गुमनामी में खो रही ट्रैक साइकिलिंग, नेशनल स्तर पर राजस्थान का खराब प्रदर्शन जारी!

सालों से इस खेल से जुड़े हुए और राजस्थान के लिए राष्ट्रीय स्तर पर कई पदक प्राप्त कर चुके खिलाड़ियों की समस्या है कि खत्म होने का नाम ही नहीं लेती है.

गुमनामी में खो रही ट्रैक साइकिलिंग, नेशनल स्तर पर राजस्थान का खराब प्रदर्शन जारी!
ये वो ही ट्रैक साइकिलिंग है, जिसने वर्ल्ड चैंपियनशिप में झंडे गाड़े हैं.

जयपुर: एक साल पहले राजधानी जयपुर में ट्रैक साइकिलिंग (Track cycling) की नेशनल प्रतियोगिता आयोजित हुई. इस नेशनल प्रतियोगिता में राजस्थान (Rajasthan) 1 गोल्ड और दो सिल्वर के साथ सबसे खराब प्रदर्शन के साथ अंक तालिका में सबसे नीचे नजर आई. 

साथ ही राजस्थान में सुविधाओं की भारी कमी भी उजागर हुई लेकिन एक साल बीत जाने के बाद भी हालात जस के तस बने हुए हैं. खिलाड़ियों के पास न प्रैक्टिस के लिए वैलोड्रम की व्यवस्था है और न ही मेडल प्राप्त करने पर ईनामी राशि. ऐसे में इन खिलाड़ियों को हर दिन समस्याओं से दो-दो हाथ होना पड़ता है.

ट्रैक साइकिलिंग का जब नाम आता है तो अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भारत की अलग ही पहचान नजर आती है. ये वो ही ट्रैक साइकिलिंग है, जिसने वर्ल्ड चैंपियनशिप में झंडे गाड़े हैं. भारतीय पुरुष और महिला वर्ग की चाहे सीनियर टीमें हों या फिर जूनियर टीम, हर टीम ने देश का गौरव बढ़ाया है. सालों से भारत का नाम रोशन करने वाला ये खेल राजस्थान में गुमनामी का शिकार हो रहा है. राष्ट्रीय स्तर की जब बात आती है तो कुछ गिने-चुने नाम ही सामने आते हैं. ऐसे में अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर तो राजस्थान के खिलाड़ियों का नाम दूर-दूर तक नजर नहीं आता है.

पिछले साल भी रहा था खराब प्रदर्शन
पिछले साल राजस्थान की झोली में आया था महज एक गोल्ड.
राजस्थान में न प्रैक्टिस के लिए वैलोड्रम और न ही सरकार का ध्यान.
पदक विजेताओं को भी सालों से ईमानी राशि का इंतजार.
टीए-डीए के लिए भी सालों तक खिलाड़ियों को करना पड़ता इंतजार.

खराब हालात में हैं वैलोड्रम 
ट्रैक साइकिलिंग की बात की जाए, तो बीकानेर से सबसे ज्यादा खिलाड़ी इस खेल में अपना जौहर दिखाते हुए नजर आते हैं लेकिन अब बीकानेर में इस खेल का रुझान कम होता जा रहा है. इसकी वजह है बीकानेर में वैलोड्रम का जर्जर होना और जयपुर में वैलोड्रम में प्रैक्टिस के लिए ये खिलाड़ी पहुंच नहीं पाते हैं. पूरे राजस्थान में एक मात्र वैलोड्रम जयपुर में है और इसके हालात भी कुछ ज्यादा संतोषजनक नहीं हैं.

खेल से दूर हो रहे खिलाड़ी
दो साल पहले जयपुर स्थित वैलोड्रम को तोड़ने तक के आदेश जारी हो चुके थे लेकिन उस समय राजस्थान साइकिलिंग एसोसिएशन ने संघर्ष कर इस वैलोड्रम को बचाने में कामयाबी हासिल की लेकिन दो साल बाद भी एसोसिएशन इस खेल को आगे ले जाने में कामयाब नहीं हो पाया है. भारतीय साइकिलिंग कोच दयाला राम चौधरी का कहना है कि ट्रैक साइकिलिंग में राजस्थान के खिलाड़ियों का बहुत ज्यादा रुझान है लेकिन सुविधाओं के अभाव में खिलाड़ी इस खेल से दूर हो रहे हैं हालांकि पिछले कुछ सालों से राजस्थान के इस खेल को बढ़ावा जरुर मिला है लेकिन वो पर्याप्त नजर नहीं आ रहा है.

सरकार से कई बार की गई इस बारे में बात
दो साल पहले जब राजस्थान साइकिलिंग एसोसिएशन बनी, उस समय एसोसिएशन के सामने बहुत बड़ी चुनौती थी कि इस खेल को कैसे बचाया जाए? खेल को बचाने को लेकर एसोसिएशन सचिव ओपी विश्वकर्मा का कहना है कि फिलहाल राजस्थान में एक ही वैलोड्रम है. बीकानेर के वैलोड्रम अब खेल के स्तर का बचा नहीं है. ऐसे में बीकानेर के वैलोड्रम को फिर से सही करवाने और खिलाड़ियों को ज्यादा से ज्यादा इस खेल से जोड़ने की लगातार कोशिश जारी है. सरकार से भी कई बार इस संबंध में बात की गई है.

क्या कहना है खिलाड़ियों का
सालों से इस खेल से जुड़े हुए और राजस्थान के लिए राष्ट्रीय स्तर पर कई पदक प्राप्त कर चुके खिलाड़ियों की समस्या है कि खत्म होने का नाम ही नहीं लेती है. खिलाड़ियों के पास प्रैक्टिस के लिए वैलोड्रम की सुविधा नहीं है तो वहीं प्रतियोगिता के लिए भी उनको खुद के जैब से खर्च करना पड़ता है. ऐसे में टीए-डीओ और ईनामी राशि के लिए भी खिलाड़ियों को सालों तक इंतजार करना पड़ता है. 

ट्रैक साइकिलिंग के खिलाड़ियों का कहना है कि बीकानेर का वैलोड्रम खराब हो चुका है और जयपुर के वैलोड्रम में भी बहुत ज्यादा बबल होने की वजह से समस्या होती है. ऐसे में अगर सरकार इस खेल की ओर ध्यान देती है तो आने वाले समय में राजस्थान के खिलाड़ी पूरे देश का नाम रोशन कर सकते हैं.

देश के लिए मैडल जीत राजस्थान का नाम रोशन करने का सपना देखने वाले इन खिलाड़ियों की साइकिलों की राहों में कांटे अनेक हैं, किन इसके बाद भी इन खिलाड़ियों ने आज तक अपनी उम्मीद नहीं छोड़ी है. बस दरकार है सिर्फ सरकार के सहयोग की.