कोर्ट की 'तारीख पे तारीख' वाले रवैये से हाईकोर्ट के जज कंवलजीत सिंह भी हैं लाचार, बोले- 'कहां जाएं'

हाईकोर्ट के जज कंवलजीत सिंह ने कहा कि कोर्ट में समय से सुनवाई न होने के कारण आम लोग अदालतों में फरियाद करने से घबरा रहे हैं. 

कोर्ट की 'तारीख पे तारीख' वाले रवैये से हाईकोर्ट के जज कंवलजीत सिंह भी हैं लाचार, बोले- 'कहां जाएं'
उन्होंने कहा कि जज को सिखाने वाली बार है.

मुकेश सोनी, कोटा: राजस्थान हाईकोर्ट के न्यायाधीश व कोटा सम्भाग के प्रभारी कंवलजीत सिंह आहलूवालिया ने कोटा प्रवास के दौरान अभिभाषक परिषद की ओर से आयोजित अभिनन्दन समारोह में शनिवार को भाग लिया. इस दौरान उन्होंने कहा कि कोर्ट में समय से सुनवाई न होने के कारण आम लोग अदालतों में फरियाद करने से घबरा रहे हैं. क्योंकि सिविल कोर्ट में "तारीख पे तारीख" मिलती है.

कार्यक्रम के दौरान उन्होंने वकीलों को हर कदम पर साथ देने की बात भी कही. उन्होंने कहा, ''अच्छी बिल्डिंग बनाइए और आप अच्छी वर्किंग कंडीशन कीजिये. आपके काम के लिए जिसके पास चलना है, जहां चलना है मैं इसके लिए 24 घण्टे तैयार हूं.'' 

न्यायाधीश अहलुवालिया ने कहा, ''मेडिकल एजुकेशन के लिए सारे देश में कोटा का डंका बजता है, लेकिन यहां की बार का, अधिवक्ता संघ का, उसके विवेक, उसकी विद्वानता की देश में बात क्यों नहीं होती, मुझे इस बात की पीड़ा है.''

कोटा की अदालतों में सबसे ज्यादा मामले हैं लंबित

न्यायाधीश कंवलजीत सिंह आहलूवालिया ने कार्यक्रम के दौरान बताया कि सबसे ज्यादा लंबित मामले कोटा की अदालतों में है. अभी भी 10 साल से ज्यादा पुराने केस इसी कोर्ट में है. लेकिन क्रॉस एग्जामिनेशन में सबसे ज्यादा रेटिंग इसी कोर्ट की रही है.

उन्होंने कहा, ''जिस कोर्ट में एक मुकदमा निपटने में 10 साल लग जाता है, वहां लोग मुकदमा दायर करने नहीं आते. जिस कारण सिविल कोर्ट में दावा करने के लिए पक्षकार घबराता है की न्याय मिलेगा कि नहीं. इसी वजह से सिविल कोर्ट में आने वाले मुकदमों की संख्या कम हुई है. सिविल कोर्ट में जाने की बजाय पक्षकार यह सोचता है कि पुलिस थाने के एसएचओ के पास जा कर गूहार लगाउं. क्योंकि सिविल कोर्ट में "तारीख पे तारीख" मिलती है. ''

न्यायालय की गरिमा वकीलों पर निर्भर

इस दौरान कार्यक्रम में मौजूद वकीलों से उन्होंने कहा कि काम ज्यादा कीजिए गलत फैसला होगा, तो ठीक हो जाएगा पर लोगों को इंसाफ तो मिलेगा. आपकी इज्जत के साथ जज की इज्जत है, हमारे इंस्टिट्यूशन की गरिमा है, हम सब एक दूसरे की इज्जत बनाने वाले हैं. वहीं बार व बेंच के रिश्तों पर बोलते हुए जज कंवलजीत सिंह ने कहा कि हम जैसे लोग कहां से सीखते हैं? जज को सिखाने वाली बार है. बार ही जज की पहली टीचर होती है. प्यार से बात करेंगे तो आराम से सीखेगा, अगर तनातनी होगी कोई किसी से नहीं सीखता.