भीलवाड़ा: अपराध पर लगाम लगाने के लिए ADGP सुनील दत्त ने मीटिंग, दिए यह निर्देश

अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (तकनीकी) सुनील दत्त ने शुक्रवार को पुलिस अधीक्षक कार्यालय में क्राइम मीटिंग ली. 

भीलवाड़ा: अपराध पर लगाम लगाने के लिए ADGP सुनील दत्त ने मीटिंग, दिए यह निर्देश
प्रतीकात्मक तस्वीर

भीलवाड़ा: अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (तकनीकी) सुनील दत्त ने शुक्रवार को पुलिस अधीक्षक कार्यालय में क्राइम मीटिंग ली. उन्होंने अधिकारियों से कहा कि सभी तरह के अपराधों की रोकथाम में नई तकनीकों का अधिक से अधिक उपयोग किया जाए. फरार चल रहे अपराधियों की तकनीकी सहायता से तलाश कर उन्हें गिरफ्तार किया जाए. 

उन्होंने भीलवाड़ा जिले में चलाए जा रहे अपराधियों के धरपकड़ अभियान की सराहना की. क्राइम मीटिंग में निर्णय लिया गया कि अपराधियों के धरपकड़ अभियान में अच्छा काम करने वाले पुलिस अधिकारी व कर्मचारियों को सम्मानित किया जाएगा. बैठक में एसपी हरेंद्र कुमार महावर, एएसपी मुख्यालय राजेश मीणा, सिटी सीओ भवर रणधीर सिंह सहित विभिन्न सर्किल पुलिस उपाधीक्षक और थानाधिकारी मौजूद थे.

क्राइम बैठक से पूर्व एडीजी दत्त ने पुलिस लाइन में पीटी व परेड का निरीक्षण किया और एसपी ऑफिस का निरीक्षण करने के बाद मीडिया से मुखातिब हुए. एडीजी सुनील दत्त ने सुबह यहां पुलिस लाइन ग्राउंड में भीलवाडा पुलिस की दक्षता का आंकलन किया. इस दाैरान पुलिस कर्मियों ने विभिन्न प्रकार के डेमोस्ट्रेशन के जरिए अपनी दक्षता दिखाई.. इनमें क्राइम-सीन क्रिएट करने, अपराधियों की धरपकड़ के लिए नाकाबंदी आदि का प्रदर्शन किया. 

एसपी महावर ने बताया कि सुबह 7 बजे एडीजी सुनील दत्त ने पुलिस लाइन में आयोजित परेड का निरीक्षण किया. इससे पहले उन्हें सलामी दी गई. इस दौरान पुलिस कर्मियों ने सबसे पहले क्राइम-सीन का डेमोस्ट्रेशन प्रस्तुत किया. क्राइम सीन के दौरान डॉग स्क्वायड के साथ एफएसएल टीम ने अपराध स्थल का निरीक्षण करने का दृश्य प्रस्तुत किया. अपराधियों की धरपकड़ के लिए नाकेबंदी करने का डेमोस्ट्रेशन किया. बाद में एडीजी ने संपर्क सभा में पुलिस कर्मियों काे अपराधिक मामलाें की जांच के दौरान आने वाली तकनीकी समस्याओं के समाधान के बारे में चर्चा की. 

मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि न्याय प्रक्रिया में सभी को न्याय सौ प्रतिशत मिलता है. कुछ मामलों में सबूतों आदि को लेकर देर हो जाती है. पुलिस कर्मियों को साप्ताहिक अवकाश देने के सवाल पर उन्होंने कहा कि स्टाफ की कमी के चलते पुलिसकर्मियों को छुट्टियां तो दूर, साप्ताहिक अवकाश तक नहीं मिल पाते जिससे वे तनाव में आ जाते हैं. सरकार की ओर से समय-समय पर भर्तियां भी की जाती है, लेकिन वह जनसंख्या को देखते हुए पर्याप्त नहीं है. ऐसे में कानून व्यवस्था की कार्यशैली प्रभावित होती है. जवानों को सभी छुट्टियां मिले, इसके लिए अधिकारी संवेदनशील हैं.

दत्त ने कहा कि पुलिस का रोल अब तक नेगेटिव रहा है और इसे बदलने के लिए अब भर्ती किए जाने वाले जवानों को ऐसी ट्रेनिंग दी जा रही है, जिससे कि वे जनता से जुड़कर काम कर सकेंगे और इसके बेहतर परिणाम सामने आएंगे.