कोटा: कुपोषण को लेकर सरकार ने कसी कमर, आंगनबाड़ी केन्द्र में मिलेगा उटनी का दूध

जिला प्रशासन की ओर से ऊंटनी के दूध का इंतजाम करने के लिए अमूल से सम्पर्क किया गया है. अमूल की ओर से दो सौ एमएल के पैकिट में दूध उपलब्ध कराया जाएगा.

कोटा: कुपोषण को लेकर सरकार ने कसी कमर, आंगनबाड़ी केन्द्र में मिलेगा उटनी का दूध
आंगनबाड़ी में कुपोषित बच्चों को उंटनी का दूध देकर कुपोषण मिटाया जाएगा.

राम मेहता/बारां: राजस्थान का बारां जिला कुपोषण के कारण हमेशा प्रदेश में बच्चों की मौत को लेकर चर्चा में रहता है. इसी के कारण अब प्रदेश के सरकार ने इस संभाग से कुपोषण को मिटाने का संकल्प लिया है. कुपोषण से निजात के लिए सरकार अब एक नया नवाचार करने जा रही है जिसमें आंगनबाड़ी में कुपोषित बच्चों को उंटनी का दूध देकर कुपोषण मिटाया जाएगा. 

खबर के मुताबिक, बारां जिला प्रशासन व महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से जिले के आदिवासी सहरिया क्षेत्र के बच्चों को पोषाहार के रूप में ऊंटनी का दूध दिया जाएगा. यह दूध पीने से बच्चों में नाटापन की समस्या से निजात मिलेगी. इसके अलावा बच्चों को कुपोषण की स्थिति से निकालकर सेहतमंद बनाने में मदद मिलेगी. फिलहाल, वर्तमान बारां जिले में आंगनबाड़ी केन्द्रों पर कुपोषित बच्चों को गर्म पोषाहार के रूप में खिचड़ी व दलिया तथा सप्ताह में एक बार बेबी मिक्स दिया जा रहा है. जिसके परिणाम अच्छें नही मिल रहे हैं.

वहीं, अब जिला प्रशासन की ओर से ऊंटनी के दूध का इंतजाम करने के लिए अमूल से सम्पर्क किया गया है. अमूल की ओर से दो सौ एमएल के पैकिट में दूध उपलब्ध कराया जाएगा. एक पैकिट दो बच्चों को दिया जाएगा. इससे प्रत्येक बच्चे को सौ-सौ एमएल दूघ उपलब्ध होगा. अमूल की ओर से यह दूध 80 रुपए प्रति लीटर की दर से उपलब्ध कराया जाता है लेकिन इस प्रस्ताव पर उनकी ओर से एक रुपए कम में दूध देने का भरोसा दिया गया है.

साथ ही, आदिवासी क्षेत्र गर्भवती महिलाओं व धात्री महिलाओं की सेहत सुधारने के लिए भी उनको दिए जा रहे पोषण में बदलाव कर लड्डू के रूप में दिए जाने के प्रस्ताव भेजे हुए हैं. वहीं, सब्जी बनाने के लिए लोहे की कड़ाही भी दी जायेगी. जिससें की महिलाओं को आयरन की पूर्ति हो सकेगी.

जिला कलेक्टर इन्द्र सिंह राव का कहना है बारां जिलें के किशनगंज ओर शाहाबाद क्षेत्र में एक सर्व कराया गया जहां पर 1095 कुपोषित बच्चें है जिनकी हेल्थ सुधारने के लिए अब गुजरात के कच्च के रण की उंटनी का दूध अमूल कम्पनी के माध्यम से सफ्लाई करेगा. 200 एमएल का पैकेटें जिसमें एक बच्चें को 100 एमएल दूध आंगनबाडी केन्द्र पर देगें. यह दूध तीन माह तक खराब नहीं होता है.

वहीं, बारां जिलें के आदिवासी क्षेत्र के किशनगंज ओर शाहाबाद में की धात्री महिलाओं 3227 महिला को ईडीएस के पैकेट दिए जाएंगे. साथ ही महिलाओं को आवंला कैंडी भी दी जाएगी. सेहत बढ़ाने के लिए हरी सब्जी के लिए महिलाओं को सब्जी के 4-4 बीजों के पेकेट दिए जाएंगे जिससे की घर में ही सब्जी उगाई जा सके.

इस तरह से बारां जिलें के आदिवासी क्षेत्र के कुपोषित बच्चों ओर धात्री महिलाओं के सेहत पर 8 करोड की राशि खर्च की जाएगी. देखने वाली बात है की देश भर में कुपोषण को लेकर चर्चा में रहता वाले बारां जिले से कुपोषण का कलंक कब मिटता है.