अभिभावकों के हित को ध्यान में रखकर फीस मामले में सरकार कोर्ट में रखेगी पक्ष: डोटासरा

डोटासरा ने कहा कि कोरोना के चलते प्रदेश में पिछले 6 महीने से बंद हैं. ऐसे में ऑनलाइन पढ़ाई के नाम पर अभिभावकों से फीस वसूल नहीं की जा सकती.

अभिभावकों के हित को ध्यान में रखकर फीस मामले में सरकार कोर्ट में रखेगी पक्ष: डोटासरा
डोटासरा ने कहा एकलपीठ ने निजी स्कूलों को फीस लेने का हकदार माना है.

जयपुर: निजी स्कूलों (Private School) और अभिभावकों के बीच फीस को लेकर चला आ रहा विवाद रुकने के नाम नहीं ले रहा है. 7 सितंबर को हाईकोर्ट (High Court) ने निजी स्कूलों के पक्ष में फैसला लेते हुए ट्यूशन फीस का 70 फीसदी हिस्सा भुगतान के आदेश दिए.

इसके बाद से ही निजी स्कूलों ने फीस को लेकर दबाव बनाना शुरू किया. निजी स्कूलों की मनमानी के खिलाफ अभिभावकों की ओर से हाईकोर्ट की खंडपीठ में चुनौती दी गई. जिसमें राजस्थान की अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) सरकार ने भी पक्षकार बनने की याचिका लगाई.

सरकार की ओर से लगाई गई याचिका पर पीसीसी चीफ (PCC) और शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा (Govind Singh Dotasara) ने कहा कि कोरोना (Corona) के चलते प्रदेश में पिछले 6 महीने से बंद हैं. ऐसे में ऑनलाइन पढ़ाई (Online Study) के नाम पर अभिभावकों से फीस वसूल नहीं की जा सकती. ऐसी कई शिकायत मिली और उनके निस्तारण भी किया गया.'

डोटासरा ने कहा, 'एकलपीठ ने निजी स्कूलों को फीस लेने का हकदार माना है, जिसको अभिभावकों ने चुनौती दी है. अगली सुनवाई में हाईकोर्ट में अभिभावकों के हितों को ध्यान में रखते हुए सरकार की ओर से पक्ष रखा जाएगा.' दरअसल, कोरोना आने के कारण स्कूल लॉकडाउन की वजह से लंबे समय से बंद थे. हालांकि, अनलॉक में अब कक्षा 9 से 12 तक कुछ शर्तों के साथ स्कूल खोलने की अनुमति केंद्र ने दी है. लेकिन अभिभावक फीस का विरोध कर रहे हैं.

अभिभावकों का कहना है कि जब इतने लंबे समय तक स्कूल बंद था तो किस बात की फीस मांगी जा रही है. जबकि लॉकडाउन के कारण उनके व्यवसाय पर बुरा असर पड़ा है. वहीं, अभिभावकों का कहना है कि ऑनलाइन क्लास में बहुत बच्चों को कुछ समझ में नहीं आया है. ऐसे में स्कूल अब फीस के नाम पर मनमानी करने पर तूले हैं.