अंजाम तक पहुंचाए जाएंगे राजस्थान के गुनाहगार, अपराधियों पर लगाम कसेगा खास यूनिट

जघन्य अपराधों में त्वरित और प्रभावी जांच की मॉनिटरिंग के लिए विशेष यूनिट पर विचार किया गया. पीएचक्यू से जघन्य अपराध पर्यवेक्षण यूनिट का प्रस्ताव गृह विभाग को भेजा गया.

अंजाम तक पहुंचाए जाएंगे राजस्थान के गुनाहगार, अपराधियों पर लगाम कसेगा खास यूनिट
प्रस्तावों में यूनिटों के गठन में पदों के साथ संसाधन भी मांगे गए हैं.

विष्णु शर्मा, जयपुर: प्रदेश में अब सनसनीखेज और जघन्य अपराध करने वाले गुनाहगारों को सजा के अंजाम तक पहुंचाया जाएगा. अब न केवल सनसनीखेज मामलों की त्वरित जांच होगी बल्कि कोर्ट में भी प्रभावी पैरवी की जाएगी. गंभीर अपराधों की अलग से मॉनिटरिंग के लिए जघन्य अपराध पर्यवेक्षण यूनिट  गठित की जाएगी. राज्य सरकार ने यूनिट के आदेश जारी कर दिए हैं. 

पिछले दिनों हुए अत्यंत गंभीर और सनसनीखेज अपराधों ने पूरे प्रदेश को दहलाकर रख दिया. इनमें कई मामलों के कारण तो प्रदेश के जनमानस में असुरक्षा की भावना तक उत्पन्न हो गई. लोग इन जघन्य अपराधों के कारण सहम गए. अमूमन गंभीर अपराध घटते हैं तो उनकी सही मॉनिटरिंग नहीं हो पाती है और जन मानस को शिकायत रहती है कि पुलिस इतने गंभीर मामलों में भी कार्रवाई नहीं कर रही लेकिन राजस्थान में अब ऐसा नहीं होगा क्योंकि अब सरकार ने इस मामले में खास यूनिट गठित कर दी है.

पुलिस कार्यप्रणाली पर उठे थे सवाल
प्रदेश के अलवर में थाने पर हमला, पति की मौजूदगी में युवती से गैंगरेप, जयपुर में छह वर्षीय मासूम से दुष्कर्म करने वाली घटनाओं ने प्रदेश को सहमा दिया था. पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाने लग गए थे. ऐसे जघन्य अपराधों में त्वरित और प्रभावी जांच की मॉनिटरिंग के लिए विशेष यूनिट पर विचार किया गया. पीएचक्यू से जघन्य अपराध पर्यवेक्षण यूनिट का प्रस्ताव गृह विभाग को भेजा गया. एक बार मनाही के बाद पीएचक्यू से दोबारा प्रस्ताव भेजा गया.
मुख्यमंत्री की सहमति के बाद खोली 

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की सहमति के बाद यूनिट गठन के आदेश जारी किए गए. गंभीर अपराध पर्यवेक्षण यूनिट पीएचक्यू के साथ जयपुर, जोधपुर, अजमेर, कोटा, उदयपुर, भरतपुर और बीकानेर में गठित की जाएगी. गृह विभाग से यूनिटों के गठन के प्रशासनिक एवं वित्तीय आदेश जारी कर दिए गए हैं. 

62 अस्थाई पदों की मंजूरी
यूनिट के लिए 62 अस्थाई पदों के सृजन की स्वीकृति दी है. इनमें राज्य स्तर पर 20 तथा रेंज यूनिटों के लिए 42 पद सृजित किए गए हैं. जघन्य अपराध पर्यवेक्षण यूनिट क्राइम ब्रांच के अधीन कार्य करेगी. पुलिस मुख्यालय में डीआईजी के नेतृत्व में काम करेगी. रेंज मुख्यालय पर एएसपी स्तर के अधिकारी मॉनिटरिंग करेंगे. पीएचक्यू स्तर पर एक डीआईजी, एक एसपी, तीन सीआई, दो एसआई, तीन हेड कांस्टेबल, पांच कांस्टेबल, 3 ड्राइवर, दो वरिष्ठ विधि अधिकारी के पद स्वीकृत. रेंज स्तर पर 7 एएसपी, 7 इंस्पेक्टर, 7 हेड कांस्टेबल, 14 कांस्टेबल, 7 ड्राइवर के पद सृजित किए हैं.

तीन वर्ष के लिए चयन
यह यूनिट अनुसंधान कार्य नहीं करेगी, केवल पर्यवेक्षण और मार्गदर्शन का कार्य करेगी. जनहित न्याय हित में केवल राज्य सरकार, डीजीपी और एडीजी क्राइम के द्वारा ही किसी भी प्रकरण का पर्यवेक्षण इन यूनिट को दिया जाएगा. इन यूनिट में पदस्थापन निर्धारित चयन प्रक्रिया के माध्यम से न्यूनतम 3 वर्ष के लिए किया जाएगा.

11 करोड़ का खर्च आएगा यूनिट पर
गृह विभाग ने यूनिट के लिए पदों की मंजूरी दे दी है, लेकिन संसाधनों के लिए बजट और पुलिस आधुनिकीकरण में प्रस्ताव भेजने के निर्देश दिए हैं. प्रस्तावों में यूनिटों के गठन में पदों के साथ संसाधन भी मांगे गए हैं. इनमें पुलिसकर्मियों की तनखवाह पर सालाना करीब 9 करोड़ रुपये खर्च होंगे, वहीं कार्यलय व अन्य संशोधन पर दो करोड़ रुपये खर्च होने की संभावना है. 

इन संसाधानों की मांग
- पुलिस मुख्यालय ने 4 स्कॉर्पियो, 13 एसयूवी या बोलेरो, 17 मोटरसाइिकलों की मांग की है.
- यूनिटों के लिए 13 लेपटॉप, 26 डेस्कटॉप कम्प्यूटर, 28 प्रिंटर, 42 स्मार्ट फोन, फर्नीचर की जरूरत बताई गई है.
- मुख्यालय स्तर पर यूनिट के लिए 6 कक्ष अधिकारियों के लिए तथा दो बड़े हॉल स्टाफ के लिए.
-रेंज स्तर पर यूनिटों के लिए 7 कार्यालय भवनों की जरूरत बताई
- वाहनों और फर्नीचर को पुलिस आधुनिकरण से लेने के निर्देश.