बारां: टिड्डियों से भी ज्यादा खतरनाक हैं 'इल्लियां', किसान बोले - फसलें कैसे बचाएं?

इल्लियां पत्तों को चट कर फसलों में पैदावार को भी प्रभावित कर रही हैं.

बारां: टिड्डियों से भी ज्यादा खतरनाक हैं 'इल्लियां', किसान बोले - फसलें कैसे बचाएं?
खेतों में रेंगती काली रेशेदार इल्ली पिछले पखवाड़े भर से देखी जा रही है.

राम मेहता, बारां: जिले में इन दिनों रबी की फसलों में कीट के प्रकोप के कारण किसानों की चिता बढ़ने लगी है. कीट के कारण फसलों को भी बुरा नुकसान होना शुरू हो गया है.

बारां के छीपाबड़ौद क्षेत्र के हरनावदाशाहजी क्षेत्र में लहलहाती रबी की फसलों पर इस बार काले रेशे वाली विशेष इल्ली ने काश्तकारों की परेशानी बढ़ा रखी है. 

किसानों का कहना है कि यह इल्ली पिछले एक दो सप्ताह से सभी फसलों में नजर आ रही है जबकि दलहन और साग सब्जियों के खेतों में इनका कहर कुछ ज्यादा ही देखा जा रहा है. इल्लियां पत्तों को चट कर फसलों में पैदावार को भी प्रभावित कर रही हैं.

खेतों में रेंगती काली रेशेदार इल्ली पिछले पखवाड़े भर से देखी जा रही है. देशी भाषा में इससे काली कांमळी के नाम से जाने जाने वाली इल्ली को कृषि विभाग सेमी लूपर कालील इल्ली बता रहा है. किसानों का कहना है कि रबी की सभी फसलों में यह इल्ली नजर आ रही है. यह पौधों पर चढ़कर पत्तों के नीचे चिपकी रहती है और पत्तों के साथ-साथ फलों को भी चट कर रही है.

सालरखो निवासी भूरालाल लोधा का कहना है कि उनके खेत में बैंगन की सब्जी में ये इल्लियां काफी नजर आ रही हैं. बैंगन के पत्तों को चट कर रही है, जिससे पौधों में बैंगन लगने ही बंद हो गए. अफीम, चना समेत अन्य दलहनी फसलों में भी इल्लियां फैल रही हैं और फसलों को नुकसान पंहुचा रही हैं. कस्बे समेत आसपास के गांवों में सभी जगह इल्लियां नजर आ रही हैं.