जयपुर में खुलेआम हो रही पानी की कालाबाजारी, स्टिंग ऑपरेशन में कैद हुई पूरी सच्चाई

पानी की उन्हीं इलाकों में सप्लाई करते हैं जहां पर पानी नहीं पहुंच पाता या फिर वहां पर पानी की किल्लत अधिक है

जयपुर में खुलेआम हो रही पानी की कालाबाजारी, स्टिंग ऑपरेशन में कैद हुई पूरी सच्चाई
जयपुर में सबसे ज्यादा पानी के टैंकर खो नागोरियान इलाके में सप्लाई होते हैं

आशीष चौहान/जयपुर: सरकार प्रदेश के हर नागरिक की प्यास बुझाने का दावा ठोकती है लेकिन इसकी हकीकत कुछ और ही बयां करती है. पानी के पैसे को पानी में बहाने की कहानी कहीं और की नहीं, बल्कि राजधानी जयपुर की है. राजधानी के अलग अलग क्षेत्र से की गई पड़ताल ने टैंकरों से प्यास बुझाने के दावे की पोल खोलकर रख दी.

जयपुर के कोने कोने में पानी की कालाबाजारी का ऐसा खुलेआम खेल चल रहा है, जिस पर ना तो किसी का कंट्रोल है और ना विभाग की कोई नजर. टैंकर से जयपुर की प्यास बुझाने के लिए सरकार सालाना करीब 12 करोड़ से ज्यादा की राशि खर्च कर रही है. लेकिन विभाग और टैंकर सप्लायर्स की मिलीभगत से सरकारी राशि को पानी में बहाया जा रहा है. सरकार की तरफ से जनता को मुफ्त में मिलने वाला पानी जनता की जेब काट रहा है.

गोनेर रोड स्थित पोलोविक्ट्री पंप हाउस पर जब हमारी टीम पहुंची तो हमने टैंकर्स सप्लायर्स से पानी की डिमांड की. घर मे शादी का हवाला दिया तो सप्लायर्स ने पानी लाने में कोई मनाही नहीं की. टैंकर सप्लायर्स ने बड़े ही खुले मन से कह दिया कि टैंकर का पानी तो डल जाएगा, लेकिन उसके लिए 250 रुपए देने होंगे. एक एक करके वहां तो सभी सप्लायर्स पहुंच गए. ऐसा लग रहा था जैसे इन सबके पीछे विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत हो. 

हमारा अगली पड़ताल थी ट्रांसपोर्ट नगर पंप हाउस. वहां भी पानी की कालाबाजरी खुलेआम हो रही थी. ना कोई रोकने वाला और ना ही किसी की लगाम. बड़े आसानी से वहां टैंकर चालक बिक जाते है. लेकिन यहां पानी के भाव और बढ़ गए. यहां 300 रुपये में टैंकर की डील की.

जयपुर में सबसे ज्यादा पानी के टैंकर खो नागोरियान इलाके में सप्लाई होते हैं. सबसे बड़ी बात यह है कि टैंकर्स की संख्या सबसे ज्यादा यहीं है. यहां सरकार ने 40 टैंकर लगवा रखे हैं लेकिन इसके बावजूद भी सबसे ज्यादा पानी के टैंकर ब्लैक भी यहीं होते हैं. सबसे बड़ी बात तो यह है कि पास में खो नागोरियन थाना है लेकिन बावजूद इसके कालाबाजारी खुलेआम चलती है.

आपको बता दें कि पानी की उन्हीं इलाकों में सप्लाई करते हैं जहां पर पानी नहीं पहुंच पाता या फिर वहां पर पानी की किल्लत अधिक है. इसके लिए भी अधिकारी की शिकायत के बाद ही इलाके या घर में पानी पहुंचता है. इसके लिए जलदाय विभाग किसी भी तरह का शुल्क नहीं लेता है लेकिन टैंकर चालक खुलेआम मनमर्जी से पानी के टैंकर के पैसे वसूल रहे हैं, जिसमें ठेकेदारों की मिलीभगत भी सामने आ रही है. 

जयपुर में 108 जगहों पर हाइड्रेम लगे हुए हैं जहां से 10 कर्ज पानी से भरे जाते हैं. जयपुर में करीब 400 टैंकर्स के जरिए 7 लाख से ज्यादा लोगों की प्यास बुझाने का जिम्मा है लेकिन अधिकतर इलाकों में पानी इसीलिए ही नहीं पहुंच पाता क्योंकि पानी की कालाबाजारी तो खुलेआम हो रही है. ऐसे में जहां पानी पहुंचना चाहिए वहां नहीं पहुंच पाता जिससे पानी की किल्लत लगातार क्षेत्र में बढ़ती जाती है. 

जलदाय विभाग ने पानी की चोरी रोकने के लिए ओटीपी सिस्टम लागू किया था जिसमें उपभोक्ता की शिकायत के बाद में ओटीपी नंबर उपभोक्ता के नंबर पर पहुंचने के बाद ही पानी डाला जाएगा. लेकिन इसके साथ साथ सभी टैंकर्स में जीपीएस सिस्टम लगा हुआ है जिससे टैंकर की लाइव लोकेशन का पता चल जाता है. इसके बावजूद भी अधिकारी ऐसे ठेकेदार और टैंकर सप्लायर पर कार्रवाई नहीं करते. वहीं जी मीडिया की पूरे स्टिंग आपरेशन के बाद अतिरिक्त मुख्य अभियंता देवराज सोलंकी ने जांच के आदेश दिए है. उन्होने कहा कि है कि 'दोषियों को बक्शा नहीं जाएगा, दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई होगी.'