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राजस्थान: गुर्जर समाज में बढ़ी राजनीति, किरोडी बैंसला की पंचायत स्थगित

समाज के अहम की लड़ाई के बीच विरोधी गुट ने कर्नल साहब को संघर्ष समिति से बाहर कर दिया. जिसके बाद में किरोडी बैंसला ने सिंकदरा में 20 अप्रैल को पंचायत का ऐलान किया था

राजस्थान: गुर्जर समाज में बढ़ी राजनीति, किरोडी बैंसला की पंचायत स्थगित
अब लोकसभा चुनाव के बाद समाज की पंचायत होगी

जयपुर: बीजेपी नेता कर्नल किरोडी सिंह बैंसला को उनके विरोधी गुट द्वारा गुर्जर आरक्षण संघर्ष समिति से बाहर करने वाले बैंसला गुट ने 20 अप्रैल को सिंकदरा में गुर्जरों की एक पंचायत का ऐलान किया था. लेकिन अब प्रशासन द्वारा अनुमति नहीं मिलने का हवाला देते हुए गुर्जर पंचायत को स्थगित कर दिया गया है. वहीं दूसरी ओर हिम्मत सिंह यह दावा कर रहे है कि समाज की नाराजगी के डर से यह पंचायत स्थगित की गई है. प्रशासनिक अनुमति नहीं मिलना तो एक बहाना है.

अब तक कर्नल किरोडी सिंह बैंसला अपनी हुंकार के लिए जाने जाते थे. वह सरकार को उनके सामने घुटने टेकने को मजबूर कर देते थे. कर्नल बैंसला चलती ट्रेन को रोककर चक्का जाम कर देते थे. लेकिन खबरों के मुताबिक इस बार वह डर गए, वह सरकार या प्रशासन से नहीं बल्कि खुद के गुर्जर समाज से डर गए हैं. जब से पटरी बॉय बीजेपी बॉय बने है तब से उनकी मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही. लगातार दूसरे गुट के गुर्जर नेता सक्रिय होकर कर्नल साहब के खिलाफ मैदान में उतर गए है. 

एक तरफ लोकसभा चुनाव का महासंग्राम हो रहा है तो वहीं दूसरी ओर गुर्जर समाज की पॉलिटिक्स भी तेजी से आगे बढ़ रही है. समाज के अहम की लड़ाई के बीच विरोधी गुट ने कर्नल साहब को संघर्ष समिति से बाहर कर दिया. जिसके बाद में किरोडी बैंसला ने सिंकदरा में 20 अप्रैल को पंचायत का ऐलान किया था, लेकिन अचानक से इस पंचायत को स्थगित कर दिया गया और अब वजह ये बताई जा रही है कि प्रशासन ने पंचायत की स्वीकृति नहीं दी. उनके विरोध गुट हिम्मत सिंह ये दावा कर रहे है कि समाज की नाराजगी के डर के कारण पंचायत को स्थगित कर दिया गया.

ऐसे में अब क्या वाकई कर्नल किरोडी बैंसला को समाज का डर सता रहा है. हालांकि बैंसला गुट के गुर्जर नेता शैलेंद्र सिंह ने दावा किया है कि प्रशासन की स्वीकृति नहीं मिलने के कारण पंचायत को स्थगित किया गया है. एसडीएम ने आचार सहिंता के कारण पंचायत की स्वीकृति नहीं दी. अब लोकसभा चुनाव के बाद समाज की पंचायत होगी. 

उनका ये भी कहना है कि हिम्मत सिंह को खुद को समाज ने संघर्ष समिति से निष्कासित कर दिया था, ऐसे में हिम्मत सिंह हमे बर्खास्त करने वाले होते कौन है. कर्नल किरोडी बैंसला ही आरक्षण संघर्ष समिति के मुखिया बनें रहेंगे और जरूरत पडने पर सरकार से भी वार्ता करेंगे. अब दोनों गुटों में किससे दावे सच है ये तो समाज ही बताएगा, लेकिन इतना जरूर तय है कि गुर्जर नेताओं की गुटबाजी से समाज के युवाओं पर इसका गलत प्रभाव पड रहा है.