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जालौर: सैलरी के लिए सड़कों पर उतरने की तैयारी में स्वास्थ्य केंद्र के कर्मचारी

जालौर जिले के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के चिकित्सक ने पिछले 3 महीने से वेतन नहीं मिलने का हवाला देते हुए मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी जालौर को पत्र लिखा है

जालौर: सैलरी के लिए सड़कों पर उतरने की तैयारी में स्वास्थ्य केंद्र के कर्मचारी
उन्होने अपने खाते का बैलेंस एक रूपया 77 पैसे होने की बात भी कही है

जालौर: प्रदेश के जालौर जिले के रानीवाड़ा और भीनमाल ब्लॉक में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य महकमे में कार्यरत कर्मचारियों एवं चिकित्सकों को वेतन समय पर नहीं मिलने से परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. हालात यहां तक पहुंच गए हैं कि करड़ा में सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र के प्रभारी धनंजय मीणा ने सरकार को पत्र लिखकर अवांछनीय वांछनीय कदम उठाने की चेतावनी दे दी है.

मामला जालौर जिले के करडा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का है जहां के चिकित्सक ने पिछले 3 महीने से वेतन नहीं मिलने का हवाला देते हुए मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी जालौर को पत्र लिखा है. जिसमें उन्होने बताया है कि वह जिला मुख्यालय पर होने वाले कार्यक्रमों में भाग नहीं ले सकते, इसका कारण उन्होने आर्थिक परेशानी बताया. साथ ही उन्होने अपने खाते का बैलेंस एक रूपया 77 पैसे होने की बात भी कही. उन्होने कहा कि इतने पैसे से जहर भी नहीं खरीदा जा सकता. चिकित्सा अधिकारी ने अपने पत्र की कॉपी राज्यपाल और मुख्यमंत्री के नाम भी भेजा है.

वहीं मामले को लेकर रानीवाड़ा के ब्लॉक सीएमएचओ नए बजट का हवाला देते हुए पत्र का जवाब भी दिया है. देखा जाए तो वेतन नहीं मिलने के हालात करडा सीएससी सहित रानीवाड़ा के व भीनमाल ब्लॉक के अधिकतर चिकित्सकों का वेतन पिछले 3 महीने से नहीं हो रहा है. ऐसे में इन कर्मचारियों एवं अधिकारियों को आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है.

भीनमाल के धुम्बडिया के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के कर्मचारियों व अधिकारियों के भी यही हालात हैं. जहां पिछले 3 महीने से उनको वेतन नहीं मिल रहा. कर्मचारियों का कहना है कि जब भी भीनमाल ब्लॉक कार्यालय में वेतन संबंधी मांग की जाती है तो बजट का हवाला देकर टरका दिया जाता है. डॉक्टर धनंजय मीणा ने बताया कि उसको सैलरी नहीं मिलने की वजह से कई प्रकार की घरेलु परेशानियों का सामन करना पड़ रहा है. डॉक्टर का कहना है कि पैसों के अभाव में राशन के सामान के लिए भी मशक्कत करनी पड़ रही है. 

डॉक्टर के अनुसार उनके पर्सनल लोन की किस्त भी ओवरडूयू हो चुकी है. डॉक्टर ने बताया कि उसके साथ साथ उसके अस्पताल में कार्यरत सभी स्टाफ की पिछले दो महीने से सैलरी नहीं बनी है जिसके चलते सभी को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. ऐसे में अब देखने वाली बात होगी कि इन विकट आर्थिक परिस्थितियों से गुजर रहे डॉक्टरों की मांग को लेकर सरकार कितनी गंभीर होगी और कितने दिनों में इनको सैलरी मिल पाएंगी.