरीय मीटिंग भी हुई थी. जिस दौरान राज्य में इस महामारी से निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग को जरूरी निर्देश दिए गए थे.

वहीं स्वाइन फ्लू के अलावा प्रदेश में डेंगू और मलेरिया के मामले भी सामने आने लगे हैं. शुक्रवार तक मलेरिया के 70 मामले सामने आ चुके हैं. जिसमें लगभग 30 मामले केवल उदयपुर जिले से सामने आए हैं. 

जैसलमेर में सेना का जवान स्वाइन फ्लू की चपेट में

इसके अलावा राज्य के जैसलमेर जिले में अब तक 6 लोगों की मौत के बाद एक और युवक के स्वाइन फ्लू की चपेट में आ चुका है. स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों के अनुसार नेतासर गांव के आर्मी सूबेदार पन्नेसिंह की शनिवार को गंभीर हालत में जोधपुर के अस्पताल में भर्ती कराया गया था. जहां पर चिकित्सकों ने जांच के बाद उन्हें स्वाइन फ्लू से ग्रस्त बताया है. 

चिकित्सा विभाग के सूत्रों के अनुसार इसकी जानकारी मिलने के बाद उन्होंने चिकित्सकों की एक टीम नेतासर गांव में तत्काल भेजी है. इस टीम ने वहां के ग्रामीणों की स्वास्थ्य की जांच करने के अलावा आसपास के क्षेत्र में स्क्रीनिंग की है. इसके अलावा सर्दी जुखाम की जांच करने के बाद ग्रामीणों को टेमी फ्लू की दवाई भी उपलब्ध कराई गई है. 

राज्य सरकार के निर्देश पर स्वास्थ्य विभाग है सक्रिय

राज्य में इस महामारी के कहर से राज्य के लोगों को बचाने के लिए राज्य सरकार ने अधिकारियों और विभाग को कड़े निर्देश दे रखे हैं. सूत्रों के अनुसार, स्वाइन फ्लू के उपचार के लिये जरूरी टेमी फ्लू की दवा प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र के अलावा सभी चिकित्सा संस्थानों में पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है.

इसके अलावा राज्य के कई जिलो में आयुर्वेदिक औषधियों के काढ़े का वितरण किया जा रहा है. आयुर्वेदिक औषधियों से निर्मित काढ़ा पिलाने की व्यवस्था राज्य के कई आयुर्वेदिक औषधालयों में की गई है. इसके अलावा आयुर्वेद चिकित्सक स्थानीय स्तर पर रोग प्रतिरोधक क्षमता विकसित करने के लिये आवश्यक परामर्श भी दे रहे हैं.