अंतरराष्ट्रीय विधायी प्रारूपण प्रशिक्षण कार्यक्रम में लोकसभा अध्यक्ष बिरला ने की शिरकत

भारत की संसद में विधायी प्रक्रिया का संक्षिप्त विवरण देते हुए ओम बिरला ने कहा कि भारत में संवाद और वाद-विवाद की समृद्ध परंपरा रही है. 

अंतरराष्ट्रीय विधायी प्रारूपण प्रशिक्षण कार्यक्रम में लोकसभा अध्यक्ष बिरला ने की शिरकत
एक महीने तक चले इस कार्यक्रम में छब्बीस देशों के चालीस प्रतिभागियों ने भाग लिया.

दिल्ली: लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला (Om Birla) ने शुक्रवार को संसदीय ज्ञानपीठ में संसदीय लोकतंत्र शोध एवं प्रशिक्षण संस्थान की ओर से आयोजित 35वें अंतरराष्ट्रीय विधायी प्रारूपण प्रशिक्षण कार्यक्रम के समापन समारोह की अध्यक्षता की. एक महीने तक चले इस कार्यक्रम में छब्बीस देशों के चालीस प्रतिभागियों ने भाग लिया.

भारत की संसद में विधायी प्रक्रिया का संक्षिप्त विवरण देते हुए ओम बिरला ने कहा कि भारत में संवाद और वाद-विवाद की समृद्ध परंपरा रही है. उन्होंने कहा कि पूरे देश के लोगों का प्रतिनिधित्व करने वाले सभी दलों के सदस्य कानून पर बहुत बारीकी से चर्चा करते हैं और उसके बाद ही इसे संसद द्वारा पारित किया जाता है. बिरला ने बताया कि प्राइड राष्ट्रीय स्तर पर भी विधायी प्रारूपण के बारे में ऐसे ही प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करेगा.

विधायी प्रारूपण संबंधी प्रशिक्षण कार्यक्रम के बारे में बिरला ने कहा कि सुशासन प्रभावी कानून बनाने के साथ जुड़ा है और ऐसे कार्यक्रमों से हमें लोकतन्त्र को सुदृढ़ बनाने में बहुत मदद मिलती है. उन्होंने यह भी कहा कि विधि निर्माण का लक्ष्य लोगों का सामाजिक-राजनीतिक और आर्थिक उत्थान होना चाहिए और इस संदर्भ में प्रभावी विधायी प्रारूपण बहुत महत्वपूर्ण होता है.

बिरला ने  बताया  कि भारतीय लोकतन्त्र की विशेषता पूरी पारदर्शिता से किए जाने वाले स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव हैं. बिरला ने कहा कि तेजी से वैश्वीकृत हो रही दुनिया में यह आवश्यक है कि विश्व के सभी देश परस्पर विश्वास और सहयोग के वातावरण में शांति, सुरक्षा और विकास के लिए मिलकर काम करें. 

om birla attend international legislative drafting training in delhi

परस्पर विश्वास और सहयोग के विषय पर अपने विचार व्यक्त करते हुए बिरला ने कहा कि सारी दुनिया एक परिवार है, के सिद्धांत में विश्वास रखते हैं. उन्होंने अपनी बात जारी रखते हुए कहा कि भारत विश्व के साथ सांस्कृतिक और आध्यात्मिक आदान-प्रदान में अग्रणी भूमिका निभा रहा है और भारत ज्ञान और आध्यात्मिकता की भूमि है.