सर्दियों में आयुर्वेद दिलाएगी जोड़ों के दर्द में राहत, जानिए कैसे

आयुर्वेद के विशेषज्ञों ने कुछ उपाय सुझाए हैं, जिनका उपयोग आप जोड़ों के इस दर्द से उबरने के लिए कर सकते हैं.

सर्दियों में आयुर्वेद दिलाएगी जोड़ों के दर्द में राहत, जानिए कैसे
जोड़ों के दर्द से राहत के लिए उचित व संतुलित खानपान बेहद जरूरी है.

राजस्थान: जोड़ों के दर्द से जूझ रहे लोगों के लिए सर्दियों का मौसम मुश्किल पैदा कर सकता है. ऑस्टियोआर्थराइटिस की स्थिति तब उत्पन्न होती है जब आपके जोड़ों में उपस्थित कार्टिलेज धीरे-धीरे क्षतिग्रस्त होने लगती है. इस वजह से हड्डियां आपस में एक-दूसरे से घिसने या रगड़ने लगती हैं. फलस्वरूप जकड़न, जोड़ों में दर्द और गति में दिक्कत इत्यादि की समस्या पैदा होने लगती है. वहीं, आयुर्वेद के विशेषज्ञों ने कुछ उपाय सुझाए हैं, जिनका उपयोग आप जोड़ों के इस दर्द से उबरने के लिए कर सकते हैं.

नियमित ज्वॉइंट रोटेशन या जोड़ों का घुमाव
साइकिलिंग और तैराकी जैसे कुछ कसरतों के साथ आप अपनी जीवन शैली में ज्वॉइंट रोटेशन को शामिल करें. जोड़ों के इस घुमाव से आपको इसमें दर्द से राहत मिलेगी और स्थिति को बिगड़ने से रोकने में मदद मिलेगी. इसके साथ ही वॉकिंग से भी आपको फायदा मिल सकता है, लेकिन इस बात का ध्यान रखें कि ज्यादा तेजी से न चलें और आरामदायक जूते पहनकर ही सैर पर निकलें, जिसकी सतह समान हो.

अभ्यंग का अभ्यास करें
यह आयुर्वेद चिकित्सा का एक रूप है, जिसमें औषधीय तेलों से पूरे शरीर की मालिश की जाती है. इससे एक तो वात की समस्या कम होती है और दूसरी इससे उत्तकों से टॉक्सिन को बाहर निकलने में मदद मिलती है. इसके लिए ऑर्गेनिक तिल के तेल को गुनगुना गर्म करें और सिर से लेकर पांव तक लगाएं और हर रोज कम से कम दस मिनट तक मसाज करें. अगर आप रुमाटॉइट आर्थराइटिस से पीड़ित हैं तो अभ्यंग का अभ्यास न करें.

घी का सेवन
गठिया को एक ऐसे रोग के रूप में देखा जाता है जिसमें वात की अधिकता हो जाती है. जिससे पूरे शरीर में नमी कम होने लगती है. इस वजह से चिकनाई में कमी होने लगती है. घी, तिल या जैतून के तेल के उपयोग से सूजन में राहत मिलती है, जोड़ों में चिकनाई पैदा होती है और जोड़ों में जकड़न कम होती है.

योगा
योग को अपनी जिंदगी में शामिल करें. ताड़ासन, वीरभद्रासन और दंडासन से जोड़ों के दर्द में राहत मिलती है और इससे गति में तेजी आती है.

उचित खानपान
जोड़ों के दर्द से राहत के लिए उचित व संतुलित खानपान बेहद जरूरी है. 'रक्ताशली' और 'शष्टिका' जैसे अनाजों के सेवन से दर्द में राहत मिलती है. करेला, बैंगन, नीम और सहजन के डंठल का सेवन इस रोग में अधिक से अधिक करें और साथ ही तमाम तरह के बेर और एवोकैडो भी जकर खाए.