सीएम गहलोत ने ठाकुर जी के दरबार में लगाई हाजिरी, बच्चों को बांटे गर्म कपड़े

इस दौरान सीएम को मंदिर ट्रस्ट की ओर से मुख्यमंत्री राहत कोष में पांच लाख का चेक भेंट किया गया. मुख्यमंत्री ने गोविंददेवजी की नई वेबसाइट का लोकार्पण किया.

सीएम गहलोत ने ठाकुर जी के दरबार में लगाई हाजिरी, बच्चों को बांटे गर्म कपड़े
बीस स्कूलों के ढाई हजार बच्चों को गहलोत ने स्वेटर वितरित किए.

जयपुर: राजधानी के आराध्य देव गोविंददेवजी (Govind Dev ji) के मंदिर में आज भक्तों के सैलाब के बीच मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) ने पूजा अर्चना की. मौका 20 सरकारी स्कूलों के छात्रों को गर्म कपड़े बांटने का था. इस दौरान गहलोत ने महेश जोशी के साथ काफी चुटकियां लीं.

सूबे के मुखिया अशोक गहलोत आज गोविंद के दर पर पहुंचे तो भक्तों की अपार भीड़ के बीच एक साधारण भक्त की तरह पूजा अर्चना की. प्रदेश में शांति-समृद्धि खुशहाली की कामना की. साथ ही बच्चों को गर्म कपड़े बांटे.

बीस स्कूलों के ढाई हजार बच्चों को गहलोत ने स्वेटर वितरित किए. इसका इंतजाम गोविंद देवजी मंदिर ट्रस्ट की ओर से किया गया. इस दौरान सीएम को मंदिर ट्रस्ट की ओर से मुख्यमंत्री राहत कोष में पांच लाख का चेक भेंट किया गया. मुख्यमंत्री ने गोविंददेवजी की नई वेबसाइट का लोकार्पण किया और मंदिर ट्रस्ट की ओर से सामाजिक और धार्मिक सरोकारों के लिए किए जा रहे परोपकार के कामों की तारीफ की.

ashok gehlot

चुनाव से पहले आते मंदिर
इस बीच सरकारी मुख्य सचेतक महेश जोशी ने गोविंद से अपने जुड़ाव को शब्दों में बयां किया और कहा कि साढ़े पांच लाख से ज्यादा वोटों की लोकसभा चुनाव की करारी हार के बाद वो गड्ढे में चले गये थे. गोविंद की कृपा से फिर से सियासत की मुख्यधारा में लौटे हैं. महेश जोशी की बात पर गहलोत कहां पीछे रहने वाले थे. उन्होंने पूर्व उपराष्ट्रपति भैरोंसिंह शेखावत से जुड़े प्रसंग सुनाएं. उन्होंने कहा कि शेखावत साहब ने जो ऊंचाईयां छुईं, उसमें गोविंद देवजी का बड़ा योगदान था, वो रोजाना यहां आते थे. आप भी अगर चुनाव से पहले आते तो शायद कभी चुनाव नहीं हारते.

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राजा से लेकर रंक तक आते हैं इस मंदिर
गोविदंदेवजी मंदिर में जयपुर की जनता की आस्था है. राजा-महाराजाओं ने भी गोविंद को अपना राजा माना. सैंकड़ों सालों से राजा से लेकर रंक तक सब यहां आते हैं. हजारों लोगों की दिनचर्या गोविंद के दर्शन से शुरू होती है और ये सिलसिला सैंकड़ों साल से बदस्तूर जारी है.