Year Ender 2019: योद्धा जो हिंद पर कुर्बान होकर अमर हो गए

जाते हुए साल में हमने एक चराग़ जलाया है. उन वीर शहीदों के नाम, जिन्होंने मुल्क पर हंसते-हंसते अपनी जान कुर्बान कर दी थी, जिन्होंने राजस्थान की शहादत की रवायत की तहरीर को लम्बा किया.  

Year Ender 2019: योद्धा जो हिंद पर कुर्बान होकर अमर हो गए
फाइल फोटो

जाते हुए साल में हमने एक चराग़ जलाया है. उन वीर शहीदों के नाम, जिन्होंने मुल्क पर हंसते-हंसते अपनी जान कुर्बान कर दी थी, जिन्होंने राजस्थान की शहादत की रवायत की तहरीर को लम्बा किया, जिन्होंने राजस्थान के लहू में शौर्य का जुनून भरा. इस खबर में हम राजस्थान के उन योद्धाओं के बारे में बता रहे हैं जो हिन्द पर कुर्बान होकर अमर हो गए.

14 फरवरी को पुलवामा में पाकिस्तान के पालतू आतंकियों ने बेखौफ सेना की गाड़ी पर हमला किया था. सेना की गाड़ी में 44 जवान सवार थे, 44 जवानों में से राजस्थान की माटी के 5 लालों ने मुल्क पर अपने प्राणों को न्यौछावर कर दिया था. इतिहास जबजब ज़ुल्म की तारीख पढ़ेगा पाकिस्तान को मुर्दा मुल्क लिखेगा.

शहीद हेमराज मीणा, कोटा
2019 का ये साल राजस्थान पर दर्द का पहाड़ बनकर टूटा था. इस तारीख ने राजस्थान की माटी को वीरों के लहू से लाल कर दिया था. 14 फरवरी की वो मनहूस तारीख जिस दिन  मरुधरा ने अपने 5 लाल खो दिए थे. पुलवामा हमले में कोटा के वीर हेमराज मीणा ने मुल्क लिए अपने प्राणों को न्यौछावर कर दिया था.

शहीद रोहिताश लांबा, जयपुर
14 फरवरी को पुलवामा में हुए हमले में जयपुर ने अपने लाल रोहिताश लांबा को खो दिया था.जयपुर ने अपने एक लाल को खोया था. अमरसर थाना इलाके के गोविंदपुरा बांसड़ी गांव में शहीद का घर है, यहां शौर्य रहता है, जज्बा रहता है, जुनून रहता है. हवाओं में बहती है शहीद के जज्बे की रवानी, ये शौर्य जब लहू में उतरता है. तो शहीद की विरांगना कहती है हमें गर्व है अपने पति की कुर्बानी पर है. अब हम अपने बेटे को हिन्द की सेना में भेजेंगे, जो दुश्मनों से अपने पिता का बदला लेगा.

शहीद भागीरथ कसाना, धौलपुर
धौलपुर के दिल में आज भी वतन के लिए कुर्बान हुए शहीद भागीरथ धड़कते हैं. इस जाते हुए साल में धौलपुर अपने बेटे को सलाम कर रहा है.  राजस्थान का धौलपुर आज भी सिसकता है. बिलखता है. जब भी अपने लाल को याद करता है. हिन्दुस्तान के दिल पर हमला कर दुश्मनों ने भारत मां के 44 बेटों को शहीद कर दिया था, जिसमें धौलपुर के जैतपुर गांव के भागीरथ कासान ने भी अपने जान को भारत मां के लिए कुर्बान कर दिया था.  

शहीद नारायण गुर्जर, राजसमंद
मां भारती के चरणों में अपने प्राणों को रखकर राजमंद का लाल तिरंगा ओढ़कर हमेशा के लिए सोया, तो भरतपुर का बेटे ने अपने मुल्क की खातिर अपने बदन का लहू निचोड़कर हिन्दुस्तान में राजस्थान के नाम शौर्य की ऐसी कहानी लिखी, जिसे हिन्दुस्तान हमेशा पढ़ता रहेगा. जसमन्द के बिनोल गांव के रहने वाले शहीद नारायण गुर्जर सीआरपीएफ की 118 बटालियन के जवान थे. नारायण अपने पीछे पत्नी और दो मासूम बच्चों को छोड़ गए हैं. कितनी अजीब बात है कि खुद नारायण  गुर्जर को भी पिता का प्यार नहीं मिला था, बचपन में उन्हे भी पिता का साया नसीब नहीं हुआ था. अब उनके बच्चे को भी अपने पिता का साया नसीब नहीं हुआ. शहीद नारायण 3 दिन पहले ही 15 दिन की छुट् टी बिताकर ड्यूटी पर लौटे थे.

शहीद जीतराम गुर्जर, भरतपुर
14 फरवरी को जब मुल्क अपनी-अपनी मोहब्बत का इजहार कर रहा था. तब मादर-ए-वतन का एक बेटा वतन की मोहब्बत पर कुर्बान हो रहा था. भरतपुर का लाल जीतराम गुर्जर ने हिन्द की हिफाज़त में अपने प्राणों को न्योछावर कर दिया. महज कुछ दिन पहले ही घर से छुट्टी बिताकर जीतराम गुर्जर ड्यूटी पर आए थे. पत्नी और बच्चों से सही फिर से लौटकर आने का वादा किया था, लेकिन जीतराम गुर्जर ने वतन की हिफाज़त के लिए अपनी जान को कुर्बान कर दिया. भरतपुर की धरती के लाल का शौर्य आज भी दुश्मनों का ये पैगाम देता है कि हिंद की माटी ने बुज़दिल बेटे नहीं पैदा किए हैं.

मरुधरा की माटी में राजस्थान के वीरों को लहू शामिल है. कण कण में वीरों को जनुनू घुला है. सरहदों ने जब जब अपने बेटों को आवाज़ दी है. राजस्थान के बेटे हथेली पर जान लेकर हाजिर हुए हैं. इसी साल झुंझुनू के तीन सपूतों ने सरहदों पर अपनी कुर्बानी लिखी है.  

शहीद श्योराम गुर्जर, झुंझुनूं
जंग कोई भी, हिन्दुस्तान की हर जंग में राजस्थान के बेटों ने अपनी जान दी है. इसी साल 2019 में झुंझुनू के तीन बेटों ने भारत मां की रक्षा में अपने जानें कुर्बान की थीं. खेतड़ी के टीबा गांव के रहने वाले श्योराम गुर्जर ने 18 फरवरी 2019 को ऑपरेशन रक्षक में आतंकवादियों से लोहा लेते हुए शहीद हो गए थे.

शहीद राजेंद्र सिंह, झुंझुनूं
03 दिसंबर 2019 को जम्मू कश्मीर के तंगधार में सीमा पर चौकसी करते हुए राजेंद्र सिंह हिमस्खलन से बर्फ में दबने से शहीद हो गए थे. बेटी अपने पिता की शहादत पर गर्व करती है.

शहीद रंजीत सिंह, झुंझुनूं
खेतड़ी के रंवा के रहने वाले रणजीत सिंह युद्धाभ्यास के दौरान शहीद हो गए थे. शहीद रंजीत 2010 में सेना में भर्ती हुए थे.