जयपुर: पानी की कालाबाजारी पर रोक के लिए जलदाय विभाग का बड़ा कदम, बदला OTP सिस्टम

जलदाय विभाग ने पानी की चोरी रोकने के लिए ओटीपी सिस्टम लागू किया था, जिसमें उपभोक्ता की शिकायत के बाद में ओटीपी नंबर उपभोक्ता के नंबर पर पहुंचने के बाद ही पानी डाला जाता था

जयपुर: पानी की कालाबाजारी पर रोक के लिए जलदाय विभाग का बड़ा कदम, बदला OTP सिस्टम
अब सिस्टम बदलने के बाद ओटीपी नंबर सिर्फ उपभोक्ता ही देख सकता है.

जयपुर/ आशीष चौहान: राजस्थान की राजधानी जयपुर में टैंकर्स की कालाबजारी के खुलासे के बाद जलदाय विभाग ने अपने ओटीपी सिस्टम को बदल दिया. ओटीपी सिस्टम बदलने के का कारण पानी की कालाबजारी को रोकना है. ताकि उपभोक्ता तक पानी पहुंचाया जा सके. पानी की इस कालाबजारी का खुलासा जी मीडिया द्वारा एक स्टिंग ऑपरेशन कर किया गया था. जिसके बाद अधिकारियों ने सिस्टम को बदलने के आदेश दिए थे. 

कैमरे में पानी की कालाबाजारी का सच कैद होते ही जैसे जलदाय विभाग के अधिकारियों के होश उड़ गए. पानी की कालाबाजारी का पूरे जयपुर शहर में खुलेआम खेल चल रहा था, लेकिन इसके बावजूद अधिकारियों को भनक तक नहीं हुई. जी मीडिया ने खुलासा किया तो अधिकारी सोच में डूब गए कि जीपीएस सिस्टम और ओटीपी सिस्टम के बावजूद भी पानी की चोरी कैसे हो गई है. सिस्टम खंगाला तो पता लगा कि ओटीपी सिस्टम में ही खोट है. ओटीपी सिस्टम को बदलने के लिए तत्काल प्रभाव से आदेश दिए गए.

जिस सिस्टम को लगाया, वहीं चोरी कर रहा पानी
जलदाय विभाग ने पानी की चोरी रोकने के लिए ओटीपी सिस्टम लागू किया था, जिसमें उपभोक्ता की शिकायत के बाद में ओटीपी नंबर उपभोक्ता के नंबर पर पहुंचने के बाद ही पानी डाला जाता था लेकिन इसके साथ साथ सभी टैंकर्स में जीपीएस सिस्टम लगा हुआ होता है. जिससे टैंकर की लाइव लोकेशन का पता चल जाता है. लेकिन जलदाय विभाग में कम्प्यूटर आपरेशन ओटीपी नंबर देख सकता था, जिसके कारण पानी का कालाबाजारी का खेल चल रहा था. जिसमें अधिकारियों की मिलीभगत होती थी. इसके साथ साथ ठेकेदार भी पानी चोरी में शामिल होता था. कम्प्यूटर आपरेटर को इसलिए छूट दी गई थी ताकि उपभोक्ताओं को सहूलियत रहे. कभी उपभोक्ता फोन ना उठाए या कभी बाहर चले जाए तो कम्प्यूटर आपरेटर टैंकर चालक को ओटीपी नंबर देकर पानी की सप्लाई की कालाबाजारी कर देता था.

अब ओटीपी नंबर सिर्फ उपभोक्ता देख सकेगा 
अब सिस्टम बदलने के बाद ओटीपी नंबर सिर्फ उपभोक्ता ही देख सकता है. अब कम्प्यूटर आपरेटर इस सिस्टम से बिल्कुल भी जुडा हुआ नहीं है. जाहिर है इस सिस्टम से पानी की चोरी तो रूकेगी, लेकिन पूरी तरह से लगाम नहीं लग पाएगी. पानी की चोरी पर लगाम तो जलदाय विभाग ने लगा दी, लेकिन उन अधिकारियों का क्या जिन्होने रिश्वत लेते हुए पानी का काला खेल खेला. अब सवाल ये खड़े हो चले हैं कि इतने बड़े खुलासे के बावजूद भी दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई क्यो नहीं हुई.