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जयपुर: यात्रियों को बेहतर सुविधाएं देने में फेल लो फ्लोर बसें, मैनेजमेंट से परेशान लोग

सांगानेर, विद्याधर नगर, टोडी तीनों डिपो की बात करें तो रोज 50 से अधिक बसें राजधानी की सड़कों पर खड़ी रहती हैं. ऐसे में जेसीटीएसएल की बसों के बेड़े में भी कमी आ रही है.

जयपुर: यात्रियों को बेहतर सुविधाएं देने में फेल लो फ्लोर बसें, मैनेजमेंट से परेशान लोग
फाइल फोटो

जयपुर: राजस्थान की राजधानी जयपुर में अब लो-फ्लोर बसों की हालत काफी खराब होती जा रही है. इसमें बैठने से पहले थोडा चौकन्ना रहना होगा. दौड़ती लो फ्लोर बसों में आए दिन आग लग रही है. ऐसे में यात्रियों की जान जोखिम में आ रही है. बसों में समय पर मेंटेनेंस नहीं होने के कारण पिछले महीनों से लगातार आग लगने की घटनाएं सामने आ रही हैं. वहीं चलती हुई बसें खराब होकर सड़कों पर खड़ी हो रही हैं. 

सांगानेर, विद्याधर नगर, टोडी तीनों डिपो की बात करें तो रोज 50 से अधिक बसें राजधानी की सड़कों पर खड़ी रहती हैं. ऐसे में जेसीटीएसएल की बसों के बेड़े में भी कमी आ रही है. बसों की कमी होने के कारण यात्रियों के सफर में कैंची चलाई जा रही है. प्रबंधन की ओर से बसों का संचालन करने वाली मातेश्वरी कंपनी को हर महीने तकरीबन एक करोड़ से अधिक रूपए का भुगतान किया जा रहा है.

इसके बाद भी बसों की देखरेख में लापरवाही की जा रही है. जयपुर में पिछले महीने बसों में आग की स्थिति की बात करें तो सबसे ज्यादा विद्याधर नगर की बसों में आग लगी है. डिपो में इन बसों की खरीद 2013 में की गई थी. 6 साल में ही मेंटेनेंस नहीं होने से बसें खराब स्थिति में आ गई हैं. यहां की 20 बसें रोज ब्रेक डाउन हो रही हैं. तो इंजन में आग लग रही है. इधर सांगानेर में सभी बसें खराब हो चुकी हैं. पिछले महीने की बात करें तो दुर्गापुरा में बस संख्या 4376, मानसरोवर में 8068 में आग लगी थी. इधर मानसरोवर मेट्रों स्टेशन के पास पिछले महीने ही लो फ्लोर बस के टायर मे आग लग गई थी.

शहर की सांगानेर डिपो में भले ही लो फ्लोर बसें अवधिपार हो गई हैं. प्रबंधन ने उन्हें मजबूरन कंडम घोषित कर दिया लेकिन विद्याधर नगर और टोडी डिपो में नई बसों की भी हालात दयनीय हो गई है. 2017 और 2013 में आई बसें चलने लायक नहीं रहीं. निजी फर्म मातेश्वरी की ओर से मेंटेनेंस नहीं करने से बसें ऑफ रूट हो गई हैं. आधा दर्जन रूट बंद कर दिए गए हैं. नई एसी बसों के टायर खुल गए. इस तरह से शहर में बसों के संचालन की व्यवस्था डगमगा गई है.