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राजस्थान: अब रणथंभोर नेशनल पार्क के 65 चौकियों पर जलेगी लाइट, बदलेगा नजारा

रणथंभोर नेशनल पार्क ने अब तक पर्यटकों से होने वाली आय के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए है. पिछले दो सालों मे पर्यटकों के कारण विभाग ने रिकॉर्ड राजस्व आय अर्जित की है .

राजस्थान: अब रणथंभोर नेशनल पार्क के 65 चौकियों पर जलेगी लाइट, बदलेगा नजारा
रणथंभोर नेशनल पार्क को 45 वर्ष पूर्व टाईगर रिजर्व घोषित किया गया था.

अरविंद सिंह चौहान/सवाई माधोपुर: विश्व के पर्यटन मानचित्र पर रणथंभोर नेशनल पार्क का नाम स्वर्णिम अक्षरों में अंकित है. सात समंदर पार से सैलानी बाघों की एक झलक निहारने यहां आते है, लेकिन खास बात ये कि जंगल से जुड़े लोगों की सुविधाओं के बारे मे यहां बरसों से किसी ने नहीं सोचा. लेकिन अब समय के साथ उन लोगों की सुख सुविधाओं और जरूरतों के बारे मे वन महकमा महत्वपूर्ण कदम उठा रहा है. इस कारण अब जंगल मे बड़े आमूलचूल बदलाव आ रहे है. यह बहुत बड़ी बात है कि लगभग 45 सालों बाद रणथंभोर की चौकिया रात के घनघोर अंधियारे को चीरकर रौशन होने लगी है.

रणथंभोर नेशनल पार्क ने अब तक पर्यटकों से होने वाली आय के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए है. पिछले दो सालों मे पर्यटकों के कारण विभाग ने रिकार्ड तोड़ राजस्व आय अर्जित की है .लेकिन कुछ पहलू वो है जो जानना बेहद आवश्यक है. रणथंभोर नेशनल पार्क मे शायद आपको जानकारी ना हो. हम आपको बता दें समूचे जंगल मे लगभग 65 वन चौकियां हैं. रणथंभोर नेशनल पार्क को 45 वर्ष पूर्व टाईगर रिजर्व घोषित किया गया था. लेकिन अभाव की बात करें तो सबसे बड़ी बात ये है कि जंगल की चौकियों पर रौशनी की व्यवस्था के नाम पर लालटेन हुआ करती थी. समय बहुत तेजी से गुजरा लेकिन चौकियों पर भौतिक सुविधाएं नहीं बदली. जो लोग वन और वन्य जीवों को बचाने मे महत्वपूर्ण कड़ी माने जाते है, वे वर्षों से समस्याओं से जुझते रहे. लेकिन अब समय के साथ उनके दिन बदलने लगे है. वन महकमे ने जंगल की प्रत्येक चौकियों पर सोलर प्लांट लगाने का बीड़ा उठा लिया है. इससे अंधेरे के आगोश मे बरसों से अभावग्रस्त पड़ी चौकिया रौशन होने लगी है. वहीँ चौकियों पर रहने वाले फोरेस्ट गार्ड के चेहरों पर खुशियाँ देखने को मिल रही है ।ये बदलाव भी पर्यटको की रिकार्ड तोड़ आय से ही सम्भव हो रहे है ।

नेशनल पार्क की बड़ी वन चोकिया लापुर, गुढा, गिलाई सागर, शेरपुर, राजबाग, फलौदी, क्वालजी, भिड़, अणतपुरा आदि सोलर प्लांट से रौशन हो गई है. वहीं चौकियों में बिजली पहुंचने से अन्य भौतिक सुविधाएं भी मिलने लगी है. सोलर से ही वन्य जीवों के लिए भीषण गर्मी मे पेयजल की व्यवस्था भी हो रही है. जहां पहले डीजल इंजन से ट्यूबवैल से पानी लिया जाता था वहीं अब सोलर से पेयजल भी आसानी से उपलब्ध हो रहा है. सोलर व्यवस्था वन कर्मियों के लिए ही नहीं वन्य जीवों के लिए वरदान साबित हो रही है. वनकर्मियों को चौकी पर बिजली मिलने से रोशनी व पंखे की हवा नसीब होने लगी है. सोलर प्लांट लगाने का सिलसिला बदस्तूर जारी है. साथ ही पटवा बावडी, ठुमका, इन्डाला ,बालाजी चौकी, तलावडा, गोठबिहारी, तालडा, कचीदा तथा दर्रा वन चौकी पर भी सोलर प्लांट शीघ्र स्थापित कर दिए जाएंगे.

लगातार बदलती व्यवस्थाओं के चलते जंगल मे अब पिछले सालों की तुलना मे ना सिर्फ चोकिया बढ़ी है, बल्कि वन कर्मियों की संख्या भी बढ़ी है. जिन पर टाईगर की सुरक्षा का महत्वपूर्ण जिम्मा है ,उनकी बखूबी निभाए जाने वाली जिम्मेदारी के चलते रणथंभोर नेशनल पार्क मे बाघों की तादाद भी बढ़ी है. साथ ही रणथंभोर नेशनल पार्क भ्रमण पर आने वाले पर्यटको के कारण विभाग की राजस्व आय मे भी पिछले सालों की तुलना मे रिकार्ड तोड़ इजाफा हुआ है. यानी कुल मिलाकर दावे से कहा जा सकता है कि रणथंभोर मे बहुत कुछ अच्छा हो रहा है जिसके कारण ही बेहतर परिणाम सामने आ रहे है. अब ज़रूरत है इन सभी को बेहतर तरीके से संजोकर रखे जाने की.