close

खास खबरें सिर्फ आपके लिए...हम खासतौर से आपके लिए कुछ चुनिंदा खबरें लाए हैं. इन्हें सीधे अपने मेलबाक्स में प्राप्त करें.

बदहाली की कगार पर बांसवाड़ा की कागदी नदी, प्रशासन बेखबर

इस नदी में शहर के घरों का गंदा पानी भी आ रहा है जिससे यह नदी गंदी हो गई है. इस नदी पर बने पुल भी पूरी तरह से जर्जर हो चुके हैं. इन पुलों के पिलर में दरारे आ चूकी हैं.

बदहाली की कगार पर बांसवाड़ा की कागदी नदी, प्रशासन बेखबर

बांसवाड़ा: शहर को दो भागों में बाटने वाली और शहर की सुंदरता को दर्शानें वाली कागदी नदी इन दिनों जिला प्रशासन, माही विभाग, नगर परिषद और शहर की जनता की अनदेखी के कारण पूरी तरह से बदहाल हो चुकी है. इस नदी में पानी से ज्यादा कचरा और गंदगी दिखाई देने लगी है. वहीं जलकुंभी ने भी इस नदी की सुंदरता को पूरा खत्म कर दिया है. 

यह नदी रतलाम मार्ग पर बने कागदी पिकअप बांध से निकलती है जो पूरे शहर से होकर गुजरती है. जब इस नदी को बनाया गया था तब यहा बेहत की अच्छा नजारा दिखाई देता था पर, धीरे-धीरे विभागीय लापरवाही और शहर की जनता ने इस नदी को आज पुरी तरह से खत्म सा कर दिया है और इस नदी के अब गंदे नाले जेसे हालात कर दिए हैं. इस नदी में शहर के सब्जी विक्रेता, होटल संचालक, सहीत घरों के लोग अपना कचरा डाल रहे हैं. जिससे इस नदी का पानी पूरी तरह से प्रदूषित हो गया है. 

वहीं इस नदी में शहर के घरों का गंदा पानी भी आ रहा है जिससे यह नदी गंदी हो गई है. इस नदी पर बने पुल भी पूरी तरह से जर्जर हो चुके हैं. इन पुलों के पिलर में दरारे आ चूकी हैं. वहीं पिलरों का प्लास्टर तक उखड़ रहा है. इतना ही नहीं 2005 में तत्कालिन भाजपा सरकार ने इस नदी के सोन्द्रयकरण के लिए करोड़े रूपसे खर्च किए थे पर माही विभाग के अधिकारियों की लापरवाही और घटीया निर्माण के बाद यह पैसे भी बर्बाद हो गए और आधी नदी में ही लोहे की जालिया बन पाई. 

उसके बाद पुर्व की वसुंधरा राजे सरकान ने भी इस नदी को जयपुर की द्रव्यनदी की तर्ज पर सोन्द्रयकरण करने के लिए स्वीक्रति दी पर सरकार बदलने के बाद इस नदी का काम ठप सा पड़ गया और लोगों की उम्मीद भी खत्म हो गई. अगर अब इस नदी पर सरकार ने ध्यान नहीं दिया तो यह पूरी तरह से खत्म हो जाएगी.