झालावाड़: महिला के प्रसव के दौरान नदारद रहे डॉक्टर और कंपाउंडर

झालावाड़ जिले की विभिन्न सीएससी तथा पीएचसी में मरीजों और तीमारदारों के साथ लगातार लापरवाही के मामले सामने आ रहे हैं, लेकिन स्वास्थ्य महकमा इस ओर जरा भी ध्यान नहीं दे रहा है.  

महेश परिहार, झालावाड़: जिले की विभिन्न सीएससी तथा पीएचसी में मरीजों और तीमारदारों के साथ लगातार लापरवाही के मामले सामने आ रहे हैं, लेकिन स्वास्थ्य महकमा इस ओर जरा भी ध्यान नहीं दे रहा है. इसी की बानगी एक बार फिर देखने को मिली झालावाड़ जिले के डग सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में, जहां प्रसव के लिए महिला को लेकर पहुंचे परिजन करीब 2 घंटे तक चिकित्सक तथा नर्सिंग कर्मियों के इंतजार में भटकते रहे, बाद में मजबूरन वहां उपस्थित महिलाओं को ही प्रसव कराना पड़ा.

घटना सोमवार तड़के 4:00 बजे की है, जहां डग निवासी 25 वर्षीय ज्योति माली को प्रसव पीड़ा होने पर उसके परिजन सीएससी डग लेकर आए, लेकिन अस्पताल में चिकित्सक से लेकर नर्सिंग कर्मी तक कोई मौजूद नहीं मिला. एक तरफ प्रसूता की प्रसव पीड़ा बढ़ती गई और वह तड़पती रही, तो वहीं दूसरी और परिजन नर्सिंग कर्मियों व चिकित्सक की तलाश में अस्पताल में इधर-उधर भागते रहे. बाद में जानकारी लेकर वह कम्पाउंडर राकेश सुमन के घर पहुंचे, तो उसने 2 घंटे में पहुंचने का समय दिया, लेकिन नहीं पहुंचा। इस दौरान प्रसव पीड़ा बनने पर प्रसूता ज्योति माली के साथ आई महिला परिजनों ने ही उसका प्रसव करवा दिया.

मामले का पता उस समय चला जब नाराज परिजनों ने अस्पताल परिसर में हंगामा किया और चिकित्सालय स्टाफ तथा चिकित्सक की लापरवाही से मीडिया को अवगत कराया.

मिल रही जानकारी के अनुसार उस समय ड्यूटी भी अस्पताल प्रभारी डॉ. रामावतार देगड़ा की थी, लेकिन ड्यूटी समय के दौरान चिकित्सक कोटा निकल गए, जिसके बाद ड्यूटी पर तैनात नर्सिंग कर्मी भी रात को घर चला गया. इसी दौरान इमरजेंसी में देर रात पहुंची प्रसूता और उसके परिजनों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा.

गौरतलब है कि ज़ी मीडिया द्वारा झालावाड़ जिले के विभिन्न सीएससी में लापरवाही के मामले लगातार उजागर किए हैं. हाल ही में चौमहला चिकित्सालय में भी नसबंदी ऑपरेशन के बाद महिलाओं को जमीन पर लिटा देना तथा ऑपरेशन थिएटर से वार्ड तक बिना स्ट्रैचर उपलब्ध कराएं पीड़ा सहती महिलाओं को पैदल ही सीढ़ियां उतार कर लाने जैसी गंभीर लापरवाही का मामला प्रमुखता से उठाया गया था, जिसके बाद चौमहला चिकित्सालय प्रशासन अपनी लापरवाहियों पर पर्दा डालने के लिए अचानक हरकत में आया और मरीजों और तीमारदारों की खातिरदारी में जुट गया.