अलवर के इस गांव ने किया पंचायत चुनाव का बहिष्कार, वजह जान हैरान रह जाएंगे आप

अगले माह होने वाले पंचायत चुनाव में अलवर के एक गांव के मतदाताओं ने चुनाव का बहिष्कार किया है. 

अलवर के इस गांव ने किया पंचायत चुनाव का बहिष्कार, वजह जान हैरान रह जाएंगे आप
राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय परिसर में खूंखार बंदरों का जमावड़ा

अलवर: अगले माह होने वाले पंचायत चुनाव में अलवर के एक गांव के मतदाताओं ने चुनाव का बहिष्कार किया है. वजह जानकार आप भी हैरत में पड़ जाएंगे. यह गांव अलवर के थानागाजी क्षेत्र में आगर नाम का गांव है. इस गांव में बंदरों की समस्या है. 

इस गांव में इतने बंदर है कि हर घर और दुकान पर दर्जनों बंदर नजर आते हैं. इतना ही नहीं ये बंदर खतरनाक हैं. अब तक दर्जनों लोगों को काट कर जख्मी कर चुके हैं. ग्रामीण इसकी शिकायत नीचे से ऊपर तक कर चुके हैं, लेकिन आज तक कोई समाधान नहीं निकल पाया है. अब ग्रामीणों ने पंचायत चुनाव का बहिष्कार करने का फैसला किया है.  

अलवर के थानागाजी के आगर गांव में बंदरों के आतंक से ग्रामीण पिछले काफी समय से परेशान हैं. भय का आतंक इतना कि बच्चे स्कूल जाने से डर रहे हैं. लोग काम पर जाने से डर रहे हैं. ग्रामीणों ने इसकी शिकायत मुख्यमंत्री, जिला कलेक्टर, एसडीएम से लेकर सरपंच सहित वन विभाग से भी की, लेकिन ग्रामीणों ने आखिर सुनवाई न होने के चलते अब आगामी दिनों में होने वाले पंचायत चुनाव का बहिष्कार करने का फैसला किया है.

ग्रामीणों ने सरकार और प्रशासन से पूछा कि जब ग्रामीण अपने घरों में ही सुरक्षित नहीं हैं तो ऐसे में मतदान का क्या औचित्य? इस संबंध में ग्रामीणों ने राज्य के मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव, राज्य निर्वाचन आयोग के मुख्य चुनाव आयुक्त, संभागीय आयुक्त जयपुर और अलवर जिला कलेक्टर को चेतावनी पत्र प्रेषित कर पंचायतराज चुनाव 2020 में मतदान के बहिष्कार की चेतावनी दी है. 

ग्रामीणों ने प्रेषित पत्र में बताया है कि आगर गांव में उत्पाती बंदरों द्वारा ग्रामीणों पर प्रतिदिन हमले किये जा रहे हैं. उत्पाती बंदर घरों में घुसकर ग्रामीणों पर हमला कर रहे हैं. ग्राम पंचायत से राष्ट्रपति तक गुहार लगाने के बावजूद न्याय नहीं मिला है.

ग्रामीणों ने पत्र में जिला प्रशासन की कार्य प्रणाली पर सवाल उठाते हुए बताया है कि उक्त मामले में समाधान हेतु मुख्यमंत्री कार्यालय, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, लोकायुक्त, राज्य बाल संरक्षण आयोग, राज्य मानवाधिकार आयोग, संभागीय आयुक्त जयपुर, राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण अलवर द्वारा अलवर जिला कलेक्टर को कार्रवाई के निर्देश दिये जा चुके हैं, परन्तु प्रशासन द्वारा कार्रवाई अमल में नहीं लाई गयी है. 

वहीं गांव के राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय परिसर में भी खूंखार बंदरों का जमावड़ा रहने से यहां अध्ययनरत छात्र-छात्राओं में भय व्यापत है. भय के चलते कई छात्र टीसी कटवा चुके हैं. भयभीत बच्चे घर आकर रोते हैं. बंदर पोषाहार खाते वक़्त बच्चों से खाना छीन ले जाते हैं. 

ग्रामीणों ने पत्र में चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन द्वारा 10 दिवस में बंदरों को नहीं पकड़वाया गया तो प्रशासन की लापहरवाही का खामियाजा भुगत रहे पीड़ित ग्रामीणों द्वारा पंचायतराज चुनावों में मतदान का बहिष्कार किया जायेगा.