इन कोरोना वॉरियर्स पर नहीं गया किसी का ध्यान, जान दांव पर लगाकर कर रहे काम

जब हॉकर्स अपने घर से निकलते हैं तो परिजन इनकी सलामती की दुआ करते हैं और ख्याल रखने की भी बात कहते हैं.

इन कोरोना वॉरियर्स पर नहीं गया किसी का ध्यान, जान दांव पर लगाकर कर रहे काम
असली हीरो तो हमारे हॉकर्स हैं, जिन्हें कोई वॉरियर्स नहीं मानता.

जयपुर: दो महीने से कोरोना महामारी के चलते लॉकडाउन में अपना घर चलाने और आपके घर का चूल्हा जलाने के लिए जयपुर की चारदीवारी क्षेत्र में अपनी जान दांव पर लगाकर करीब 120 हॉकर्स सिर्फ 29 रुपये प्रति सिलेंडर मिलने वाली कमाई के लिए 3 हजार घरों पर सिलेंडर सप्लाई का काम कर रहे हैं. 

जब हॉकर्स अपने घर से निकलते हैं तो परिजन इनकी सलामती की दुआ करते हैं और ख्याल रखने की भी बात कहते हैं लेकिन इन हॉकर्स को दूसरे के घरों के चूल्हे भी जलाने की चिंता है. इनके जज्बे को सलाम है, यदि यह नहीं होते तो शायद चारदीवारी में गैस की किल्लत आ जाती. घरों में चूल्हे नहीं जलते. लेकिन इनके हौसले और जज्बे ने हॉटस्पॉट बन चुके चारदीवारी क्षेत्र में हर घर तक सिलेंडर पहुंचाया, जिससे कि वह घर का चूल्हा जला सके और अपने परिवार के साथ खाना खा सके और घरों से बाहर नहीं निकले.

रामलाल, मोहन, महेश, प्यारेलाल सहित करीब 120 हॉकर्स इन दिनों उस इलाके की हर घर की दहलीज पर जाने का काम कर रहे हैं, जिस जगह का नाम सुनने से लोगों को डर लगने लगा है और उस समय जब पूरा देश लॉक है, लोग घरों के अंदर हैं, बाजार बंद हैं लेकिन ये अपने परिवार को घरों में लॉक कर खुद अपनी बखूबी जिम्मेदारी निभा रहे हैं और सिर्फ आपके लिए. जयपुर शहर में चारदीवारी क्षेत्र में दो माह से कोरोना पॉजिटिव केसों की संख्या ज्यादा आने से पूरे इलाके में कर्फ्यू लगा दिया गया. डोर टू डोर राशन सामग्री से लेकर सिलेंडर, दूध सप्लाई सिस्टम की चैन बनाई गई. इनमें से एक हैं हर घर की रसोई तक सिलेंडर पहुंचाने वाला हॉकर.

1 दिन में 3000 घरों तक एलपीजी की सप्लाई 
चारदीवारी क्षेत्र में करीब 80 हजार से ज्यादा एलपीजी उपभोक्ता हैं. इनमें घर-घर सिलेंडर पहुंचाने का काम करते हैं हॉकर यानी कि 1 दिन में 3000 घरों तक एलपीजी की सप्लाई की जाती है. एक हॉकर के इन दिनों प्रतिदिन 20 से 25 घरों तक सिलेंडर पहुंचाने का काम करता है. यदि हॉकर गैस सिलेंडर गोदाम से ले जाकर उपभोक्ता तक पहुंचाता है तो उसे प्रति सिलेंडर 29 रुपये और डिस्ट्रीब्यूशन पॉइन्ट से ले जाता है तो 20 रुपये प्रति सिलेंडर उसे मिलता है, जिससे उसकी प्रतिदिन 500 से 600 रुपये की कमाई हो जाती है. इससे वो आपके घर का चूल्हा जलाता के बाद अपने परिवार का पेट भरता है.

कोई वॉरियर्स नहीं मानता
राजस्थान एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटर एसोसिएशन महासचिव कार्तिकय गौड़ का कहना है कि इस कोरोना काल में हर किसी को वॉरियर्स का तमगा दिया जा रहा है. लेकिन असली हीरो तो हमारे हॉकर्स हैं, जिन्हें कोई वॉरियर्स नहीं मानता. लेकिन यह वॉरियर्स प्रदेश भर में इस संकट काल में लोगों के घर के चूल्हे जलाने का काम कर रहे हैं. जब यह किसी की दहलीज पर एलपीजी सिलेंडर लेकर पहुंचते हैं तो सबसे पहले उसकी घंटी बजाते हैं. 

उपभोक्ता बाहर आता है. डायरी देता है. हॉकर्स उससे पैसे लेता है. डायरी में एंट्री करता है और न जाने कितने लोगों से संपर्क में आता है. उसे भी कोरोना का खतरा है. उसे भी अपनी जान और परिवार प्यारा है लेकिन फिर भी वह डटकर मुकाबला कर रहा है और अपनी जिम्मेदारी को बखूबी निभा रहा है. गैस एजेंसी संचालक के द्वारा अपने-अपने हॉकर्स को सैनिटाइजर, साबुन, ग्लब्स और मास्क दिए जा रहे हैं जिससे कि वह अपनी सेफ्टी रख सकें.