मुस्तैदी के साथ अपनी ड्यूटी को निभा रहे कोरोना वॉरियर, अनलॉक के बावजूद राहत नहीं

स्वास्थ्य कर्मचारियों और चिकित्सकों का कहना है कि वह आज भी फील्ड में डटे हुए हैं और शहर के हर कोने में पहुंचकर संदिग्ध मरीजों की जांच कर रहे हैं.

मुस्तैदी के साथ अपनी ड्यूटी को निभा रहे कोरोना वॉरियर, अनलॉक के बावजूद राहत नहीं
प्रतीकात्मक तस्वीर.

जयपुर: राजस्थान (Rajasthan) में अभी भी कोरोना का खतरा टला नहीं है. हर दिन एक हजार से ज्यादा कोरोना संक्रमित सामने आ रहे हैं. ऐसे में जयपुर हो या फिर प्रदेश का कोई और हिस्सा सब जगह कोरोना वॉरियर के रूप में चिकित्साकर्मी मुस्तैदी के साथ अपनी ड्यूटी को निभा रहे हैं. कोविड केयर सेंटर हो या फिर फील्ड में हर जगह ये स्वास्थ्यकर्मी मोर्चा संभाले हुए हैं.  

राजस्थान में 2 मार्च को पहला कोरोना पॉजिटिव मरीज देखने को मिला और इसके बाद जब पॉजिटिव मरीजों की संख्या में इजाफा होने लगा तो राजस्थान सरकार ने 22 मार्च से प्रदेश को लॉकडाउन कर दिया. इसके बाद सभी सरकारी संस्थानों और अन्य सेवाओं को पूर्ण रूप से बंद कर दिया गया. 

इस दौरान सरकार ने प्रदेश के अलग-अलग स्थानों पर कोरोना सेंटर बनाए, जहां पॉजिटिव मरीजों का इलाज शुरू किया गया और एक नई जिम्मेदारी प्रदेश के चिकित्सा और स्वास्थ्य कर्मचारियों पर आ गई हालांकि अब प्रदेश लगभग अनलॉक हो गया है लेकिन बावजूद इसके जो चिकित्सा और स्वास्थ्यकर्मी जिनकों कोरोना वॉरियर्स के नाम से भी जाना जाता है, उनके काम का बोझ अभी भी कम नहीं हुआ है. कोविड सेंटर हो या फील्ड हर क्षेत्र में अभी भी यह स्वास्थ्यकर्मी फ्रंटलाइन पर रहकर अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं. यह स्वास्थ्य कर्मी अपनी इस जिम्मेदारी को काम का बोझ नहीं बल्कि मानव सेवा से जोड़कर देख रहे हैं. 

क्या कहना है इन वॉरियर्स का
स्वास्थ्य कर्मचारियों और चिकित्सकों का कहना है कि वह आज भी फील्ड में डटे हुए हैं और शहर के हर कोने में पहुंचकर संदिग्ध मरीजों की जांच कर रहे हैं. उन्हें कोविड सेंटर्स पर भर्ती किया जा रहा है. ऐसे में बिना छुट्टी और बिना घर जाए लगातार वे लोग फील्ड में डटे हुए हैं. मेडिकल चीफ ऑफिसर डॉक्टर नरोत्तम शर्मा और उनकी टीम आज भी शहर के अलग-अलग स्थानों पर लोगों की सैंपलिंग कर रही है और पॉजिटिव आने के बाद उन्हें कोविड सेंटर पर भर्ती करवा रही है. इस दौरान एसिंप्टोमेटिक मरीजों का इलाज भी घर पर रहकर ही इनकी टीम की ओर से किया जा रहा है.

क्या कहना है सीएमओ का
CMHO प्रथम डॉ. नरोत्तम शर्मा और उनकी टीम ने बताया कि हालांकि काम का बोझ बीते कुछ समय से लगातार बना हुआ है लेकिन उनकी टीम अभी भी कोरोना से जंग लड़ रही है और उनकी इस काम को बोझ नहीं समझ रही. हालांकि यदि चिकित्साकर्मियों पर किसी तरह वर्क बर्डन आता है तो कुछ समय के लिए चिकित्साकर्मी और कर्मचारियों को रिप्लेस भी कर दिया जाता है. डॉ. राजीव शर्मा का कहना है कि काम के दौरान कोरोना वॉरियर्स को हर तरह की सुविधा पहुंचाने का जिम्मा उनके पास है, जिसमें खाना पानी और अन्य सुविधाएं शामिल है और कुछ ले कुछ समय से वे लगातार इस काम को अंजाम भी दे रहे हैं.