सादुलशहर: स्वास्थ्यकर्मियों के पास नहीं है आवश्यक उपकरण, संक्रमित होने का खतरा

राजस्थान में कोरोना से जंग लड़ने के लिए मुख्यमंत्री अशोक गहलोत अपनी टीम के साथ दिन रात एक किये हुए हैं

सादुलशहर: स्वास्थ्यकर्मियों के पास नहीं है आवश्यक उपकरण, संक्रमित होने का खतरा
प्रतीकात्मक तस्वीर

कुलदीप गोयल, सादुलशहर: राजस्थान में कोरोना (Coronavirus) से जंग लड़ने के लिए मुख्यमंत्री अशोक गहलोत अपनी टीम के साथ दिन रात एक किये हुए हैं और हरसंभव प्रयास कर रहे हैं ताकि इस महामारी से निपटा जा सके, लेकिन एक मामला ऐसा है जिसमे स्थानीय प्रशासन की लापरवाही के चलते बढ़ा खतरा पैदा हो सकता है. दरअसल स्वास्थ्यकर्मियों के पास बुखार नापने के लिए आवश्यक उपकरण ही नहीं है. ऐसे में खुद स्वास्थ्यकर्मियों के भी संक्रमित होने का खतरा बना हुआ है.

पड़ोसी राज्य पंजाब और पड़ोसी जिले बीकानेर और चूरू में कोरोना दस्तक दे चुका है. ऐसे में जिला प्रशासन ने एहतियात बढ़ा दी है. बाहर से आने जाने वाले पर कड़ी नजर रखी जा रही है. स्वास्थ्यकर्मी और पुलिसकर्मी दिन रात अपनी अपनी ड्यूटी कर रहे हैं, लेकिन हैरानी की बात है की स्वास्थ्यकर्मी ड्यूटी पर तो तैनात हैं लेकिन उनके पास आवश्यक उपकरण ही नहीं हैं.

राजस्थान-पंजाब बॉर्डर पर पतली चैक पोस्ट पर स्वास्थ्य विभाग की टीम तैनात है जो राजस्थान पंजाब में आने जाने वालो की स्क्रीनिंग करती है और उनका रेकॉर्ड रख रही है. इस टीम को हर यात्री का बुखार, पल्स आदि चैक करना होता है, लेकिन हैरानी की बात है की इस टीम के पास बुखार नापने के लिए थर्मो स्कैनर ही नहीं है.

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बुखार नापने के लिए थर्मामीटर का इस्तेमाल किया जा रहा है. स्वस्थ्यकर्मियों ने बताया कि अभी तक विभाग ने थर्मोस्कैनर उपलब्ध नहीं करवाया है और किसी रोगी को संदिग्ध होने पर सेनेटाइजर से साफ़ कर थर्मामीटर का इस्तेमाल किया जाता है. जबकि थर्मामीटर द्वारा व्यक्ति के मुंह या कांख में लगाकर बुखार नापा जाता है जिससे संक्रमण होने का खतरा बना रहता है. यही नहीं इससे स्वास्थ्यकर्मी खुद भी संक्रमित हो सकता है.  यही हाल श्रीगंगानगर हनुमानगढ़ बॉर्डर पर स्तिथ खैरूवाला चैकपोस्ट पर देखने को मिला. वहां भी स्वास्थयकर्मियों के पास थर्मो स्कैनर नहीं था.