जोधपुर में टाउन वेंडिंग कमेटी के बाद भी कम नहीं हुई ठेला चालकों की मुश्किल

हाथ ठेला यूनियन के संगठनों से जुड़े ओम देवड़ा ने बताया कि जोधपुर शहर में टाउन वेंडिंग कमेटी के बाद अलग-अलग स्थानों पर वेंडिंग ओर नॉन वेंडिंग जोन को चिन्हित करने का निर्णय लिया गया था. 

जोधपुर में टाउन वेंडिंग कमेटी के बाद भी कम नहीं हुई ठेला चालकों की मुश्किल
प्रतीकात्मक तस्वीर

जोधपुर: शहर में हजारों ठेला चालक ऐसे हैं जो अपनी आजीविका कमाने के लिए ठेला चलाते हैं. इस दौरान उन्हें कई तरह की परेशानियों का भी सामना करना पड़ता है. देशभर के ठेला चालकों को इसी तरह की परेशानियों को रूबरू होना पड़ता था. इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने हर निकाय स्तर पर टाउन वेंडिंग कमेटी बनाकर शहर में वेंडिंग और नॉन वेंडिंग जोन बनाने के निर्देश दिए थे. 

कई शहरों में यह आदेश कारगर साबित हुए लेकिन राजस्थान प्रदेश के दूसरे बड़े शहर जोधपुर में आज भी सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की पालना नहीं हो रही है. न्यायालय के आदेशों की अनुपालना में नगर निगम की ओर से करीब 4 साल पहले टाउन वेंडिंग कमेटी का गठन किया गया लेकिन कमेटियों की नियमित बैठक नहीं होने और बैठकों में हुए निर्णयों की अनुपालना नहीं होने से यह टाउन वेंडिंग कमेटी महज कागजों में साबित हो रही है. 

हाथ ठेला यूनियन के संगठनों से जुड़े ओम देवड़ा ने बताया कि जोधपुर शहर में टाउन वेंडिंग कमेटी के बाद अलग-अलग स्थानों पर वेंडिंग ओर नॉन वेंडिंग जोन को चिन्हित करने का निर्णय लिया गया था. साथ ही ठेला चालकों के लिए परिचय पत्र बनवाने का भी प्रस्ताव दिया गया लेकिन अभी तक इन प्रस्तावों पर कार्य नहीं हुआ है. उन्होंने बताया कि निगम की लापरवाही के चलते ठेला चालकों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है. वहीं कई पूंजीपति लोग बड़े-बड़े फूड वेन लगाकर धड़ल्ले से व्यवसाय कर रहे हैं. उन्हें कोई रोक-टोक नहीं की जा रही.

वहीं महापौर घनश्याम ओझा ने बताया कि कमेटी के गठन के बाद नगर निगम की ओर से कई निर्णय लिए गए थे. कमेटी के निर्णय के आधार पर सभी हाथ ठेला चालकों का सर्वे करवाया गया. शहर में लगभग 8000 ठेला चालक है जो अपना व्यवसाय चलाते हैं. ठेला चालकों के लिए अब तक लगभग 200 वेंडिंग और नॉन वेंडिंग जोन चिन्हित कर लिए गए हैं. शहर की मुख्य सड़कों को नॉन वेंडिंग जोन में रखा गया है ताकि यातायात बाधित नहीं हो. महापोर ओझा ने बताया कि आचार संहिता लगने के कारण इस कार्य में थोड़ी देरी हुई है लेकिन अगले 2 महीने के भीतर सभी ठेला चालकों को परिचय पत्र एवं अनुजा पत्र जारी कर दिए जाएंगे.

साइन ऑफ जोधपुर में टाउन वेंडिंग कमेटी के नियमों की पालना नहीं होने पर ठेला चालकों को व्यवसाय करना काफी मुश्किल हो रहा है. आए दिन उन्हें पुलिस, निगम और अन्य सरकारी एजेंसियों के अधिकारियों की प्रताड़ना का शिकार होना पड़ता है. ऐसे में अब देखना होगा कि नगर निगम की ओर से कब तक सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की पालना हो पाती है और कब यह हाथ ठेला चालक स्वतंत्र तरीके से अपना व्यवसाय शुरू कर पाते हैं.