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राजस्थान के सरहदी इलाकों में गहराया पानी संकट, अकाल जैसे हालात

 कुएं हो तालाब हो या फिर बावड़ी, कहीं पर पानी की एक बूंद भी नहीं मिल रहा है. ऐसा लग रहा है, मानों पूरे सरहदी इलाके में एक तरह से अकाल आ गया हो.

राजस्थान के सरहदी इलाकों में गहराया पानी संकट, अकाल जैसे हालात
गर्मी की तपिश के कारण लू के थपेड़ों को झेलना पड़ रहा है.

रौनक व्यास/बीकानेर: प्रदेश के सरहदी इलाकों में पानी संकट काफी ज्यादा गहरा चुका है. गांव के लोगों में पानी के लिए त्राहि-त्राहि मची हुई है. पीने के पानी के लिए महिलाओं को कई किलोमीटर दूर जाना पड़ता है. कुएं हो तालाब हो या फिर बावड़ी, कहीं पर पानी की एक बूंद भी नहीं मिल रहा है. ऐसा लग रहा है, मानों पूरे सरहदी इलाके में एक तरह से अकाल आ गया हो.

खबर के मुताबिक पश्चिमी राजस्थान में बसे बीकानेर जिले के कोलायत क्षेत्र के लोग पानी के एक एक बूंद के लिए मोहताज हैं. जहां एक तरफ लोगों को गर्मी की तपिश के कारण लू के थपेड़ों को झेलना पड़ रहा है. दूसरी तरफ लोग पानी के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं. हालात इतने विकट हो गए हैं, कि कोसों दूर से पानी लाने के बाद ग्रामीण इस दुविधा में फंसे हैं कि खुद के परिवार की प्यास बुझाएं या फिर पाले हुए पशुओं की. महंगे दामो में पानी का टेंकर डलवाने को मजबूर ग्रामीण बड़े-बड़े दावे करने वाले सरकारी तंत्र को कोसते नजर आ रहे हैं.

ग्रामीण आबादियों में धीरे-धीरे पेयजल आपूर्ति खत्म सी होती जा रही है. कई गांवो में तो पानी के लिए त्राहि-त्राहि हो रही है.पानी की इस महामारी को लेकर जलदाय विभाग के अधिकारी बड़े-बड़े दावे कर रहे हैं. करोड़ो की लागत के प्रोजेक्ट की बात कर रहे हैं लेकिन इस बात का जवाब कौन देगा कि कि अभी गांव में रहने वाले लोगों की प्यास कौन बुझाएगा.

ऐसा नहीं की कोलायत राजनीतिक क्षेत्र में पिछड़ा हुआ हो. यही वो क्षेत्र है जहां से देवीसिंह भाटी सात बार विधायक तो चार बार कैबिनेट मंत्री बने और अब वर्तमान विधायक भंवर सिंह भाटी भी उच्च शिक्षा मंत्री है. लेकिन हालात आज भी वो ही है. सरकारे आई और गईं. जनता ने अपना जनप्रतिनिधि भी बदल कर देख लिया, लेकिन गर्मी के साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी पानी के लिए त्राहि-त्राहि मची हुई है आखिर जनता जाए तो कहां जाए.