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राजस्थान: कांग्रेस की हार के बाद मंत्री के इस्‍तीफे की खबर, नेतृत्व परिवर्तन का संकेत!

चुनाव में हार के बाद राज्य सरकार में कृषि मंत्री लालचन्द कटारिया ने मंत्री पद से इस्तीफा देने की खबरे सामने आ रही हैं.

राजस्थान: कांग्रेस की हार के बाद मंत्री के इस्‍तीफे की खबर, नेतृत्व परिवर्तन का संकेत!
अभी अशोक गहलोत सीएम और सच‍िन पायलट डिप्‍टी सीएम के पद पर हैं. फाइल फोटो

जयपुर: लोकसभा चुनावों में खराब प्रदर्शन के बाद आत्म विश्लेषण के दौर से गुजर रही कांग्रेस अब पार्टी के भीतर हो रही सियासत से भी जूझ रही है. ऐसे समय में जब दिल्ली में पार्टी आलाकमान हार के कारणों पर मंथन कर रहा है तब राजस्थान के कृषि मंत्री लालचंद कटारिया के इस्तीफे की खबरों ने राजस्थान की सियासत को गर्मा दिया है. हालांकि लाल कटारिया के इस्तीफे की खबर पर अभी तक राजभवन और सीएम स्तर से पुष्टि नहीं हो पाई है.

लोकसभा चुनाव में करारी हार के बाद देश भर में कांग्रेस के नेताओं में हलचल मची हुई है. जहां उत्तरप्रदेश के अमेठी में राहुल गांधी की हार के बाद अलग-अलग राज्यों में कांग्रेस नेताओं के सीधे देने का सिलसिला जारी है वहीं राजस्थान की राजनीति में भी एक केंद्रीय मंत्री के इस्तीफे की खबरों से सियासत गरमा गई है. चुनाव में हार के बाद राज्य सरकार में कृषि मंत्री लालचन्द कटारिया ने मंत्री पद से इस्तीफा देने की खबरे सामने आ रही हैं.


लालचंद कटार‍िया के इस्‍तीफे की खबरों ने राजस्‍थान का स‍ियासी पारी बढ़ा दिया है.

हालांकि मुख्यमंत्री और राजभवन ने इस्तीफा दिए जाने की पुष्टि नहीं की है. इस्तीफा दिए जाने की खबरों के बाद से लालचंद कटारिया का मोबाइल भी बंद आ रहा है उनके कल शाम को दिल्ली में और आज उत्तराखंड में जाने की खबरें है. सोशल मीडिया में लालचंद कटारिया का जो इस्तीफा का वायरल हो रहा है. उसमें लिखा गया है लोकसभा चुनाव में राजस्थान में कांग्रेस ने बेहतर प्रदर्शन नहीं किया है. उनके क्षेत्र में भी कांग्रेस की हार हुई है इसलिए नैतिकता के आधार पर वह इस्तीफा दे रहे हैं.

कटारिया ने लिखा है कि क्षेत्र की जनता ने उन्हें विधानसभा में चुनकर भेजा है क्षेत्र की समस्याओं को विधानसभा में उठाते रहेंगे उनके समाधान की दिशा में प्रयास करते रहेंगे इस्तीफे के लिए कोई राजनीतिक कारण नहीं है. इस्तीफे में राजेंद्र कटारिया के हस्ताक्षर हैं. दरअसल लालचंद कटारिया के विधानसभा क्षेत्र जयपुर ग्रामीण से कांग्रेस प्रत्याशी कृष्णा पूनिया को एक लाख से ज्यादा वोट से हार का सामना करना पड़ा था. कटारिया पर आरोप लगे थे कि उन्होंने कृष्णा पूनिया के लिए ना चुनाव प्रचार किया और ना ही अपने कार्यकर्ताओं को कृष्णा पूनिया के चुनाव प्रचार के लिए लगाया.

कटारिया के पास जोधपुर लोकसभा सीट का भी प्रभार था लेकिन वहां भी वैभव गहलोत को करारी हार का सामना करना पड़ा. कल शाम को इस्तीफे की खबर सामने आने के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज रही. हालांकि इस्तीफे को लेकर कोई अधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हो पाई. कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं में भी लालचंद कटारिया के इस तरह के इस्तीफे देने की  बात पर जानकारी होने से इनकार किया है. दरअसल लाल चंद कटारिया के इस तरह से इस्तीफा देने की प्रक्रिया को जानकार लोग दबाव की पॉलिटिक्स करार दे रहे हैं. 

लालचंद कटारिया का इस्तीफा सोशल मीडिया पर वायरल हुआ उसके नाम मुख्यमंत्री स्तर पर पुष्टि हुई ना ही राजभवन में इस्तीफा पहुंचे जाने की जानकारी सामने आई. जब कि इस्तीफे में लिखा हुआ है कि मुख्यमंत्री के मार्फत राजभवन इस्तीफा भिजवा दिया गया है. दरअसल राजस्थान में जितने भी मंत्री चुनाव प्रचार में सक्रिय थे, उनमें सबसे करारी हार लालचंद कटारिया के जिम्मे आई है. लिहाजा हो सकता है कि वह पार्टी आलाकमान और सरकार डिफेंस मोड में लाने के लिए प्रेशर पॉलिटिक्स का खेल खेल रहे हों.

राजस्थान की राजनीति को अच्छे से समझने वाले लोगों का मानना है कि किसी जमाने में सीपी जोशी कैंप के बेहद खास सिपाही माने जाने वाले लालचंद कटारिया वर्तमान में अशोक गहलोत कैंप में है. विधानसभा चुनाव में भी जब राजस्थान में सीएम पद की दावेदारी को लेकर कशमकश चल रही थी कटारिया ने उस समय अशोक गहलोत को सर्वमान्य नेता कहकर गहलोत के प्रति वफादारी भी साबित की थी. लेकिन मंत्रिमंडल में पोर्टफोलियो कमजोर मिलने के बाद से कटारिया नाराज चल रहे थे.

ऐसे में हो सकता है कि वह एक तीर से दो निशाने लगाने की कोशिश कर रहे हैं. लेकिन इसमें कहीं पर दो राय नहीं है कि ऐसे समय में जब कांग्रेस राजस्थान में अब से सबसे खराब दौर से गुजर रही है. तब कटारिया ने इस तरह का कदम उठाकर कांग्रेस को मजबूत नहीं और कमजोर करने का ही प्रयास किया है. देखना होगा पार्टी आलाकमान इस संबंध में क्या निर्णय लेता है.