जयपुर: टैक्स न भरने वाले जरा दें ध्यान, हर ट्रांजैक्शन पर है DGGI की नजर

वित्त वर्ष 2018-19 में 116 मामले उजागर हुए हैं. इसमें 1120 करोड़ 43 लाख रुपये की कर चोरी सामने आई. 

जयपुर: टैक्स न भरने वाले जरा दें ध्यान, हर ट्रांजैक्शन पर है DGGI की नजर
प्रतीकात्मक तस्वीर.

अंकित तिवाड़ी, जयपुर: डायरेक्टरेट जनरल ऑफ जीएसटी इंटेलिजेंस (Directorate General of GST Intelligence) की कार्रवाई में तेजी आएगी. एक देश, एक टैक्स और एक बाजार की तर्ज पर केंद्र सरकार द्वारा गुड्स एंड सर्विस टैक्स को देशभर में लागू करने के बाद अप्रत्यक्ष कर चोरों की मुश्किलें बढ़ गई हैं. 

चालू वित्त वर्ष में डायरेक्टर जनरल ऑफ जीएसटी इंटेलिजेंस (Directorate General of GST Intelligence) द्वारा की गई कार्रवाई में राजस्थान में अप्रत्यक्ष करों की चोरी के आंकड़ों में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है. हर बार कर चोरों की ओर से जीएसटी (GST) चोरी के नए-नए तरीके अपनाए गए हैं लेकिन डीजीजीआई (DGGI) की पैनी नजरों ने टैक्स चोरों पर कड़ा एक्शन जारी रखा. अब जीएसटी रिटर्न दाखिल होने के बाद विभाग कुछ बड़े कर चोरों को बेनकाब करने की तैयारी में है. 

डायरेक्टरेट जनरल ऑफ जीएसटी इंटेलीजेंस (Directorate General of GST Intelligence) की जयपुर आंचलिक इकाई के लिए पिछला वित्त वर्ष नए रिकॉर्ड कायम करने वाला रहा. वित्त वर्ष 2018-19 में 116 मामले उजागर हुए हैं. इसमें 1120 करोड़ 43 लाख रुपये की कर चोरी सामने आई. 

कारोबारी उठा रहे गलत फायदा
डीजीजीआई (DGGI) अधिकारियों के अनुसार, अब इस एक्ट की कुछ रियायतों का गलत फायदा कारोबारी उठा रहे हैं. इस काम में उनकी मदद कर सलाहकार और सीए कर रहे हैं. इन सबके नेक्सस को तोड़ने के लिए डीजीजीआई स्पेशल प्लान पर काम कर रहा है. अधिकारी उन संदिग्ध लेनदेन की सूची बना रहे हैं, जो जीएसटी इनपुट क्रेडिट लेने से जुड़े हैं. चालू वित्त वर्ष में मारे गए अधिकतर छापों में फर्जी बिलों से जीएसटी चपत लगाने के मामले सामने आए हैं. फर्जी कंपनियों के गठन कर कारोबार करने के मामलों ने भी केंद्रीय एजेंसियों की नींद उड़ाई हुई है. 

कर चोरी करने वालों पर होगी कार्रवाई
डीजीजीआई के अपर महानिदेशक राजेंद्र कुमार का कहना है कि राजस्व को नुकसान पहुंचाने वालों की खैर नहीं है. कर चोर कितने ही तरीके अपनाएं, हम कर चोरों की प्रत्येक करतूत पर नजर रखे हुए हैं. नए प्रावधानों के तहत फर्जी हथकंडे अपनाएं तो सीधे जेल जाना होगा. इस साल 2 दर्जन मामलों पर एक्शन लिया गया. सामने आया कि कारोबारी टैक्स चोरी के कई तरीके अपना रहे हैं. इसमें फर्जी इनवॉयस, बिना जीएसटी उत्पाद बिक्री, तय मात्रा से कम करके चुकाई टैक्स रेट, फाइनेंस एक्ट 66 ईई का उल्लंघन और उपभोक्ता से टैक्स वसूल कर विभाग को जमा नहीं करवाना प्रमुख हैं. 

हर बड़े ट्रांजैक्शन पर है नजर
डीजीजीआई अब सभी बड़े ट्रांजैक्शन पर नजर रख रहा है. फर्जी कामों में सीए और कर सलाहकारों की भी भूमिका सामने आ रही है. नवंबर और दिसंबर में माह में विभाग की कार्रवाई में तेजी आ सकती है. मार्बल, ग्रेनाइट, फैब्रिक, कॉस्मेटिक्स, सीमेंट, टिम्बर,लोहे और स्टील कारोबार में फर्जी बिलों का चलन अधिक है.